सावधान! कहीं आपके चेहरे से भी तो नहीं जुड़े हैं अनगिनत सिम

बालाघाट पुलिस ने 'ऑपरेशन FACE' के तहत एक बड़े फर्जी सिम गिरोह का पर्दाफाश किया है। C-DOT तकनीक की मदद से खुलासा हुआ कि मात्र 5 चेहरों का इस्तेमाल कर 450 सिम सक्रिय किए गए थे।
फर्जी सिम रैकेट

मध्य प्रदेश की बालाघाट पुलिस की कार्रवाई की पूरी जानकारी आपको भी जानना जरूरी है। ऐसा इसलिए क्योंकि हो सकता है जाने अंजाने में आप किसी ऐसे क्राइम का हिस्सा बन चुके हों जो आपने कभी किया ही नहीं। एसपी आदित्य मिश्रा के नेतृत्व में की गई ऑपरेशन फेस की कार्रवाई ने एक बड़े स्कैम का पर्दाफाश किया है।

फर्जी सिम कार्ड रैकेट और फेस का कनेक्शन

बालाघाट पुलिस ने ऑपरेशन FACE’ (Facial Authentication and Compliance Enforcement) के तहत फर्जी सिम कार्ड रैकेट के एक बड़े सिंडिकेट को ध्वस्त किया है। यह मामला तकनीक-संचालित पुलिसिंग का एक ऐतिहासिक उदाहरण बनकर उभरा है।

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पांच चेहरे और 450 सिम, क्या है फर्जी सिम कार्ड रैकेट ?

बालाघाट पुलिस की जांच में सामने आया कि जालसाजों ने केवल 5 चेहरों की पहचान का उपयोग करके 450 फर्जी सिम कार्ड जारी कर लिए थे। यह दूरसंचार विभाग (DoT) के केवाईसी मानदंडों का व्यवस्थित उल्लंघन है। पुलिस के अनुसार, इन सिमों के तार कई जिलों और राज्यों से जुड़े हैं।

पुलिस के मुताबिक मंडला, डिंडोरी, भोपाल और उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों से जुड़े फर्जी सिम कार्ड रैकेट के मामले में कोतवाली थाने में 3 एफआईआर दर्ज किए गए हैं। इस व्यापक नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए एक विशेष जांच दल का भी गठन किया गया है।

C-DOT की भूमिका

पुलिस के मुताबिक इस मामले को सामने लाने में C-DOT (Centre for Development of Telematics) का फेशial ऑथेंटिकेशन टूल ‘अस्त्र’ (ASTR) निर्णायक साबित हुआ। यह टूल भेष बदलने से रोकने के लिए आधार-लिंक्ड तस्वीरों से लाइव मिलान करता है और एक ही चेहरे पर जारी कई सिमों की पहचान करता है।

मान लें पुलिस की सलाह

बालाघाट पुलिस ने नागरिकों से पुरजोर अपील की है:

  1. अजनबियों को अपने व्यक्तिगत दस्तावेज न सौंपें।
  2. सिम कार्ड जारी करवाते समय स्वयं उपस्थित रहें।
  3. सुनिश्चित करें कि बायोमेट्रिक और फेशियल ऑथेंटिकेशन प्रक्रिया सही तरीके से पूरी हुई है।

उपलब्धियाँ – DoT का AI-आधारित ASTR:

  • 88 लाख+ संदिग्ध सिम कार्ड अब तक डिस्कनेक्ट किए गए।
  • 74,000 पॉइंट ऑफ सेल (PoS) एजेंटों को ब्लैकलिस्ट किया गया।
  • देशभर में 400 से अधिक FIR दर्ज की गईं।

यह कार्रवाई न केवल साइबर अपराधों पर रोक लगाएगी, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा को भी मजबूती प्रदान करेगी। SIT की जांच में आने वाले दिनों में और भी बड़े खुलासे होने की उम्मीद है।

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inspector raman kumar
इंस्पेक्टर रमण कुमार सिंह,दिल्ली पुलिस में बतौर इंस्पेक्टर तैनात है । वे दिल्ली के कई पुलिस थानों के साथ साथ साइबर पुलिस स्टेशन के थानाध्यक्ष रहे है । वे साइबर जागरूकता के लिए साइबर सेफ व्हाट्सएप्प ग्रुप और बी द पुलिस नाम से फेसबुक पेज और फेसबुक ग्रुप के संचालक है ।

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22-07-2026