आप बैंक का मोबाइल ऐप इस्तेमाल करते हैं, ऑनलाइन भुगतान करते हैं या किसी एआई टूल से अपने सवालों के जवाब लेते हैं। हो सकता है कि आपको अंदाजा भी न हो कि इन सेवाओं के पीछे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की कितनी बड़ी भूमिका हो चुकी है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि अगर इन सेवाओं में इस्तेमाल होने वाला एआई सिस्टम हैक हो जाए तो आपकी निजी जानकारी का क्या होगा? क्या आपके बैंक खाते, पहचान से जुड़े दस्तावेज और दूसरी गोपनीय जानकारियां साइबर अपराधियों के हाथ लग सकती हैं?
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इसी खतरे को देखते हुए भारत की साइबर सुरक्षा एजेंसी CERT-In ने 4 नवंबर 2026 को AI Security Auditing Guidelines जारी की हैं। इनका उद्देश्य एआई सिस्टम तैयार करने और उनका इस्तेमाल करने वाली संस्थाओं की सुरक्षा व्यवस्था की जांच करना और साइबर हमले की स्थिति में उनकी जवाबदेही तय करना है।
नई गाइडलाइंस के तहत निर्धारित श्रेणियों में आने वाली एआई से जुड़ी साइबर सुरक्षा घटनाओं की सूचना छह घंटे के भीतर देनी होगी। इसके अलावा सुरक्षा से जुड़े रिकॉर्ड कम से कम 180 दिनों तक सुरक्षित रखने और एआई सिस्टम की नियमित सुरक्षा जांच पर भी जोर दिया गया है।
आम लोगों के लिए ये निर्देश इसलिए महत्वपूर्ण हैं क्योंकि आज बैंकिंग, ऑनलाइन खरीदारी, अस्पताल, सरकारी सेवाओं और मोबाइल ऐप में एआई का इस्तेमाल बढ़ रहा है। इनमें सुरक्षा की चूक का असर सीधे ग्राहकों की निजी जानकारी और आर्थिक सुरक्षा पर पड़ सकता है।
एआई सिस्टम हैक होने पर आपकी निजी जानकारी कैसे खतरे में पड़ सकती है?
आज कई कंपनियां ग्राहकों की जानकारी समझने, सवालों के जवाब देने और सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए एआई आधारित सिस्टम का इस्तेमाल करती हैं। बैंकिंग और वित्तीय सेवाओं में भी इसका उपयोग बढ़ रहा है।
मान लीजिए आपने किसी ऑनलाइन सेवा पर अपनी निजी जानकारी साझा की है और उस सेवा से जुड़ा एआई सिस्टम साइबर अपराधियों के निशाने पर आ जाता है। ऐसी स्थिति में सिस्टम की सुरक्षा में मौजूद कमजोरी का फायदा उठाकर गोपनीय जानकारी तक पहुंचने की कोशिश की जा सकती है।
इसी तरह किसी कंपनी के एआई सिस्टम में सेंध लगने पर ग्राहकों के डेटा का दुरुपयोग हो सकता है। चोरी की गई जानकारी का इस्तेमाल फर्जी फोन कॉल, बैंकिंग धोखाधड़ी और पहचान की चोरी जैसे अपराधों में किया जा सकता है।
CERT-In की नई गाइडलाइंस में एआई सिस्टम की सुरक्षा जांच और डेटा प्रबंधन पर जोर देने का मकसद ऐसे जोखिमों को कम करना है।
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साइबर हमले की जानकारी छह घंटे में देनी होगी
नई गाइडलाइंस का सबसे अहम प्रावधान निर्धारित साइबर सुरक्षा घटनाओं की रिपोर्टिंग से जुड़ा है। यदि किसी एआई सिस्टम पर ऐसा साइबर हमला होता है जो CERT-In की रिपोर्टिंग कसौटियों में आता है, तो संबंधित संस्था को छह घंटे के भीतर इसकी सूचना देनी होगी।
इसका मतलब यह नहीं है कि एआई सिस्टम की हर तकनीकी खराबी या गलत जवाब की रिपोर्ट छह घंटे में करना अनिवार्य है। यह समयसीमा निर्धारित श्रेणियों में आने वाली साइबर सुरक्षा घटनाओं के लिए है।
इसका आम नागरिक से सीधा संबंध है। मान लीजिए किसी बैंक, ऑनलाइन भुगतान सेवा या दूसरी डिजिटल कंपनी के एआई सिस्टम में सेंध लगती है और ग्राहकों का डेटा प्रभावित होता है। ऐसी स्थिति में समय पर रिपोर्टिंग से घटना की जानकारी संबंधित साइबर सुरक्षा एजेंसी तक पहुंच सकती है और जांच तथा जरूरी कार्रवाई शुरू करने में मदद मिल सकती है।
यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि छह घंटे में साइबर घटना की रिपोर्टिंग का प्रावधान CERT-In के 28 अप्रैल 2022 के निर्देशों में पहले से मौजूद है। नई गाइडलाइंस इसे एआई सिस्टम की सुरक्षा जांच के संदर्भ में शामिल करती हैं।
180 दिन तक रिकॉर्ड सुरक्षित रखने से क्या फायदा होगा?
