पार्सल स्कैम क्या है? सोशल मीडिया दोस्ती से कस्टम अधिकारी तक, ऐसे होती है ऑनलाइन ठगी

विदेश से गिफ्ट और पार्सल के नाम पर होने वाली ठगी को समझें। जानिए सोशल मीडिया दोस्ती, फर्जी कस्टम अधिकारी और ऑनलाइन फ्रॉड का पूरा तरीका और इससे बचने के उपाय।
पार्सल स्कैम और ऑनलाइन ठगी के मामले में गिरफ्तार आरोपी

विदेश से किसी अनजान व्यक्ति ने सोशल मीडिया पर दोस्ती की। फिर महंगे गिफ्ट, डॉलर या पाउंड भेजने का भरोसा दिया। कुछ दिन बाद फोन आया कि आपका पार्सल एयरपोर्ट पर कस्टम विभाग ने रोक लिया है। अब उसे छुड़ाने के लिए कस्टम ड्यूटी, टैक्स या दूसरे शुल्क जमा करने होंगे। अगर ऐसी स्थिति आपके सामने आती है तो तुरंत सावधान हो जाइए। यह पार्सल स्कैम हो सकता है।

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उत्तर प्रदेश में सामने आया ₹68 लाख की साइबर ठगी का एक मामला बताता है कि ठग किस तरह सोशल मीडिया पर एक काल्पनिक पहचान बनाकर पहले भरोसा कायम करते हैं और फिर उसी भरोसे को पैसे ऐंठने के हथियार में बदल देते हैं। उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स ने 37 वर्षीय नाइजीरियाई नागरिक न्वोगु ओबेद ओसिनाची को दिल्ली के बुराड़ी के कमल विहार इलाके से गिरफ्तार किया है। STF के अनुसार वह लखनऊ के एक युवक से हुई करीब ₹68 लाख की ठगी के मामले में वांछित था।

पार्सल स्कैम क्या होता है?

पार्सल स्कैम ऑनलाइन ठगी का ऐसा तरीका है जिसमें पीड़ित को किसी विदेश से आने वाले पार्सल, गिफ्ट, विदेशी मुद्रा या महंगे सामान की कहानी सुनाई जाती है। इसके बाद ठग खुद को कस्टम अधिकारी, आयकर अधिकारी, एयरपोर्ट कर्मचारी या किसी दूसरी सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताकर भुगतान की मांग करता है।

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इस तरह की ठगी में शुरुआत सीधे पैसे मांगने से नहीं होती। पहले पीड़ित का भरोसा हासिल किया जाता है। सोशल मीडिया पर दोस्ती, विदेश में रहने का दावा, गिफ्ट भेजने का वादा और लगातार बातचीत इसी योजना का हिस्सा हो सकते हैं।

यही वजह है कि पार्सल स्कैम को सिर्फ फर्जी कस्टम कॉल वाली ठगी समझना सही नहीं होगा। कई मामलों में इसकी शुरुआत रोमांस स्कैम या सोशल मीडिया फ्रॉड से होती है।

₹68 लाख की ठगी में कैसे बुना गया पूरा जाल?

लखनऊ के एक युवक की फेसबुक पर “डोरिस विलियम” नाम की प्रोफाइल से दोस्ती हुई। प्रोफाइल से खुद को इंग्लैंड से जुड़ा बताया गया था। बातचीत आगे बढ़ी तो महंगे गिफ्ट, डॉलर और पाउंड भेजने का भरोसा दिया गया।

इसके बाद युवक को बताया गया कि विदेश से भेजा गया सामान और विदेशी मुद्रा एयरपोर्ट पर रोक ली गई है। यहीं से ठगी का अगला चरण शुरू हुआ।

आरोप है कि ठगों ने अलग-अलग मौकों पर कस्टम, आयकर और GST अधिकारियों का रूप धारण किया और पार्सल छुड़ाने के नाम पर रकम जमा करने को कहा। भरोसा कायम रखने के लिए कथित तौर पर रॉयल बैंक ऑफ स्कॉटलैंड से जुड़ा एक फर्जी प्रमाणपत्र भी भेजा गया। STF के अनुसार पीड़ित ने अलग-अलग भुगतानों में करीब ₹68 लाख गंवा दिए।

