एयरपोर्ट पर मदद के नाम पर ठगी: ₹11 हजार देने के बाद खुला राज, CISF को मिले तीन अलग नाम वाले पहचान पत्र

पुणे एयरपोर्ट पर एक यात्री ने मदद मांगने वाले व्यक्ति को ₹11 हजार भेज दिए। CISF ने उसे रोककर जांच की तो अलग-अलग नामों से जुड़े पहचान दस्तावेज मिलने की बात सामने आई। यह मामला एयरपोर्ट पर ठगी से बचने का अहम सबक देता है।
पुणे एयरपोर्ट पर मदद के नाम पर यात्री से पैसे लेने के मामले में CISF द्वारा पकड़ा गया संदिग्ध

एयरपोर्ट पर कोई अनजान व्यक्ति अचानक परेशानी बताकर आपसे पैसे मांगे तो उसकी कहानी कितनी भी भरोसेमंद क्यों न लगे, तुरंत ऑनलाइन पैसे ट्रांसफर करना भारी पड़ सकता है। पुणे एयरपोर्ट पर सामने आया मामला यात्रियों के लिए इसी खतरे की चेतावनी है। यहां एक यात्री ने कथित तौर पर मदद मांगने वाले व्यक्ति की बात पर भरोसा करके ₹11,000 ट्रांसफर कर दिए। CISF ने संदिग्ध गतिविधि देखकर उस व्यक्ति को रोका तो उसके पास अलग-अलग नामों से पहचान पत्र मिलने की बात सामने आई।

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इस मामले की सबसे महत्वपूर्ण बात रकम से ज्यादा ठगी का तरीका है। आरोपी पर आरोप है कि वह एयरपोर्ट जैसे भरोसेमंद और सुरक्षित माने जाने वाले स्थान पर यात्रियों की सहानुभूति हासिल कर पैसे मांगता था।

Pune Airport पर सुबह 5:45 बजे क्या हुआ?

CISF की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक घटना 24 सितंबर 2026 की सुबह करीब 5:45 बजे की है।

एक यात्री आधिकारिक काम से इंडिगो की फ्लाइट 6E-351 से हैदराबाद से पुणे पहुंचा था। अराइवल गेट के बाहर एक अनजान व्यक्ति ने उसे रोका और अपनी परेशानी की कहानी बताई।

उसने यात्री से ₹20,000 की आर्थिक मदद मांगी। यात्री ने उसकी बात पर भरोसा कर लिया और उसके बताए Google Pay खाते में ₹11,000 ट्रांसफर कर दिए।

यहीं से मामले ने नया मोड़ लिया।

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CISF की नजर बातचीत पर पड़ी

प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक पुणे एयरपोर्ट पर तैनात CISF के Security Operations Control Centre (SOCC) और Crime and Intelligence Wing (CIW) की नजर संदिग्ध बातचीत पर पड़ी।

CISF कर्मियों ने व्यक्ति को रोककर पूछताछ शुरू की और उसके दस्तावेजों की जांच की।

पुणे एयरपोर्ट पर CCTV व्यवस्था की निगरानी CISF द्वारा चौबीसों घंटे किए जाने का उल्लेख Airports Authority of India के आधिकारिक दस्तावेज में भी है।

एक व्यक्ति, पहचान से जुड़े तीन अलग नाम

पूछताछ के दौरान सामने आई जानकारी ने संदेह बढ़ा दिया। CISF की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार अलग-अलग दस्तावेज और भुगतान खाते में अलग नाम मिले।

जिस Google Pay खाते में यात्री से ₹11,000 मंगाए गए थे, वह गुज्जरलापुडी बाला कोटेश्वर राव के नाम पर बताया गया।

संदिग्ध के आधार कार्ड और ड्राइविंग लाइसेंस पर एम. वी. दिनेश कुमार, निवासी गुंटूर, आंध्र प्रदेश का नाम दर्ज होने की बात कही गई।

इसके अलावा उसके पास पारुल यूनिवर्सिटी का Faculty ID Card भी मिला, जिस पर अल्लूरु श्याम प्रसाद नाम लिखा था।

CISF के मुताबिक वह इन अलग-अलग पहचानों और दूसरे नाम वाले भुगतान खाते के बारे में संतोषजनक जवाब नहीं दे पाया।

यहां यह स्पष्ट रखना जरूरी है कि मामले की आगे की जांच पुलिस को करनी है। इसलिए अलग-अलग पहचान पत्रों की वास्तविकता और उनका इस्तेमाल किस तरह हुआ, इसका अंतिम निर्धारण पुलिस जांच के बाद ही होगा।

