Online Shopping Fraud: ऑनलाइन खरीदारी और बैंकिंग में ये गलतियां पड़ सकती हैं भारी, पेमेंट से पहले जांचें ये 10 बातें

ऑनलाइन खरीदारी में एक गलत क्लिक आपके बैंक खाते को खतरे में डाल सकता है। दिल्ली पुलिस के इंस्पेक्टर रमण कुमारि सिंह से जानिए फर्जी वेबसाइट, OTP-CVV Fraud, UPI और phishing scam से बचने के 10 जरूरी तरीके।
ऑनलाइन शॉपिंग फ्रॉड और सुरक्षित ऑनलाइन पेमेंट से बचने के तरीके

ऑनलाइन सामान खरीदते समय कोई ऑफर इतना सस्ता दिखे कि आप तुरंत Buy Now दबाने वाले हों, तो कुछ सेकंड रुकना आपके पैसे बचा सकता है। फर्जी शॉपिंग वेबसाइट, नकली लिंक, बैंक के नाम से भेजे गए संदेश और OTP मांगने वाले कॉल ऑनलाइन ठगी के आम तरीकों में शामिल हैं।

सबसे जरूरी नियम सीधा है। OTP, ATM PIN, नेट बैंकिंग पासवर्ड या CVV किसी व्यक्ति को नहीं बताना है। कोई खुद को बैंक कर्मचारी बताए तब भी ये जानकारी साझा नहीं करनी चाहिए।

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ऑनलाइन खरीदारी और डिजिटल बैंकिंग सुविधाजनक हैं, लेकिन एक गलत क्लिक ठगों को आपके बैंक खाते या निजी जानकारी तक पहुंचाने का रास्ता खोल सकता है। इसलिए पेमेंट करने से पहले वेबसाइट, लिंक और भुगतान की मांग को जांचना जरूरी है।

ऑनलाइन शॉपिंग करते समय सबसे पहले क्या जांचें?

किसी अनजान वेबसाइट पर शानदार ऑफर देखकर सीधे कार्ड या UPI से भुगतान करना ठीक नहीं है। पहले वेबसाइट का नाम और उसका पता ध्यान से पढ़ें।

ठग कई बार लोकप्रिय कंपनियों और ऑनलाइन शॉपिंग प्लेटफॉर्म जैसी दिखने वाली वेबसाइट तैयार करते हैं। उनके वेब पते में एक अक्षर, संख्या या स्पेलिंग का छोटा बदलाव हो सकता है। पहली नजर में ग्राहक को अंतर दिखाई भी नहीं देता।

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Axis Bank की सुरक्षित डिजिटल बैंकिंग संबंधी सलाह में भी बैंक और ई-कॉमर्स वेबसाइटों के नाम और URL की स्पेलिंग जांचने तथा फर्जी और मिलते-जुलते वेब पतों से बचने को कहा गया है।

https और ताले का निशान क्या वेबसाइट सुरक्षित होने की गारंटी है?

यहां एक महत्वपूर्ण बात समझनी चाहिए। वेबसाइट में https होना जरूरी सुरक्षा संकेत है, लेकिन इसे देखकर ही किसी वेबसाइट को असली मान लेना ठीक नहीं है।

आज धोखेबाज भी https वाली वेबसाइट बना सकते हैं। इसलिए ताले के निशान के साथ वेबसाइट का पूरा नाम, डोमेन और विक्रेता की विश्वसनीयता भी जांचें।

यानी https जरूरी है, लेकिन https = वेबसाइट असली है, ऐसा मानना गलती हो सकती है।

बहुत सस्ता ऑफर दिखे तो तुरंत पेमेंट न करें

“आज ही 80 प्रतिशत छूट”, “सिर्फ अगले 10 मिनट के लिए ऑफर” या बाजार भाव से बहुत कम कीमत पर महंगा सामान देने का दावा आपको जल्दबाजी में फैसला लेने के लिए प्रेरित कर सकता है।