यह मामला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें ठगी की पूरी कहानी एक साथ दिखाई देती है। पहले नकली पहचान, फिर दोस्ती, उसके बाद गिफ्ट का लालच और आखिर में सरकारी अधिकारी बनकर पैसे की मांग।

पार्सल स्कैम में ठग कौन से तरीके अपनाते हैं?

ऐसे मामलों में ठग अक्सर एक ही व्यक्ति की पहचान का इस्तेमाल नहीं करते। पहले सोशल मीडिया पर कोई विदेशी नागरिक बनकर संपर्क किया जाता है। जब पीड़ित भरोसा करने लगता है तो कहानी में दूसरा किरदार आ जाता है।

कभी फोन करने वाला खुद को कस्टम अधिकारी बताता है तो कभी आयकर या GST विभाग से जुड़ा अधिकारी। पीड़ित को बताया जाता है कि पार्सल में विदेशी मुद्रा, महंगे गिफ्ट या दूसरी मूल्यवान वस्तुएं हैं और उसे छुड़ाने के लिए भुगतान करना होगा।

ठगी को असली दिखाने के लिए फर्जी प्रमाणपत्र, रसीद, पहचान पत्र या बैंक दस्तावेज भेजे जा सकते हैं। कुछ मामलों में पीड़ित को लगातार अलग-अलग शुल्क के नाम पर पैसे भेजने के लिए दबाव बनाया जाता है।

इस मामले में STF ने 11 मोबाइल फोन, एक लैपटॉप, पासपोर्ट, चार ATM कार्ड और 34 स्क्रीनशॉट जब्त किए। जांच एजेंसी के मुताबिक स्क्रीनशॉट में विदेशी महिलाओं की तस्वीरें और वीडियो भी मिले, जिनका इस्तेमाल कथित तौर पर फर्जी सोशल मीडिया प्रोफाइल बनाने में किया जाता था। इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की फॉरेंसिक जांच जारी है।

सोशल मीडिया पर ऑनलाइन दोस्ती कब बन जाती है साइबर ठगी?

ऑनलाइन दोस्ती अपने आप में खतरा नहीं है, लेकिन कुछ संकेत ऐसे हैं जिन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

अगर कोई अनजान व्यक्ति बहुत कम समय में भावनात्मक रूप से करीब आने लगे, विदेश से महंगे गिफ्ट भेजने की बात करे या बिना किसी व्यक्तिगत मुलाकात के पैसे और सामान से जुड़ी कहानी सुनाए तो सतर्क रहना चाहिए।

खास तौर पर तब जब गिफ्ट मिलने से पहले या बाद में कस्टम शुल्क, टैक्स, डिलीवरी चार्ज, क्लियरेंस फीस या किसी तरह के जुर्माने के नाम पर भुगतान मांगा जाए।

याद रखें, गिफ्ट पाने के लालच में किसी अनजान व्यक्ति को पैसे भेजना जोखिम भरा है।

फर्जी कस्टम अधिकारी की कॉल आए तो क्या करें?

कस्टम या किसी सरकारी विभाग के नाम पर फोन आने पर कॉल करने वाले की बात को अंतिम सत्य न मानें। फोन पर दिए गए नंबर, लिंक या बैंक खाते के आधार पर भुगतान न करें।

कॉलर अगर कहता है कि पार्सल तुरंत नहीं छुड़ाया गया तो जुर्माना लगेगा, पुलिस कार्रवाई होगी या सामान जब्त हो जाएगा, तो घबराकर भुगतान करने के बजाय संबंधित सरकारी विभाग के आधिकारिक माध्यम से जानकारी की पुष्टि करें।

