बढ़ते साइबर फ्राड खासकर बुजुर्गों के साथ हो रहे साइबर क्राइम पर लगाम कस सकता है। इसके लिए हरियाणा पुलिस का प्रयोग बड़ी भूमिका निभा सकता है। गुरुग्राम और पंचकूलां में इसे पायलट प्रोजेक्ट के रूप में आरंभ किया गया है।
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इसे आप डबल OTP सिस्टम 2026 के नाम से जान सकते हैं। यह सिस्टम डिजिटल लेनदेन को दो स्तर की पुष्टि से जोड़ता है, जिससे धोखेबाज़ों के लिए तुरंत पैसे निकाल पाना कठिन हो जाता है। हरियाणा पुलिस ने इसे बैंकों के सहयोग से शुरू किया है। इसे साइबर सुरक्षा में काफी व्यवहारिक माना जा रहा है।
डबल OTP सिस्टम 2026 कैसे काम करता है
इस सिस्टम में किसी भी तरह का लेन देन तभी पूरा हो सकता है जब पहले दो अलग-अलग पुष्टि हो जाए। इसके तहत पहला OTP खाताधारक के पास आता है जबकि दूसरा OTP उसेक किसी परिजन या मित्र के पास भेजा जाता है। लेनदेन तभी पूरा होता है जब दोनो कोड सही से दर्ज किया जाए।
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यह सिस्टम उस समय काफी मजबूत भूमिका निभा सकता है जब साइबर क्रिमिनल डर या दबाव बनाकर ओटीपी हासिल कर लेते हैं। खासकर डिजिटल अरेस्ट जैसे मामलो के दौरान इसमें लगने वाला समय सोचने का मौका देती है।
RBI का Risk-Based 2FA मॉडल क्या कहता है
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने प्रमाणीकरण को सुरक्षित करने के लिए रिस्क बेस्ट 2FA का ढांचा पेश किया है। यह पारंपरिक SMS OTP से आगे जाकर लेनदेन के जोखिम स्तर के अनुसार सुरक्षा तय करता है।
इसमें बायोमेट्रिक पहचान, डिवाइस की विश्वसनीयता और उपयोगकर्ता के व्यवहार जैसे संकेतों को ध्यान में रखा जाता है। इसका फायदा यह है कि सामान्य लेनदेन सरल बने रहते हैं, जबकि संदिग्ध गतिविधियों पर अतिरिक्त सुरक्षा स्वतः लागू हो जाती है।
कितना है प्रभावी
डबल OTP सिस्टम 2026 उन स्थितियों में मजबूत साबित हो सकता है, जहां ठग तुरंत निर्णय लेने का दबाव बनाते हैं। दूसरी तरफ, Risk-Based 2FA बड़े स्तर पर लागू होने वाला ढांचा है जो पूरे बैंकिंग सिस्टम में सुरक्षा का स्तर बढ़ा सकता है।
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हालांकि, डबल OTP मॉडल में कुछ व्यावहारिक चुनौतियाँ भी सामने आती हैं। हर समय परिजन का उपलब्ध होना जरूरी नहीं होता और तत्काल लेनदेन में देरी हो सकती है। वहीं Risk-Based 2FA के लिए बैंकों को मजबूत तकनीकी ढांचे की जरूरत होगी।
आगे की दिशा क्या हो सकती है
विशेषज्ञ मानते हैं कि डबल OTP सिस्टम को एक अतिरिक्त सुरक्षा परत के रूप में अपनाया जाना चाहिए, खासकर उन खातों में जहां जोखिम अधिक है। वहीं RBI का Risk-Based 2FA दीर्घकालिक समाधान के रूप में पूरे देश में लागू हो सकता है।
दोनों मॉडल मिलकर एक ऐसा संतुलन बना सकते हैं, जिसमें सुरक्षा और सुविधा दोनों का ध्यान रखा जाए।








