दिल्ली में घर बनाने का सपना देखने वाले लोगों के लिए एक राहत की खबर है। दिल्ली विकास प्राधिकरण यानी DDA ने ‘ऑनलाइन बिल्डिंग परमिट सिस्टम’ (OBPS) के तहत नया ‘सिंगल विंडो क्लीयरेंस सिस्टम’ शुरू किया है। इसका उद्देश्य दिल्ली में घर बनाने और बिल्डिंग अप्रूवल प्रक्रिया को तेज, पारदर्शी और आसान बनाना है।
अब घर मालिकों, आर्किटेक्ट्स और बिल्डर्स को अलग-अलग दफ्तरों के चक्कर कम लगाने पड़ सकते हैं, क्योंकि कई सेवाएं एक ही ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराई गई हैं। दिल्ली के उपराज्यपाल सरदार तरनजीत सिंह संधू की पहल पर यह सुविधा आरंभ हुई है।
दिल्ली में घर बनाने वालों को क्या फायदा मिलेगा?
दिल्ली में घर बनवाने के दौरान सबसे बड़ी परेशानी बिल्डिंग प्लान पास कराने, NOC लेने और दस्तावेज़ जमा करने की प्रक्रिया को माना जाता रहा है। नई डिजिटल व्यवस्था इस बोझ को कम करने की कोशिश करती है।
इस सिस्टम के जरिए लोग:
- बिल्डिंग प्लान ऑनलाइन जमा कर सकते हैं
- जरूरी दस्तावेज़ अपलोड कर सकते हैं
- NOC के लिए आवेदन कर सकते हैं
- ऑनलाइन फीस भर सकते हैं
- आवेदन की स्थिति रियल टाइम में देख सकते हैं
- डिजिटल हस्ताक्षरित अप्रूवल प्राप्त कर सकते हैं
इससे समय की बचत होने के साथ प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बनने की उम्मीद है।
क्या है Single Window OBPS सिस्टम?
यह एक ऐसा डिजिटल प्लेटफॉर्म है जहां बिल्डिंग परमिशन से जुड़ी कई सेवाएं एक ही जगह उपलब्ध रहेंगी। पहले लोगों को कई विभागों में अलग-अलग आवेदन देने पड़ते थे। नई व्यवस्था में अधिकतर प्रक्रिया ऑनलाइन पूरी हो सकेगी।
DDA का कहना है कि इससे प्रक्रियागत देरी और अनावश्यक मानवीय हस्तक्षेप कम होगा। साथ ही जवाबदेही और प्रशासनिक दक्षता बढ़ेगी।
AI तकनीक से होगी प्लान जांच
नई प्रणाली में AI आधारित प्लान जांच और ऑटोमेटेड कम्प्लायंस चेक जैसी तकनीकों को शामिल किया गया है। इसके अलावा:
- जियो टैग्ड मोबाइल निरीक्षण
- SMS और ईमेल अलर्ट
- डिजिटल रिकॉर्ड सिस्टम
- ऑनलाइन ट्रैकिंग
जैसी सुविधाएं भी जोड़ी गई हैं।
विशेषज्ञ मानते हैं कि ऐसे डिजिटल सिस्टम भविष्य में शहरी विकास और संपत्ति प्रबंधन प्रक्रियाओं को अधिक व्यवस्थित बना सकते हैं।
क्या दिल्ली में घर बनाना अब पहले से आसान होगा?
रियल एस्टेट और शहरी विकास से जुड़े जानकारों का मानना है कि यदि सिस्टम प्रभावी तरीके से लागू होता है तो दिल्ली में घर बनाने की प्रक्रिया पहले की तुलना में सरल हो सकती है। खासकर उन लोगों को राहत मिल सकती है जो लंबे समय तक अप्रूवल और दस्तावेज़ी प्रक्रिया में फंसे रहते थे।
हालांकि, अंतिम परिणाम इस बात पर निर्भर करेगा कि सिस्टम कितनी तेजी और पारदर्शिता के साथ काम करता है।