सरकारी अधिकारी की पहचान बताने वाला व्यक्ति भी यदि निजी बैंक खाते, UPI या किसी अनजान लिंक पर पैसे भेजने को कह रहा है तो इसे गंभीर चेतावनी मानें।

ऑनलाइन फ्रॉड से बचने के आसान तरीके

सोशल मीडिया पर किसी अनजान व्यक्ति की पहचान सिर्फ प्रोफाइल फोटो देखकर स्वीकार न करें। विदेशी नाम, आकर्षक तस्वीर और अच्छी नौकरी का दावा किसी पहचान का प्रमाण नहीं है।

विदेश से गिफ्ट, डॉलर या पाउंड मिलने की बात पर बिना स्वतंत्र सत्यापन भरोसा न करें। किसी भी पार्सल के लिए कस्टम या टैक्स के नाम पर भुगतान करने से पहले संबंधित विभाग से जानकारी लें।

OTP, ATM PIN, UPI PIN, इंटरनेट बैंकिंग पासवर्ड और कार्ड की संवेदनशील जानकारी किसी व्यक्ति से साझा न करें। ठग अक्सर इन जानकारियों के जरिए दूसरी वित्तीय धोखाधड़ी भी कर सकते हैं।

संदिग्ध मोबाइल नंबर, सोशल मीडिया अकाउंट, WhatsApp नंबर या वेबसाइट की जानकारी भी साइबर अपराध पोर्टल पर रिपोर्ट की जा सकती है। National Cyber Crime Reporting Portal पर संदिग्ध नंबर, ईमेल, सोशल मीडिया URL और अन्य पहचान से जुड़े विवरण रिपोर्ट करने की सुविधा उपलब्ध है।

साइबर ठगी हो जाए तो तुरंत क्या करें?

अगर आपने गलती से पैसे भेज दिए हैं तो ठग से बातचीत में समय बर्बाद न करें। तुरंत 1930 पर कॉल करें। भारत सरकार के National Cyber Crime Reporting Portal के अनुसार वित्तीय साइबर फ्रॉड की तत्काल रिपोर्टिंग के लिए 1930 हेल्पलाइन उपलब्ध है। ऑनलाइन भी शिकायत दर्ज की जा सकती है।

शिकायत करते समय बैंक या वॉलेट की जानकारी, ट्रांजैक्शन आईडी या UTR नंबर, भुगतान की तारीख, रकम और उपलब्ध स्क्रीनशॉट तैयार रखें। पोर्टल की शिकायत प्रक्रिया में इन जानकारियों को उपयोगी बताया गया है।

पार्सल स्कैम का सबसे बड़ा संकेत क्या है?

अनजान ऑनलाइन दोस्ती + महंगे गिफ्ट का वादा + विदेश से पार्सल + कस्टम या टैक्स के नाम पर अचानक पैसे की मांग, यह पूरा पैटर्न दिखाई दे तो भुगतान करने से पहले रुकना सबसे जरूरी है।

₹68 लाख की यह ठगी सिर्फ एक व्यक्ति के नुकसान की कहानी नहीं है। यह दिखाती है कि साइबर ठग किस तरह सोशल मीडिया पर एक पूरी नकली पहचान तैयार करके पीड़ित को भरोसे से डर और फिर डर से भुगतान तक ले जाते हैं। ऑनलाइन दुनिया में किसी अनजान व्यक्ति की कहानी कितनी भी विश्वसनीय क्यों न लगे, पैसा भेजने से पहले स्वतंत्र सत्यापन ही सबसे सुरक्षित कदम है।

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inspector raman kumar
इंस्पेक्टर रमण कुमार सिंह,दिल्ली पुलिस में बतौर इंस्पेक्टर तैनात है । वे दिल्ली के कई पुलिस थानों के साथ साथ साइबर पुलिस स्टेशन के थानाध्यक्ष रहे है । वे साइबर जागरूकता के लिए साइबर सेफ व्हाट्सएप्प ग्रुप और बी द पुलिस नाम से फेसबुक पेज और फेसबुक ग्रुप के संचालक है ।

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07-09-2026