लोगों की जिंदगी बदल रही है नोएडा की पुलिस की ये दो कोशिशें

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आलोक वर्मा

क्या आप मानेंगे कि पुलिस (Police) लोगों की जिंदगी भी बदल सकती है! नोएडा पुलिस(Gautam budhnagar police) के दो कामों के बारे में बताऊंगा तो आप मान जाएंगे कि पुलिस भी लोगों की जिंदगी(Life) बदल सकती नहीं बल्कि बदल रही है। वैसे तो हर राज्य औऱ शहर की पुलिस लोगों की जिंदगी बदलने का प्रयास करती रहती है मगर नोएडा पुलिस के दो सकारात्मक प्रयास लोगों की जिंदगी बदलने में कामयाब रहे हैं।

सोलर चरखे ने बदल दी जिंदगी

ट्रेनिंग ले रही महिलाओं के बीच आकांक्षा सिंह

गौतमबुद्ध नगर यानि नोएडा के पुलिस लाइंस में लगा सोलर चरखा 25 महिलाओं की जिंदगी में खुशियों की दीप जला रहा है। पुलिस लाइंस की 25 महिलाओं को उनकी पहली सैलरी मिल चुकी है। इन 25 महिलाओं की जिंदगी में खुशियों का चिराग जलाने का श्रेय नोएडा के पुलिस कमिश्नर आलोक सिंह (Alok singh) की पत्नी आकांक्षा सिंह को जाता है। कोरोना काल में आकांक्षा सिंह ने पुलिस लाइंस की पुलिस परिवार की महिलाओं को आत्म निर्भर बनाने के अभियान की शुरूआत की थी। उत्तर प्रदेश सरकार की एक जिला एक उत्पाद योजना में नोएडा को रेडीमेड कपड़ो के लिए जाना जाता है। इसलिए आकांक्षा सिंह ने पुलिस लाइंस की महिलाओं को इसी फिल्ड में रोजगार दिलाने की योजना बनाई। खादी पर फोकस करने का फैसला हुआ और इसके लिए सोलर चरखा लगाए जाने की बात हुई। सरकारी योजना के तहत 11 लाख का सोलर चरखा लगाने की मंजूरी मिल गई।

सोलर चरखा लगा तो ट्रेनिंग (Training) शुरू हुई। इसके लिए पहले फेज में पुलिस परिवार की 25 महिलाओं का चयन हुआ। इन्हें ट्रेनिंग दी गई। ट्रेनिंग के बाद करीब 20 दिन में महिलाओं को 70 हजार रु की आय हुई है। अभी इस सेंटर में सिर्फ धागा बन रहा है दूसरे चरण में कपड़ा बुनाई के लिए लूम लगाने की योजना भी है तीसरे चरण में कपड़ो की सिलाई भी होगी। मार्केटिंग में खादी ग्रामोद्योग की मदद भी मिल रही है। जिला खादी ग्रामोद्योग के गाजियाबाद अधिकारी संजय कुमार की मदद भी इस अभियान को मिली है।

पुलिस क्लीनिक (clinic) से इस तरह बदल रही है आम लोगों की जिंदगी

अत्याधुनिक जरूरतें और वातावरण दांपत्य जीवन में किस तरह जहर घोल रहा है यह बात किसी से छिपी नहीं। रिश्तो में बस रहे रोगों के इलाज के लिए नोएडा पुलिस ने विशेष तरह का क्लिनिक खोला है। इस क्लीनिक में डॉक्टर पुलिसवाले ही हैं औऱ मरीज वो पति पत्नी हैं जो एक दूसरे से इतने तंग आ चुके होते हैं कि साथ रहना भी नहीं चाहते। मगर पुलिस के इस विशेष तरह के क्लिनिक में आने के बाद 1 जनवरी से अब तक 362 मामलों में समझौता हो चुका है। पुलिस के इस नायाब क्लीनिक में कुल 631 प्रार्थना पत्र आए थे जिसमें से 100 में मुकदमा दर्ज हुआ। 169 अभी लंबित हैं। इस फैमिली डिस्प्यूट रिजॉल्यूशन क्लीनिक (Family Dispute Resolution Clinic)  से सैकड़ो दंपत्तियों की जिंदगी बदल रही है।

नोएडा के पुलिस आयुक्त (Police commissioner) आलोक सिंह के मुताबिक यह क्लीनिक महिला सुरक्षा की डीसीपी वृंदा शुक्ला और शारदा यूनिवर्सिटी (sharda university) तालमेल से शुरू हुई थी। लोगों की जिंदगी बदलने वाले इस पुलिस क्लीनिक का संचालन कोरोना की पहली लहर के बाद शुरू किया गया था।

इस सेंटर पर घरेलू हिंसा,  परिवारिक विवाद,  लिव इन रिलेशनशिप के विवाद को सुलझाया जाता है। शारदा यूनिवर्सिटी के मनोविज्ञान विशेषज्ञ और पुलिस का पैनल दंपति के विवाद में मध्यस्थता करते हैं।



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