सावधान! एआई बदल रहा है साइबर जालसाजी का चेहरा

भारत में एआई तकनीक ने साइबर धोखाधड़ी को नया रूप दे दिया है, जहां फिशिंग, डीपफेक और निवेश स्कैम पहले से अधिक खतरनाक और विश्वसनीय बनते जा रहे हैं।
AI आधारित साइबर धोखाधड़ी का प्रतीकात्मक दृश्य जिसमें डिजिटल फ्रॉड और पहचान की नकल दिखाई गई है

क्या आपको मालूम है कि एआई सिर्फ नौकरियों के लिए खतरा नहीं है। नए मामले संकेत दे रहे हैं कि भारत में एआई साइबर धोखाधड़ी पूरे मामले का चेहरा ही बदल रहा है। एफबीआई की 2025 इंटरनेट क्राइम रिपोर्ट के आंकड़े आपको चौंकने के लिए मजबूर कर देंगे।

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भारत में एआई साइबर अपराधः क्या कहते हैं एफबीआई के आंकड़े


एफबीआई की इंटरनेट क्राइम रिपोर्ट (2025) के अनुसार, अमेरिकियों ने 22,364 शिकायतें दर्ज कीं जिनमें एआई से जुड़ा विवरण था और 893 मिलियन डॉलर एआई-चालित धोखाधड़ी में गंवाए। यह रिपोर्ट के 25 साल के इतिहास में पहली बार है जब एआई-सक्षम धोखाधड़ी को अलग श्रेणी के रूप में औपचारिक रूप से दर्ज किया गया।

क्या है भारत का संदर्भ

भारत में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) तेजी से वित्तीय धोखाधड़ी के तरीकों को बदल रही है। गृह मंत्रालय के अंतर्गत भारतीय साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) ने 2025 में एआई-चालित धोखाधड़ी में तेज़ी से वृद्धि दर्ज की।

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राज्यों में हजारों पीड़ितों ने सैकड़ों करोड़ रुपये के नुकसान की रिपोर्ट की, और अब एआई-सक्षम धोखाधड़ी को राष्ट्रीय साइबर अपराध निगरानी में अलग श्रेणी के रूप में पहचान दी गई है। स्पष्ट है कि पारंपरिक साइबर अपराध अब एआई-सक्षम धोखाधड़ी की तरफ बढ़ रहा हैं।

आंकड़े झूठ नहीं बोलते

साल 2025 के उपलब्ध डाटा की बात करें तो कुल भारत में एआई साइबर अपराध से नुकसान ₹19,812 से ₹22,495 करोड़ के बीच आंका गया है। देशभर में 21 से 28 लाख शिकायतें दर्ज की गईं।

ये आंकड़े केवल रिपोर्ट किए गए मामलों को दर्शाते हैं। वास्तविक नुकसान इससे कहीं अधिक हो सकता है, क्योंकि कई मामलों की शिकायत दर्ज ही नहीं होती।

एआई कैसे बदल रहा है धोखाधड़ी का तरीका

एआई तकनीक ने अपराधियों को ऐसे उपकरण दे दिए हैं जिनसे वे पहले से अधिक विश्वसनीय धोखाधड़ी कर पा रहे हैं। फिशिंग अब अधिक वास्तविक लगने वाले ईमेल और वेबसाइट के रूप में सामने आ रही है।
व्हाट्सएप और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म पर नकली पहचान बनाना आसान हो गया है।

आवाज़ और वीडियो क्लोनिंग के जरिए परिवार के सदस्य, बैंक अधिकारी या सरकारी प्रतिनिधि की नकल की जा रही है।निवेश धोखाधड़ी में डीपफेक का इस्तेमाल कर भरोसा जीतने की कोशिश की जा रही है।

हाल के रुझान: निवेश धोखाधड़ी सबसे आगे

पिछले छह महीनों में भारत के प्रमुख शहरों में 30,000 से अधिक लोग निवेश धोखाधड़ी का शिकार हुए हैं।कुल नुकसान ₹1,500 करोड़ से अधिक बताया गया है। इसके अलावा बिज़नेस ईमेल कम्प्रोमाइज और टेक सपोर्ट स्कैम भी तेजी से बढ़ रहे हैं।

भारत के लिए इसका क्या मतलब है

यह स्थिति कई महत्वपूर्ण संकेत देती है। धोखाधड़ी अब अधिक उन्नत और बड़े पैमाने पर की जा रही है।
पहचान करना कठिन होता जा रहा है क्योंकि सामग्री अधिक वास्तविक दिखती है। एआई अपराध के नए तरीके नहीं बना रहा, बल्कि पुराने तरीकों को अधिक प्रभावी बना रहा है।

ऐसे में बैंकिंग सिस्टम, फिनटेक प्लेटफॉर्म और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के लिए सत्यापन और निगरानी तंत्र को मजबूत करना जरूरी हो गया है।



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inspector raman kumar
इंस्पेक्टर रमण कुमार सिंह,दिल्ली पुलिस में बतौर इंस्पेक्टर तैनात है । वे दिल्ली के कई पुलिस थानों के साथ साथ साइबर पुलिस स्टेशन के थानाध्यक्ष रहे है । वे साइबर जागरूकता के लिए साइबर सेफ व्हाट्सएप्प ग्रुप और बी द पुलिस नाम से फेसबुक पेज और फेसबुक ग्रुप के संचालक है ।

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11-08-2026