साइबर ठगी में बैंक अकाउंट फ्रीज कैसे होता है? पंजाब पुलिस की बड़ी कार्रवाई से समझिए पूरी प्रक्रिया

पंजाब पुलिस ने साइबर ठगी से जुड़े 63,749 बैंक खाते फ्रीज कर करोड़ों रुपये के साइबर अपराध नेटवर्क का खुलासा किया है। जानिए बैंक अकाउंट फ्रीज होने की प्रक्रिया, 1930 हेल्पलाइन पर शिकायत का तरीका और रिकवरी की संभावना कैसे बढ़ाई जा सकती है।
पंजाब के डीजीपी गौरव यादव साइबर ठगी से जुड़े बैंक खाते फ्रीज करने की कार्रवाई की जानकारी देते हुए

देश में बढ़ रहे साइबर अपराधों के बीच पंजाब पुलिस की राज्य साइबर अपराध शाखा ने बड़ी सफलता हासिल की है। वर्ष 2024 से अब तक पुलिस ने साइबर ठगी से जुड़े 63,749 बैंक खाते फ्रीज किए हैं। जांच के अनुसार ये खाते करीब 540.34 करोड़ रुपये की साइबर धोखाधड़ी से जुड़े पाए गए।

इस अवधि में पूरे राज्य में 62,253 साइबर अपराध दर्ज हुए, जबकि अब तक लगभग 64 करोड़ रुपये पीड़ितों को वापस भी दिलाए जा चुके हैं।

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यह कार्रवाई सिर्फ बैंक खातों को फ्रीज करने तक सीमित नहीं रही। जांच के दौरान देश के अलग-अलग राज्यों में सक्रिय संगठित साइबर अपराध नेटवर्क, उनके वित्तीय ट्रेल और धोखाधड़ी के कई आधुनिक तरीकों का भी पता चला।

साइबर ठगी में बैंक अकाउंट फ्रीज क्यों किया जाता है?

जब किसी व्यक्ति के साथ ऑनलाइन ठगी होती है और वह समय रहते शिकायत दर्ज कराता है, तो जांच एजेंसियां उस पैसे की डिजिटल ट्रेल का विश्लेषण करती हैं। यदि रकम किसी बैंक खाते में पहुंच चुकी हो और आगे ट्रांसफर होने से पहले उसका पता चल जाए, तो संबंधित खाते को अस्थायी रूप से फ्रीज कराया जाता है। इसका उद्देश्य रकम को आगे निकलने से रोकना और पीड़ित को धन वापस दिलाने की संभावना बढ़ाना होता है।

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पंजाब पुलिस के आंकड़े बताते हैं कि समय पर कार्रवाई होने पर रिकवरी की संभावना काफी बढ़ जाती है। वर्ष 2024 से अब तक लगभग 64 करोड़ रुपये पीड़ितों को लौटाए जा चुके हैं। जनवरी 2025 से ही 38.42 करोड़ रुपये की रिकवरी दर्ज की गई है। धोखाधड़ी की रकम फ्रीज करने की दर भी 16.13 प्रतिशत से बढ़कर 23.43 प्रतिशत हो गई है।

दोआबा क्षेत्र सबसे अधिक प्रभावित

पंजाब का एनआरआई बहुल दोआबा क्षेत्र साइबर अपराधियों के निशाने पर रहा। जालंधर में 20 हजार से अधिक बैंक खाते फ्रीज किए गए और 7.30 करोड़ रुपये से अधिक की रिकवरी हुई। कपूरथला और होशियारपुर भी सबसे अधिक प्रभावित जिलों में शामिल रहे।

विशेषज्ञों के अनुसार एनआरआई परिवारों में विदेश से नियमित धन आने, डिजिटल बैंकिंग पर अधिक निर्भरता, बैंक अधिकारियों के नाम पर होने वाली फर्जी कॉल, फिशिंग लिंक और मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने वाली ठगी के कारण अपराधी इन्हें आसान लक्ष्य मानते हैं। “विदेशी रेमिटेंस”, “वीजा समस्या” और “कस्टम क्लियरेंस” जैसे बहाने बनाकर लोगों को जाल में फंसाने की कोशिश की जाती है।

डीजीपी गौरव यादव ने क्या कहा?

पंजाब पुलिस के डीजीपी गौरव यादव ने बताया कि इस अभियान से न केवल साइबर ठगी में इस्तेमाल होने वाले बैंक खाते फ्रीज किए गए बल्कि देशभर में सक्रिय संगठित साइबर अपराध नेटवर्क का भी खुलासा हुआ। जांच में अंतरराज्यीय कनेक्शन, वित्तीय ट्रेल और उन्नत साइबर फ्रॉड तकनीकों की जानकारी मिली है। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक और समय पर हस्तक्षेप से अपराधियों की गतिविधियों पर प्रभावी रोक लगाई जा रही है।

साइबर ठगी का शिकार होने पर क्या करें?

यदि आपके साथ ऑनलाइन बैंकिंग फ्रॉड, यूपीआई फ्रॉड, निवेश घोटाला, फर्जी कॉल, फिशिंग लिंक या किसी अन्य प्रकार की साइबर ठगी होती है, तो शिकायत दर्ज करने में देरी न करें। जितनी जल्दी शिकायत दर्ज होगी, बैंक खाते फ्रीज होने और रकम वापस मिलने की संभावना उतनी अधिक रहेगी।

सबसे पहले राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें। इसके साथ ही राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज करें। शिकायत करते समय ट्रांजेक्शन आईडी, बैंक विवरण, स्क्रीनशॉट और संबंधित दस्तावेज उपलब्ध कराने से जांच एजेंसियों को कार्रवाई में मदद मिलती है।

साइबर सुरक्षा के लिए रखें ये सावधानियां

फर्जी ईमेल, संदिग्ध वेबसाइट, अनजान लिंक, नकली पॉप-अप और बैंक अधिकारी बनकर आने वाले कॉल से सतर्क रहें। किसी भी व्यक्ति के साथ ओटीपी, यूपीआई पिन, नेट बैंकिंग पासवर्ड या कार्ड की गोपनीय जानकारी साझा न करें। यदि कोई संदिग्ध गतिविधि दिखाई दे तो तुरंत बैंक और साइबर हेल्पलाइन को सूचना दें।

पंजाब पुलिस की यह कार्रवाई बताती है कि साइबर ठगी में बैंक अकाउंट फ्रीज करना पीड़ितों के पैसे बचाने का एक प्रभावी माध्यम बनता जा रहा है। हालांकि इसकी सफलता काफी हद तक इस बात पर निर्भर करती है कि शिकायत कितनी जल्दी दर्ज की जाती है। इसलिए किसी भी साइबर धोखाधड़ी की स्थिति में तुरंत 1930 हेल्पलाइन और एनसीआरपी पोर्टल का उपयोग करना सबसे महत्वपूर्ण कदम है।

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inspector raman kumar
इंस्पेक्टर रमण कुमार सिंह,दिल्ली पुलिस में बतौर इंस्पेक्टर तैनात है । वे दिल्ली के कई पुलिस थानों के साथ साथ साइबर पुलिस स्टेशन के थानाध्यक्ष रहे है । वे साइबर जागरूकता के लिए साइबर सेफ व्हाट्सएप्प ग्रुप और बी द पुलिस नाम से फेसबुक पेज और फेसबुक ग्रुप के संचालक है ।

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21-07-2026