दिल्ली पुलिस की परेड, अमित शाह की सलामी और आगे का संदेश

दिल्ली पुलिस के मंच से अमित शाह ने न सिर्फ राजधानी की सुरक्षा पर बात की, बल्कि नई न्याय संहिताओं और 2026 तक नक्सलवाद खत्म करने का स्पष्ट रोडमैप भी रखा।
अमित शाह दिल्ली पुलिस परेड की सलामी के बाद मेडल पहनाते हुए

दिल्ली पुलिस की परेड के बाद मंच से जो कहा गया, वह सिर्फ औपचारिक संबोधन नहीं था। यह देश की आंतरिक सुरक्षा, कानून व्यवस्था और न्याय प्रणाली को लेकर सरकार का साफ संदेश था।दिल्ली पुलिस के 79वें स्थापना दिवस समारोह में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने राजधानी की सुरक्षा से लेकर आतंकवाद, नक्सलवाद और नई न्याय संहिताओं तक पर खुलकर बात की।

दिल्ली की सुरक्षा क्यों सबसे ऊंचे वैश्विक मानकों पर जरूरी है

अपने संबोधन में अमित शाह ने कहा कि दिल्ली सिर्फ एक शहर नहीं, बल्कि देश की लोकतांत्रिक अस्मिता और सत्ता का केंद्र है। राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के कार्यालय, अंतरराष्ट्रीय आयोजन और विदेशी मेहमानों की मौजूदगी के कारण दिल्ली पुलिस की जिम्मेदारी बाकी राज्यों की तुलना में कहीं अधिक बढ़ जाती है। उनके मुताबिक, राजधानी की सुरक्षा व्यवस्था को हर वैश्विक मानक पर खरा उतरना ही होगा।

स्पेशल सेल को मजबूत करने का 368 करोड़ का प्लान

अमित शाह ने बताया कि दिल्ली पुलिस को और सक्षम बनाने के लिए स्पेशल सेल के इंटीग्रेटेड मुख्यालय का ई-शिलान्यास किया गया है। करीब 368 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला यह केंद्र नार्कोटिक्स और आतंकवाद से निपटने में देश का सबसे आधुनिक स्पेशल सेल मुख्यालय बनेगा। इसमें: अत्याधुनिक इंडोर फायरिंग रेंज, वॉर रूम और साइबर लैब, प्रशिक्षण हॉल और आधुनिक उपकरण शामिल होंगे, जो देशभर की पुलिस इकाइयों के लिए मॉडल के तौर पर काम करेंगे।

सेफ सिटी प्रोजेक्ट और 10 हजार कैमरों की योजना

गृह मंत्री ने बताया कि 857 करोड़ रुपये की लागत से बने सेफ सिटी प्रोजेक्ट के पहले चरण का लोकार्पण किया गया है। इसके तहत:

  • इंटीग्रेटेड कमांड कंट्रोल सेंटर (C4I)
  • 10 हजार कैमरों से दिल्ली को जोड़ने की योजना

पहले चरण में 2100 कैमरे लाइव हो चुके हैं और पहले से लगे 15 हजार से अधिक कैमरों को भी सिस्टम से जोड़ा गया है। अमित शाह ने कहा कि यह परियोजना आने वाले समय में दिल्ली की सुरक्षा को नई ऊंचाई देगी।

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वीडियो देखेंः

नई न्याय संहिताएं: कानून से न्याय की ओर बदलाव

अपने भाषण में अमित शाह ने नई आपराधिक न्याय संहिताओं को ऐतिहासिक बताया।
उन्होंने कहा कि अंग्रेजों के बनाए 150 साल पुराने कानूनों को हटाकर
अब न्याय-केन्द्रित व्यवस्था लागू की गई है।

उनका दावा है कि:

  • अगले दो साल में पूर्ण अमल के बाद
  • किसी भी FIR पर सुप्रीम कोर्ट तक फैसला
  • तीन साल के भीतर संभव हो सकेगा

महिलाओं, बच्चों और डिजिटल अपराधों पर खास जोर

नई न्याय संहिताओं में:

  • महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराधों पर अलग अध्याय
  • ई-FIR और ज़ीरो FIR को कानूनी मान्यता
  • ICJS के तहत पुलिस, अदालत, फॉरेंसिक और जेल व्यवस्था को ऑनलाइन जोड़ना जैसे प्रावधान शामिल किए गए हैं।

सात साल से अधिक सजा वाले मामलों में फॉरेंसिक विज़िट को अनिवार्य किया गया है।

आतंकवाद की परिभाषा

अमित शाह ने कहा कि देश के कानूनों में पहली बार आतंकवाद को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है।

इसके साथ:

  • विदेश भागे अपराधियों के लिए Trial in Absentia
  • भारत के बाहर मौजूद संपत्तियों को कुर्क करने का प्रावधान
  • डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक दस्तावेजों को कानूनी मान्यता

भी दी गई है।

नक्सलवाद और नॉर्थईस्ट पर 2026 का लक्ष्य

गृह मंत्री ने कहा कि नक्सलवाद लंबे समय से देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए बड़ी चुनौती रहा है। उन्होंने भरोसा जताया कि 31 मार्च 2026 तक देश को नक्सली हिंसा से मुक्त कर दिया जाएगा।

नॉर्थईस्ट को लेकर उन्होंने बताया कि:

  • 10 हजार से अधिक युवाओं ने हथियार छोड़े
  • 12 से ज्यादा शांति समझौते हुए
  • क्षेत्र में स्थायी शांति की दिशा में बड़ा बदलाव आया है

आगे गृह मंत्रालय की प्राथमिकता क्या होगी

अमित शाह के मुताबिक आने वाले समय में:

  • देशभर में CCTV का व्यापक नेटवर्क
  • सीमाओं पर सुरक्षा का आधुनिकीकरण
  • घुसपैठ रोकने पर फोकस
  • नई न्याय संहिताओं का पूर्ण और प्रभावी अमल

गृह मंत्रालय की शीर्ष प्राथमिकताएं होंगी।

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24-09-2026