1 सितंबर की घटना से जुड़ा तार

इस मामले को सामान्य संदिग्ध गतिविधि से आगे ले जाने वाला एक और तथ्य सामने आया।

सीआईएसएफ के मुताबिक 1 सितंबर 2026 को पुणे एयरपोर्ट के सिटी साइड इलाके में इसी तरह एक यात्री से ₹18,600 की ठगी हुई थी।

उस घटना के बाद CISF की Crime and Intelligence Wing ने निगरानी बढ़ाई थी।

24 सितंबर को पकड़े गए व्यक्ति की गतिविधियों और पहले की घटना की CCTV फुटेज का मिलान किया गया। CISF का कहना है कि फुटेज के आधार पर दोनों घटनाओं में उसी व्यक्ति की संलिप्तता सामने आई। प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार पूछताछ में उसने पहले की घटना में शामिल होने की बात भी स्वीकार की। उस मामले में साइबर अपराध की शिकायत पहले ही दर्ज कराई गई थी।

Airport Fraud का यह तरीका क्यों महत्वपूर्ण है?

ऑनलाइन ठगी की चर्चा होते ही आमतौर पर फर्जी लिंक, OTP, डिजिटल अरेस्ट या निवेश के नाम पर धोखाधड़ी ध्यान में आती है। पुणे एयरपोर्ट का मामला अलग तरीका दिखाता है।

यहां शुरुआत मोबाइल पर आए किसी अनजान संदेश से नहीं हुई। कथित ठग ने सामने आकर बातचीत की, परेशानी बताई, भरोसा हासिल किया और फिर डिजिटल माध्यम से पैसा लिया।

यही वजह है कि एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन, बस अड्डे या किसी दूसरे सार्वजनिक स्थान पर अचानक आर्थिक मदद मांगने वाले अनजान व्यक्ति के मामले में पहचान की पुष्टि जरूरी हो जाती है।

एयरपोर्ट पर कोई पैसे मांगे तो क्या करें?

किसी यात्री की वास्तविक परेशानी हो सकती है, इसलिए हर मदद मांगने वाले व्यक्ति को संदिग्ध मानना उचित नहीं है। लेकिन सीधे बैंक खाते या UPI पर बड़ी रकम भेजने से पहले कुछ कदम नुकसान से बचा सकते हैं।

पहचान पत्र देखने भर पर भरोसा न करें। जरूरत पड़ने पर एयरलाइन काउंटर, एयरपोर्ट सहायता डेस्क, CISF या अन्य अधिकृत सुरक्षा कर्मियों की मदद लें।

यदि व्यक्ति टिकट, होटल, भोजन या परिवहन जैसी किसी जरूरत के लिए पैसे मांग रहा है तो नकद या सीधे UPI भुगतान करने के बजाय संबंधित अधिकृत काउंटर से मदद दिलाने का विकल्प बेहतर हो सकता है।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि UPI पर दिखाई देने वाला नाम भी देखें। मदद मांगने वाला व्यक्ति कोई और नाम बता रहा हो और भुगतान खाते में किसी तीसरे व्यक्ति का नाम दिखाई दे तो पैसे भेजने से पहले रुक जाना चाहिए।

₹11,000 ट्रांसफर करने वाले यात्री ने दी शिकायत

CISF की कार्रवाई के बाद यात्री को कथित धोखाधड़ी की जानकारी हुई। प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक उसने आरोपी के खिलाफ औपचारिक शिकायत देने पर सहमति जताई।

प्रारंभिक पूछताछ और कार्रवाई पूरी होने के बाद संदिग्ध को आगे की कानूनी कार्रवाई तथा विस्तृत जांच के लिए पुणे के विमानतल पुलिस स्टेशन (Vimantal Police Station) को सौंप दिया गया।

इस तरह की कार्रवाई पुणे एयरपोर्ट पर पहले भी सामने आई है। अगस्त 2024 में फर्जी टिकट से एयरपोर्ट टर्मिनल में प्रवेश के एक अलग मामले में भी CISF द्वारा व्यक्ति को रोके जाने के बाद Airport Police ने गिरफ्तारी की थी। The Times of India

यात्रियों के लिए असली सबक

पुणे एयरपोर्ट की यह घटना एक सरल बात बताती है। ठगी हमेशा फोन की दूसरी तरफ बैठा व्यक्ति ही नहीं करता। सार्वजनिक स्थान पर सामने खड़ा व्यक्ति भी भावनात्मक कहानी, फर्जी या संदिग्ध पहचान और डिजिटल भुगतान का इस्तेमाल कर सकता है।

मदद जरूर करें, लेकिन पहचान और परिस्थिति की पुष्टि के बाद। एयरपोर्ट पर संदेह होने पर सुरक्षा कर्मियों या आधिकारिक सहायता काउंटर तक पहुंचना सीधे पैसे भेजने से बेहतर विकल्प है।

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24-09-2026