सोशल साइट्स पर आतंकियों से लेकर गैंगस्टर्स तक का जलवा

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आलोक वर्मा

सरकार ने जम्मू में आतंकी गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए, ब्हाट्सएप्प कॉल पर पाबंदी लगाने की दिशा में एक कदम बढ़ा दिया। लेकिन सोशल साइट्स की दुनिया में बादशाहत कायम कर रही काली दुनिया पर लगाम इतने भर से नहीं कसा जा सकता। क्योंकि सच बहुत कड़वा है, सच ये है कि व्हाट्सअप की तरह टेलीग्राम और एक दर्जन और ऐसे सोशल साइट औऱ ऐप्प हैं जिसका इस्तेमाल अपराध और आतंक की दुनिया कर रही है। पठानकोट हमले की जांच में ऐसे ऐप्प के इस्तेमाल की बात सामने आ चुकी है जिनके नाम भी शायद ही आपने सुना हो। एनआईए के एक बड़े अधिकारी के मुताबिक आतंकी सामान्यतया उन एप्प का इस्तेमाल करते है जिनके बारे में आसानी से लोग नहीं जानते। आतंक या अंडरवर्ल्ड ही नहीं गैंगस्टर्स की दुनिया भी अपनी धाक जमाने के लिए सोशल साइट को अपना अड्डा बना चुकी है। जबरन वसूली से लेकर अपनी खौफजदा जिंदगी को महिमामंडित करने के लिए सोशल साइट्स का जमकर इस्तेमाल किया जा रहा है।

लेकिन आईटी मंत्रालय के पास इनसे निपटने का कोई ठोस उपाय नहीं है ना ही आईटी एक्ट में कोई प्रावधान जिसके माध्यम से सोशल साइट्स संचालकों पर सख्ती की जा सके। उच्चपदस्थ सूत्रों की मानें तो आतंक की फंडिंग से लेकर अपराध की काली दुनिया की काली कमाई का जरिया अब हवाला से भेजा गया करेंसी नहीं बल्कि बिट्कॉयन जैसे क्रिप्टोकरेंसी हैं।

आतंकवादी से लेकर स्थानीय अपराधियों तक के लिए सोशल साइट्स एक मजबूत हथियार बन गए हैं। दिल्ली पुलिस, सीआईएसएफ औऱ नारकोटिक्स जैसे विभाग में उच्च पदों पर रह चुके वरिष्ठ आईपीएस अफसर ताज हसन के मुताबिक सोशल मीडिया की मानिटरिंग एजेंसियों के लिए बहुत बड़ी चुनौती बनी हुई है क्योंकि असामाजिक तत्व इस सशक्त मीडिया का इस्तेमाल अपनी असामाजिक गतिविधियों को फैलाने में कर रहे हैं। ताज हसन के मुताबिक सोशल साइट्स ऐसे लोगों को संचार का सशक्त माध्यम उपलब्ध कराते हैं जबकि कानूनी एजेंसियों के लिए इन्हें पकड़ना लगभग नामुमकिन सा है। ताज हसन ठीक ही कहते हैं देश की राजधानी दिल्ली को ही ले लीजिए दिल्ली एनसीआर का एक बड़ा बदमाश नीरज बवाना जिसका नाम आप सब लोग भी सुने होंगे उसका फेसबुक पेज लगातार अपडेट होता है और अब जरा उसके फेसबुक वॉल की एक पोस्ट को सुनिए –किसी ने उसके वॉल पर लिखा अगर आप अपने गैंग में शामिल कर लेते हैं तो मैं अपने भाई का बदला ले सकूंगा उसे जवाब मिलता है अपना नंबर दो। कानूनी तफ्तीश का मुद्दा होने की वजह से इसके आगे की बात तो आपको नहीं बता सकता लेकिन इतना संकेत काफी है कि युवकों को अपने गैंग में शामिल करने के लिए इसका इस्तेमाल किया जा रहा है। अब जरा फेसबुक पर नीरज वबाना गैंग लिख कर देखिएगा ऐसे ऐसे पोस्ट और वीडियो अपको मिलेंगे कि लगेगा कि मीडिया से लेकर हर आदमी ऐसे गैंगस्टर्स की तारीफों के पुल बांध रहा है। दिल्ली का दाउद जैसे वीडियो पोस्ट कर अपने सरगना को महिमामंडित किया जाता है वीडियो कुछ ऐसे बनाया जाता है जैसे पूरी फिल्मी हो यानि गाने और म्यूजिक के साथ ताकि बॉस वास्तविक डॉन लगे। नीरज बवाना के नाम पर बने फेसबुक पेज को तीन हजार से ज्यादा लाइक्स मिले हैं।

पांच साल पहले दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल के हाथों मुठभेड़ में मारे गए कुख्यात बदमाश नीतू दाबोदिया के फेसबुक पेज पर उसके साथी उसकी याद में धड़ल्ले से पोस्ट करते हैं। शनिवार यानि 9 जून को दिल्ली के एनकाउंटर में मारे गए कुख्यात राजेश भारती गैंग के लोग भी सोशल साइट्स का जमकर इस्तेमाल कर रहे थे। यू टयूब पर इनकी कई क्लिप होने की जानकी मिली है मजे की बात ये कि इनके पोस्ट को बड़ी संख्या में लाइक्स भी मिलते हैं और गैंग में काम करने के इच्छुक नौजवान भी। धमकी देने के लिए ये गैंगस्टर्स व्हाट्स एप्प पर आडियो वीडियो क्लिप भेजते हैं। अभी हाल ही में देश भर में विधायकों औऱ दिल्ली के कई कारोबारियों को व्हाट्स एप्प पर ही धमकी मिली लेकिन उसे पकड़ने के लिए जब एजेंसियों ने उसी व्हाट्सएप्प पर मैसेज भेजा तो पढ़ा नहीं गया जाहिर है इस तरह के डिजिटल माध्यम का इस्तेमाल करने वाले बखूबी जानते हैं कि कब क्या करना है। दिल्ली पुलिस इंटेलीजेंस विभाग के स्पेशल सीपी प्रवीर रंजन भी मानते हैं कि ज्यादा रीच, निशुल्कता औऱ प्रभावशाली होने की वजह से गैंगस्टर्स सोशल साइट्स की तरफ आकर्षित हो रहे हैं।

दिल्ली की बात की जाए तो नीरज बवाना सबसे आगे है पहले ही तय प्लान के मुताबिक गाने बाजे के साथ वीडियो शूट करके उसके फेसबुक पर लगातार पोस्ट किया जाता है। डॉन नंबर 1, लॉयन आफ नजफगढ़, असली डॉन औऱ ना जाने कितने नाम से चलने वाले आतंक से लेकर अपराध जगत के ये खाते दुनिया भर के एप्प पर धड़ल्ले से चल रहे हैं मगर इस मुद्दे पर अभी समाज औऱ सरकार दोनों सजग, सतर्क औऱ ठोस कदम उठाने से चूक रहे हैं जो आने वाले खतरनाक भविष्य का संकेत हो सकता है।

 

 

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