ऐसे ऑफर में पहले विक्रेता के बारे में जानकारी तलाशें। वेबसाइट नई या संदिग्ध लगे, संपर्क का भरोसेमंद तरीका न मिले या केवल एडवांस पेमेंट मांगा जा रहा हो तो भुगतान रोक देना बेहतर है।

सोशल मीडिया पर दिखाई देने वाला विज्ञापन भी अपने आप में विक्रेता के असली होने का प्रमाण नहीं है।

OTP, CVV और ATM PIN का नियम याद रखें

आपके बैंक खाते की सुरक्षा में OTP, कार्ड का CVV, ATM PIN और बैंकिंग पासवर्ड बेहद महत्वपूर्ण हैं।

राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल की सुरक्षा सामग्री के मुताबिक नेट बैंकिंग पासवर्ड, OTP, ATM या फोन बैंकिंग PIN और CVV जैसी जानकारी किसी को नहीं देनी चाहिए।

बैंक कर्मचारी बनकर फोन करने वाला व्यक्ति भी ये जानकारी मांगे तो उसे न बताएं।

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एक और संकेत ध्यान रखें। अगर आपने कोई लेनदेन शुरू ही नहीं किया और अचानक फोन पर OTP आ गया, तो इसे नजरअंदाज न करें। अपने बैंक खाते और कार्ड की गतिविधि जांचें और जरूरत पड़ने पर बैंक से तत्काल संपर्क करें।

UPI से पैसे पाने के लिए PIN डालना पड़ता है?

नहीं।

अगर कोई कहता है कि आपके खाते में पैसे भेजने के लिए आपको अपना UPI PIN डालना होगा, तो सतर्क हो जाएं। UPI PIN पैसे भेजने या भुगतान को अधिकृत करने के लिए इस्तेमाल होता है। पैसे प्राप्त करने के लिए PIN डालने की जरूरत नहीं होती।

QR कोड स्कैन करने या किसी अनजान भुगतान अनुरोध को स्वीकार करने से पहले स्क्रीन पर लिखी जानकारी जरूर पढ़ें।

बैंकिंग के लिए पब्लिक Wi-Fi से क्यों बचें?

रेलवे स्टेशन, एयरपोर्ट, होटल, कैफे या किसी दूसरे सार्वजनिक स्थान पर मिलने वाला मुफ्त Wi-Fi सुविधाजनक लग सकता है, लेकिन वित्तीय लेनदेन के लिए भरोसेमंद निजी नेटवर्क बेहतर विकल्प है।

राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल की सुरक्षा सलाह सार्वजनिक कंप्यूटर और मुफ्त Wi-Fi पर ऑनलाइन शॉपिंग, इंटरनेट बैंकिंग और UPI जैसे वित्तीय लेनदेन से बचने को कहती है।

संभव हो तो बैंकिंग और भुगतान अपने मोबाइल डेटा या भरोसेमंद निजी नेटवर्क से करें।

सुरक्षित ऑनलाइन बैंकिंग के 10 जरूरी नियम

क्या करेंक्यों जरूरी है
बैंक का आधिकारिक ऐप या वेबसाइट इस्तेमाल करेंफर्जी बैंकिंग साइट से बचाव
वेबसाइट का पूरा पता जांचेंनकली URL पहचानने में मदद
OTP किसी को न बताएंअनधिकृत भुगतान रोकने के लिए
CVV और ATM PIN गोपनीय रखेंकार्ड और खाते की सुरक्षा
अलग और मजबूत पासवर्ड रखेंएक पासवर्ड लीक होने का असर सीमित होगा
जहां उपलब्ध हो दो स्तर की सुरक्षा चालू करेंखाते को अतिरिक्त सुरक्षा
अनजान लिंक पर क्लिक न करेंफिशिंग से बचाव
पब्लिक Wi-Fi पर बैंकिंग न करेंडेटा चोरी का जोखिम घटेगा
बैंक के SMS और ईमेल अलर्ट देखेंसंदिग्ध लेनदेन जल्दी पता चलेगा
मोबाइल और ऐप अपडेट रखेंसुरक्षा संबंधी कमियों को दूर करने में मदद

फिशिंग संदेश कैसे पहचानें?

