sim box fraud का फैलता जाल आपको भी रहना है सावधान

sim card box fraud

sim box fraud को जानते हैं कि नहीं ? sim box fraud का जाल बहुत फैल गया है। sim box fraud कैसे होता है, इससे कैसे और क्यों सावधान रहना चाहिए यह आपको भी जानना जरुरी है। संक्षेप में इसे कह सकते हैं कि “हर स्पूफ कॉल के पीछे एक खामोश मशीन होती है—और एक स्थानीय सहयोगी भी।”

sim box fraud में क्या हो रहा है

साइबर अपराध सिंडिकेट्स भारत की टेलीकॉम प्रणाली में सेंध लगा रहे हैं, SIM बॉक्स नेटवर्क लगाकर। ये गुप्त डिवाइस विदेशी VoIP कॉल्स को स्थानीय मोबाइल कॉल्स में बदल देते हैं। इससे वे टेलीकॉम विभाग और सेवा प्रदाताओं द्वारा लगाए गए सुरक्षा गेटवे को बायपास कर लेते हैं, और देशभर में स्पूफ कॉल्स की बाढ़ ला देते हैं जो दिखने में पूरी तरह स्थानीय लगती हैं।
इस तरह करते हैं घोटाला (Modus Operandi):
इस घोटाले का पहला खुलासा दिल्ली पुलिस, आउटर नॉर्थ डिस्ट्रिक्ट साइबर पुलिस स्टेशन ने फरवरी 2025 में चार आरोपियों की गिरफ्तारी के साथ किया:
• SIM बॉक्स, जो अक्सर विदेशों से तस्करी करके लाए जाते हैं, गेटेड सोसाइटियों और किराए के फ्लैटों में लगाए जाते हैं।
• हर बॉक्स में सैकड़ों SIM कार्ड लगाए जा सकते हैं, जिनमें ब्लॉक या ब्लैकलिस्टेड SIMs भी शामिल हैं।
• कॉल्स कंबोडिया, लाओस, म्यांमार और वियतनाम के साइबर स्कैम सेंटर्स से शुरू होती हैं।
• इन कॉल्स का इस्तेमाल डिजिटल अरेस्ट, निवेश धोखाधड़ी और पहचान की चोरी जैसे स्कैम्स को अंजाम देने में किया जाता है।
स्थानीय भागीदारी:
• स्थानीय निवासियों को आसान कमीशन का लालच देकर SIM बॉक्स होस्ट या मैनेज करने के लिए फुसलाया जाता है।
• कुछ लोगों से बैंक खाते या ट्रस्ट खोलने को कहा जाता है ताकि स्कैम की कमाई को छुपाया जा सके।
• टेलीकॉम रिटेल स्टाफ को बड़ी संख्या में SIM कार्ड जारी करते हुए पकड़ा गया है, जिससे ये ऑपरेशन चल सके।
क्यों है यह खतरनाक?
• ये स्पूफ कॉल्स पता लगाने से बच जाती हैं, जिससे अधिकारियों को धोखाधड़ी का पता लगाना मुश्किल हो जाता है।
• पीड़ितों को लगता है कि वे किसी भारतीय सरकारी अधिकारी से बात कर रहे हैं।
• यह स्कैम राष्ट्रीय टेलीकॉम सुरक्षा को कमजोर करता है और सीमा पार वित्तीय अपराधों को बढ़ावा देता है।
जनता के लिए सलाह:
• कभी भी अज्ञात लोगों के लिए टेलीकॉम उपकरण होस्ट करने की सहमति न दें।
• यदि आप संपत्ति किराए पर दे रहे हैं, तो किरायेदारों और उनकी गतिविधियों की जांच करें।
• संदिग्ध टेलीकॉम सेटअप या असामान्य सिग्नल हस्तक्षेप की रिपोर्ट करें।
• गिरफ्तारी की धमकी या पैसे की मांग करने वाली कॉल्स को नजरअंदाज करें—वास्तविक कानून प्रवर्तन ऐसा नहीं करता।
रिपोर्ट करने के लिए:
http://🔗 cybercrime.gov.in पर जाएं या 1930 पर कॉल करें।

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inspector raman kumar
इंस्पेक्टर रमण कुमार सिंह,दिल्ली पुलिस में बतौर इंस्पेक्टर तैनात है । वे दिल्ली के कई पुलिस थानों के साथ साथ साइबर पुलिस स्टेशन के थानाध्यक्ष रहे है । वे साइबर जागरूकता के लिए साइबर सेफ व्हाट्सएप्प ग्रुप और बी द पुलिस नाम से फेसबुक पेज और फेसबुक ग्रुप के संचालक है ।

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12-10-2026