साइबर अपराध की जांच में कई बार सबसे बड़ी परेशानी डिजिटल सबूत जुटाने की होती है। अपराधी सिस्टम में अपनी गतिविधियों के निशान मिटाने या पहचान छिपाने की कोशिश कर सकते हैं।
CERT-In की गाइडलाइंस में सुरक्षा से जुड़े लॉग कम से कम 180 दिनों तक सुरक्षित रखने पर जोर दिया गया है। इन रिकॉर्ड से यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि सिस्टम में संदिग्ध गतिविधि कब हुई, किस खाते से प्रवेश किया गया और सुरक्षा में सेंध लगाने के लिए क्या तरीका अपनाया गया।
अगर किसी डिजिटल सेवा में सेंध लगने से ग्राहकों की जानकारी प्रभावित होती है, तो ऐसे रिकॉर्ड जांच एजेंसियों के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।
इसका लाभ उन लोगों को भी मिल सकता है जो किसी ऑनलाइन धोखाधड़ी के बाद यह जानना चाहते हैं कि उनकी जानकारी कहां से लीक हुई और उसका दुरुपयोग कैसे किया गया।
एआई से तैयार नकली आवाज और वीडियो पर भी बढ़ेगी चिंता
एआई के कारण साइबर ठगी का एक बड़ा खतरा नकली आवाज और वीडियो से जुड़ा है। अपराधी किसी व्यक्ति की आवाज की नकल करके उसके रिश्तेदार या परिचित बन सकते हैं। इसके बाद आपात स्थिति का हवाला देकर पैसे मांग सकते हैं।
इसी तरह डीपफेक वीडियो के जरिए किसी अधिकारी, कारोबारी या परिचित का नकली वीडियो तैयार करके लोगों को गुमराह किया जा सकता है।
एआई की मदद से तैयार फर्जी ईमेल और संदेश भी लोगों को बैंकिंग धोखाधड़ी या दूसरी ऑनलाइन ठगी का शिकार बना सकते हैं।
CERT-In की नई गाइडलाइंस में एआई सिस्टम की सुरक्षा, डेटा प्रबंधन और निगरानी पर दिया गया जोर इन खतरों से निपटने में संस्थाओं की भूमिका को महत्वपूर्ण बनाता है।
एआई सिस्टम को जोखिम के आधार पर बांटना क्यों जरूरी है?
हर एआई सिस्टम से एक जैसा खतरा नहीं होता। किसी सामान्य चैटबॉट की खराबी और किसी बैंक या अस्पताल में इस्तेमाल होने वाले एआई सिस्टम की सुरक्षा में सेंध के परिणाम अलग-अलग हो सकते हैं।
इसीलिए CERT-In की गाइडलाइंस में एआई सिस्टम के जोखिम का आकलन करने की व्यवस्था रखी गई है। इसमें कम, मध्यम, उच्च और गंभीर जोखिम वाली श्रेणियों के आधार पर सुरक्षा जांच और निगरानी की जरूरत तय की जाती है।
उदाहरण के लिए, अगर किसी एआई सिस्टम का इस्तेमाल सामान्य जानकारी देने के लिए होता है, तो उससे जुड़ा जोखिम अलग होगा। लेकिन अगर कोई सिस्टम संवेदनशील वित्तीय या स्वास्थ्य संबंधी जानकारी से जुड़ा है, तो उसकी सुरक्षा में चूक का असर कहीं अधिक गंभीर हो सकता है।
इस व्यवस्था से उन संस्थाओं की जिम्मेदारी बढ़ेगी जो लोगों की निजी जानकारी और महत्वपूर्ण सेवाओं से जुड़े एआई सिस्टम का संचालन करती हैं।
कंपनियों की जवाबदेही क्यों महत्वपूर्ण है?