फिशिंग संदेश अक्सर डर या जल्दबाजी पैदा करते हैं।

“आपका बैंक खाता आज बंद हो जाएगा।”

“अभी KYC अपडेट करें।”

“आपका कार्ड ब्लॉक होने वाला है।”

“रिफंड पाने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें।”

ऐसे संदेश मिलने पर उसमें दिए गए लिंक से बैंक की वेबसाइट खोलने के बजाय बैंक का आधिकारिक ऐप खोलें या वेबसाइट का पता स्वयं टाइप करें।

राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल फिशिंग को ऐसी धोखाधड़ी के रूप में बताता है जिसमें असली स्रोत जैसा दिखने वाला ईमेल या संदेश भेजकर कार्ड नंबर, CVV और दूसरी निजी जानकारी हासिल करने की कोशिश की जाती है।

ऑनलाइन शॉपिंग में Privacy Policy भी क्यों देखें?

नई वेबसाइट से खरीदारी करते समय यह देखना उपयोगी है कि वह आपका नाम, मोबाइल नंबर, ईमेल और भुगतान से जुड़ी जानकारी किस उद्देश्य से ले रही है।

वेबसाइट पर कंपनी का संपर्क पता, रिटर्न और रिफंड पॉलिसी तथा गोपनीयता नीति आसानी से नहीं मिल रही है तो अतिरिक्त जांच करें।

केवल आकर्षक वेबसाइट डिजाइन देखकर भुगतान करना सही तरीका नहीं है।

ऑनलाइन ठगी हो जाए तो सबसे पहले क्या करें?

अगर बैंक खाते, कार्ड, UPI या किसी दूसरे ऑनलाइन माध्यम से पैसे की ठगी हो गई है तो देर न करें।

राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 पर तुरंत कॉल करें।

इसके साथ राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज की जा सकती है।

वित्तीय साइबर धोखाधड़ी में तेजी से शिकायत करना महत्वपूर्ण है। इसलिए पहले सोशल मीडिया पर घटना बताने या परिचितों से सलाह लेने के बजाय बैंक और आधिकारिक साइबर अपराध व्यवस्था को सूचना दें।

लेनदेन का स्क्रीनशॉट, बैंक संदेश, मोबाइल नंबर, वेबसाइट का पता, UPI ID और उपलब्ध चैट जैसी जानकारी सुरक्षित रखें।

एक क्लिक से पहले पांच सेकंड का नियम

ऑनलाइन खरीदारी या बैंकिंग में एक छोटी आदत काफी काम आ सकती है।

पेमेंट बटन दबाने से पहले पांच सेकंड रुकें और खुद से पूछें:

वेबसाइट असली है? रकम सही है? मैं किसे भुगतान कर रहा हूं? कोई मुझे जल्दबाजी तो नहीं करा रहा? OTP या PIN तो नहीं मांगा जा रहा?

इन पांच सवालों में कोई बात संदिग्ध लगे तो भुगतान रोक दें।

ऑनलाइन सुरक्षा के लिए महंगे उपकरण से ज्यादा जरूरी सही आदतें हैं। लिंक की जांच, मजबूत पासवर्ड, सुरक्षित नेटवर्क और OTP-PIN को गोपनीय रखने जैसी छोटी आदतें आपके बैंक खाते और निजी पहचान को साइबर ठगों से बचाने में बड़ी भूमिका निभा सकती हैं।

जरूरी जानकारी

ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी होने पर तुरंत 1930 पर कॉल करें और राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें। बैंक या भुगतान सेवा प्रदाता को भी तुरंत सूचना दें।

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inspector raman kumar
इंस्पेक्टर रमण कुमार सिंह,दिल्ली पुलिस में बतौर इंस्पेक्टर तैनात है । वे दिल्ली के कई पुलिस थानों के साथ साथ साइबर पुलिस स्टेशन के थानाध्यक्ष रहे है । वे साइबर जागरूकता के लिए साइबर सेफ व्हाट्सएप्प ग्रुप और बी द पुलिस नाम से फेसबुक पेज और फेसबुक ग्रुप के संचालक है ।

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19-09-2026