दिल्ली की मायापुरी पुलिस ने एक ऐसे म्यूल अकाउंट सिंडिकेट का पर्दाफाश किया जो साइबर अपराध में मिली रकम को इधर से उधर करने में लिप्त था। इस सिलसिले में तीन पुलिस के हत्थे चढ़े हैं। पुलिस के मुताबिक इनकी पहचान दीपक, कृष्ण प्रताप सिंह और शशिकांत के रूप में हुई है।
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ऐसे पकड़ा गया म्यूल अकाउंट सिंडिकेट
पश्चिमी दिल्ली पुलिस के डीसीपी दराडे शरद भास्कर के मुताबिक संदिग्ध बैंक खाते की पहचान हुई थी। एसीपी इंद्रराज सिंह मीणा की निगरानी और इंस्पेक्टर महिंदर लाल और इंस्पेक्टर अमित धानी के नेतृत्व में एएसआई सुभाष, हेडकांस्टेबल महेश, सुमेर सिंह और कांस्टेबल दीपक की टीम जांच कर रही थी।
जांच में पता लगा कि इस म्यूल अकाउंट का कनेक्शन अलग अलग राज्यों में दर्ज साइबर क्राइम की कई शिकायतों से है। जांच में यह भी पता लगा कि पीड़ितों को विभिन्न ऑनलाइन तरीकों से ठगा गया था। ठगी से प्राप्त रकम को कई चरणों वाले लेनदेन के जरिए इस खाते में ट्रांसफर किया गया था।
तकनीक जांच में पता लगा कि इस अकाउंट का इस्तेमाल संगठित साइबर सिंडिकेट द्वारा किया जा रहा है। ताकि 1.5 करोड़ की रकम को दूसरी जगह भेजा जा सके।
इस तरह खोलते थे म्यूल अकाउंट
जांच में सामने आया कि यह गिरोह मुख्य रूप से बेरोजगार युवाओं को अपना निशाना बनाता था। उन्हें मोटे कमीशन का लालच देकर उनके नाम पर बैंक खाते खुलवाए जाते थे। इन खातों का उपयोग साइबर ठगी से प्राप्त पैसे को प्राप्त करने और फिर उसे लेयरिंग (कई खातों में घुमाना) के जरिए गायब करने के लिए किया जाता था। गिरोह ने अब तक ₹1.5 करोड़ से अधिक की राशि का ट्रांजेक्शन किया है।
पुलिस ने आरोपियों के पास से वारदात में इस्तेमाल मोबाइल फोन, सिम कार्ड और फर्जी फर्मों के नाम पर जारी चेक बुक व अन्य दस्तावेज बरामद किए हैं।
पश्चिम जिले के डीसीपी (IPS) दराडे शरद भास्कर ने बताया कि इस मामले में आगे की जांच जारी है ताकि गिरोह के अन्य नेटवर्क और मास्टरमाइंड का पता लगाया जा सके। उन्होंने जनता से अपील की है कि वे किसी भी लालच में आकर अपना बैंक खाता या डिजिटल जानकारी किसी अनजान व्यक्ति को न दें, क्योंकि ऐसा करना आपको अनजाने में अपराध का हिस्सा बना सकता है। उत्कृष्ट कार्य करने वाली टीम को पुरस्कृत करने की घोषणा भी की गई है।