आम ग्राहक किसी बैंक या ऑनलाइन कंपनी की सेवा का इस्तेमाल करते समय यह नहीं जानता कि उसके पीछे कौन-सा एआई मॉडल काम कर रहा है और उसकी सुरक्षा कैसे की जा रही है। यह जिम्मेदारी संबंधित संस्था की होती है कि वह ग्राहकों की जानकारी को सुरक्षित रखने के लिए जरूरी तकनीकी इंतजाम करे।
नई गाइडलाइंस में एआई सिस्टम की सुरक्षा जांच, डेटा प्रबंधन, मानवीय निगरानी और बाहरी तकनीकी सेवाओं से जुड़े जोखिमों पर जोर दिया गया है।
कंपनियों को अपने एआई सिस्टम का जोखिम समझना होगा और उसके अनुसार सुरक्षा ऑडिट, निगरानी तथा साइबर हमले से निपटने की व्यवस्था करनी होगी। अगर कोई संस्था किसी दूसरी कंपनी की एआई सेवा इस्तेमाल करती है, तो उससे जुड़े सुरक्षा जोखिमों पर भी ध्यान देना होगा।
इसका उद्देश्य यह है कि एआई तकनीक का इस्तेमाल करने वाली संस्थाएं सुरक्षा में चूक होने पर अपनी जिम्मेदारी से बच न सकें।
आम लोगों को क्या सतर्कता बरतनी चाहिए?
सरकार की नई गाइडलाइंस मुख्य रूप से एआई सिस्टम विकसित करने और उनका इस्तेमाल करने वाली संस्थाओं के लिए हैं। आम लोगों को भी अपनी डिजिटल जानकारी की सुरक्षा को लेकर सतर्क रहना चाहिए।
किसी अनजान लिंक पर क्लिक करने, संदिग्ध ऐप डाउनलोड करने या फोन पर बैंकिंग संबंधी गोपनीय जानकारी साझा करने से बचना जरूरी है। किसी परिचित की आवाज में पैसे मांगने वाला फोन आए तो दूसरे माध्यम से उसकी पहचान की पुष्टि करें। एआई से तैयार नकली आवाज और वीडियो पर आंख बंद करके भरोसा करना भारी पड़ सकता है।
इसी तरह किसी एआई टूल में बैंक खाते, पासवर्ड, पहचान पत्र या दूसरी गोपनीय जानकारी साझा करने से बचना चाहिए।
आपकी डिजिटल सुरक्षा से क्यों जुड़ी हैं CERT-In की नई गाइडलाइंस?
एआई का इस्तेमाल अब रोजमर्रा की सेवाओं का हिस्सा बन रहा है। ऐसे में किसी बैंक, कंपनी या सरकारी सेवा के एआई सिस्टम में सुरक्षा की चूक का असर सीधे आम लोगों पर पड़ सकता है।
CERT-In की नई AI Security Auditing Guidelines में छह घंटे में निर्धारित साइबर घटनाओं की रिपोर्टिंग, 180 दिनों तक सुरक्षा रिकॉर्ड रखने और जोखिम के आधार पर एआई सिस्टम की जांच जैसे प्रावधान शामिल हैं।
इन उपायों से एआई से जुड़े साइबर हमलों का पता लगाने, डिजिटल सबूत सुरक्षित रखने और संबंधित संस्थाओं की जवाबदेही तय करने में मदद मिल सकती है। आम लोगों के लिए इसका सबसे बड़ा महत्व यही है कि जिन डिजिटल सेवाओं पर वे रोज भरोसा करते हैं, उनकी सुरक्षा को लेकर संस्थाओं की जिम्मेदारी और अधिक स्पष्ट हो।


