ये वो अफसर हैं जिन्होंने अफसरशाही छोड़ साधुत्व अपना लिया , वीडियो देखें

आलोक वर्मा

नई दिल्ली। मैे आज आपको उन अफसरों की कहानी बताने जा रहा हूं जो अफसर से साधु या संत बन गए। आप सबको पता ही है कि हरियाणा की वरिष्ठ आईपीएस अफसर भारती अरोड़ा (Ips officer Bharti arora) ने व्यक्तिगत कारणों का हवाला देते हुए सेवा से स्वैच्छिक सेवानवृति (Volutary retirement) की मांग की है। वह अपना शेष जीवन कृष्ण भक्ति में बिताना चाहती हैं। वह वर्तमान में अंबाला रेंज की आईजी के रूप में तैनात हैं। 1998 बैच की आईपीएस भारती अरोड़ा अपने सेवाकाल में कई बार सुर्खियां बटोर चुकी हैं।
इसके पहले 1987 बैच के आईपीएस अफसर और बिहार के पूर्व डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय (gupteshwar panday) को तो आप सब लोग जानते ही हैं। सुशांत सिंह राजपूत (sushant rajput)की मौत से सुर्खियां बटोरने वाले गुप्तेशवर पांडे जब रिटायर हुए तो लगा कि वो राजनीति में जाएंगे चुनाव लड़ेंगे मगर ऐसा नहीं हुआ। अब गुप्तेशवर पांडेय कथा वाचक बन गए हैं। बेबाक बयानो को लेकर अक्सर चर्चा में रहने वाले गुप्तेश्वर पांडे कथा वाचना के दौरान कानून की धाराएं भी बताते हैं। कथा सुनाता उनका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।
अफसर से आध्यात्म की दुनिया में जाने वाले अफसरों की बात हो तो कोई 1971 बैच के आईपीएस अफसर डी के पांडा (DKpanda) को कैसे भूल सकता है। दूसरी राधा के नाम से चर्चित डी के पांडा ने जब राधा भेष धरा था तो टीवी वालो में उनके विजुअल दिखाने की होड़ लग गई थी। जब वो दूसरी राझा बने थे तब यूपी पुलिस में आईजी के पद पर तैनात थे। डी के पांडा अब राधा का भेष छोड़ कृष्णानंद के रूप में आ गए हैं। अब वो खुद को राधा और कृष्ण दोनो का रूप बताते हैं।
आध्यात्म की दुनिया में सम्मान से लिया जाने वाला एक नाम डा. शंकरानंद सरस्वती (Dr shankaranand saraswati)का है। डा. शंकरानंद सरस्वती 1961 बैच के आईएएस अफसर थे। वह वित्त मंत्रालय में संयुक्त सचिव के पद पर कार्यरत थे। चंडीगढ़ में फाइनेंस कमिश्नर रहते हुए वह 1985 में ऋषिकेश पहुंचे जहां का भक्तिमय वातावरण उन्हें मंत्रमुग्ध कर गया। उन्होंने गुरु महामंडलेश्वर भजनानंद सरस्वती से संन्यास मांग लिया। महामंडलेश्वर ने इसकी इजाजत दे दी। इसके बाद डा। शंकरानंद सरस्वती संत बन गए।
इसी तरह का एक और प्रसिद्ध नाम किशोर कुणाल (kishor kunal) का है। किशोर कुणाल का जन्म 10 अगस्त 1950 को हुआ था। उन्होंने अपनी स्कूलिंग मुजफ्फरपुर जिले के बरुराज गांव से की। 20 साल बाद, उन्होंने पटना यूनिवर्सिटी से इतिहास और संस्कृत में ग्रेजुएशन किया। वे 1972 में गुजरात कैडर से भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के अधिकारी बने और आनंद के पुलिस अधीक्षक पद पर तैनात हुए। वहां से वे 1978 में अहमदाबाद के पुलिस उपायुक्त बने। 1983 में उन्हें प्रोमोशन मिला और वे वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के पद पर पटना में तैनात हुए। पटना में उनकी तैनाती के दौरान उनके सख्त रवैये की कई कहानियां प्रचलित हुईं मगर कुछ ही दिन में वह आध्यात्म की तरफ मुड़ गए। पटना स्टेशन के पास मौजूद विशाल हनुमान मंदिर उन्ही की देन कहा जाता है कुणाल ने 1990 से 1994 तक गृह मंत्रालय में ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी के पद पर भी काम किया है। एक आईपीएस अधिकारी के रूप में कुणाल पहले से ही धार्मिक कार्यों में शामिल थे। साल 2000 में पुलिस से रिटायर होने के बाद उन्होंने केएसडी संस्कृत यूनिवर्सिटी दरभंगा के कुलपति का पद संभाला। 2004 तक वे इस पद पर रहे। बाद में वे बिहार राज्य धार्मिक न्यास बोर्ड (BSBRT) के प्रशासक बने और प्रचलित जातिवादी धार्मिक प्रथाओं में सुधार की शुरुआत की।

वीडियो देखें-

Support India Vistar
Picture of Alok Verma
Alok Verma
a senior journalist with a 30 years experience of print, electronics and digital. worked with dainik jagran, news18india, R,bharat, zee news

Latest Posts

BREAKING NEWS
दिल्ली में 100 करोड़ का हेरोइन बरामद देखें वीडियो | दिल्ली में पकड़ा गया खलिस्तानी आतंकी | भारतीय व्यापार महोत्सव 2026 में रिकॉर्ड कारोबार, 1.8 लाख लोग पहुंचे, ₹5,000 करोड़ के अवसर | सावन महोत्सव में दिखी बिहार की महिलाओं की नई तस्वीर, स्टॉल से सम्मान तक छाया उद्यमिता का रंग | ऑनलाइन प्रिडेटर से कैसे बचें ? साइबर स्टॉकिंग, फेक प्रोफाइल और ऑनलाइन उत्पीड़न से सुरक्षा के तरीके | पेंशन कार्ड वाले ऑफर से सावधान, जानिए बचने के उपाय | Rent a Boyfriend Scam: महिला हैं तो जरूर पढ़ लें, और रहिए सावधान | 14 ATM काटे, 13 साल तक बचता रहा! मेवात का ATM मशीन काटने वाला बदमाश भिवाड़ी से गिरफ्तार | CISF की श्रुति जोशी ने Commonwealth Fencing Championships में जीता टीम गोल्ड, व्यक्तिगत स्पर्धा में भी हासिल किया था कांस्य | पार्सल स्कैम क्या है? सोशल मीडिया दोस्ती से कस्टम अधिकारी तक, ऐसे होती है ऑनलाइन ठगी | मानव हाथी संघर्ष के कारण और उपाय: झारखंड में क्यों बढ़ रहा टकराव, क्या है वन विभाग की रणनीति? | Delhi Master Plan 2047: DDA की मंजूरी के बाद दिल्ली में क्या बदलेगा, पुराने मकानों से Metro तक बड़े फैसले |
16-08-2026