पलाश ब्रांड के जरिए पहचान बना रहे हैं झारखंड के उत्पाद

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पलाश ब्रांड के जरिए झारखंड के उत्पाद एक नई पहचान बना रहे हैं। इंडिया इंटरनेशनल ट्रेड फेयर में झारखण्ड की सखी मंडलों का पलाश ब्राण्ड के उत्पाद लोगों को काफी पसंद आ रहें हैं। विश्व स्तरीय उत्पादों के बीच भी राज्य की महिलाओं द्वारा निर्मित उत्पाद लोगों की पहली पसंद है। मुख्यमंत्री  हेमन्त सोरेन की पहल पर सखी मंडल के उत्पादों को पलाश ब्राण्ड के जरिए एक नई पहचान और पारंपरिक आदिवासी आभूषण को आदिवा ब्राण्ड के तहत बाजार से जोड़ा गया है। मुख्यमंत्री की यह पहल अपने लक्ष्य को हासिल करने में सफल होता दिख रहा है।
ग्रामीण महिलाओं के उत्पादों को एक मंच देने के लिए नई दिल्ली के प्रगति मैदान में IITF अंतर्गत सरस आजीविका मेला का आयोजन किया गया है। 14 से 27 नवंबर 2021 तक चलने वाले इस मेले का उद्देश्य है, देश भर की सखी मंडल की महिलाओं द्वारा निर्मित उत्पादों को राष्ट्रीय पटल पर लाया जा सके, और साथ ही लोगों को हर एक राज्य की परंपरा और संस्कृति की झलक एक ही स्थान में मिल सके।

पलाश के प्राकृतिक उत्पादों की आईआईटीएफ मेले में धूम

सरस आजीविका मेले में झारखण्ड के सखी मंडल की महिलाओं ने भी अपने उत्पादों के साथ हिस्सा लिया है। ग्रामीण महिलाएं  ‘पलाश ’ अंतर्गत 50 से ज्यादा उत्पादों की बिक्री कर रहीं हैं। दिल्ली जैसे मेट्रो सिटी में सखी मंडल की महिलाओं द्वारा निर्मित शुद्ध उत्पादों की काफी डिमांड देखी जा रही है, चाहे वो झारखण्ड के घने जंगलों से निकाला शहद हो, लेमन ग्रैस तेल हो या अरहर की दाल। पलाश मार्ट में 8 प्रकार के आचार जैसे आम, आवला , नींबू, मिर्च, कटहल, लशुन इत्यादि के आचार उपलब्ध है। अन्य खाद्य उत्पादों में मड़ुआ का आटा, ब्राउन राइस, हल्दी एवं मिर्ची पाउडर, सरसों का तेल, काले गेहूं का आटा, लोबिया, तुलसी एवं नीम के शहद आदि उपलब्ध है।

पारंपरिक आभूषण लोगों के आकर्षण का केंद्र

झारखण्ड की ग्रामीण महिलाओं द्वारा बनाए गए पारंपरिक ज्वेलरी को एक पहचान देने के लिए मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में आदिवा ब्रांड की शुरुआत की गई है। आदिवा ब्रांड को राष्ट्रीय पटल पर ले जाने के लिए ग्रामीण विकास विभाग हर संभव कोशिश कर रहा है, इसी कड़ी में आदिवा ज्वेलरी का प्रदर्शनी सह बिक्री स्टॉल सरस आजीविका मेले में लगाया गया है। आदिवा के गहनों की चमक मेले में आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। चाँदी सहित अन्य धातुओं से बने आभूषण दिल्ली के लोगों को काफी भा रहें हैं। झारखण्ड के पारंपरिक ज्वेलरी आज देश की राजधानी मे आदिवा ब्रांड के तले अपनी पहचान बनाने में सफल हो रहा है। लोगों को पारंपरिक आभूषणों मे चाँदी के मंढली, झोंपा सीकरी,पछुवा, कंगना, डबल झुमका एवं मेटल से बने अन्य आभूषण काफी पसंद आ रहे है। विगत 4 दिन के मेले में आदिवा ने 2.50 लाख रुपये से ज्यादा के ज्वेलरी की बिक्री की हुई है।

पत्रकार दीदी कर रही है ‘सरस आजीविका मेले’ की रेपोर्टिंग

ग्रामीण विकास मंत्रालय के विशेष आमंत्रण में झारखण्ड की सखी मंडल की 3 दीदियां  संवाददाता सखी के रुप में (पत्रकार दीदी) सरस आजीविका मेले की पूरी रिपोर्टिंग करने मे जुटी है। ये महिलाएं किसी पत्रकारिता संस्थान से नहीं है बल्कि सुदूर गाँव की महिलाएं हैं, जिन्हें झारखण्ड स्टेट लाइव्लीहुड प्रमोशन सोसाइटी द्वारा प्रशिक्षित किया गया है। खूंटी,पलामू और धनबाद की सावित्री , प्रीती एवं मिनाक्षी  नाम की सखी मंडल की बहनें  ग्रामीण विकास मंत्रालय के मीडिया विभाग के साथ मिलकर पूरे मेले की रेपोर्टिंग कर रही है।  झारखण्ड की ये बेटियां राष्ट्रीय स्तर पर राज्य का नाम रौशन कर रही है।
“सखी मंडल की बहनों को उद्यमिता से जोड़ने के लिए जेएसएलपीएस लगातार कार्य कर रहा है। माननीय मुख्यमंत्री के निदेश पर आदिवासी पारंपरिक ज्वैलरी का ब्राण्ड आदिवा लॉन्च किया गया। आईआईटीएफ में पलाश एवं आदिवा के उत्पादों की काफी अच्छी बिक्री हो रही है। हमारी यह कोशिश है कि ज्यादा से ज्यादा ग्रामीण महिलाओं को सफल उद्यमी के रुप में तैयार करें ताकि वे राष्ट्रीय स्तर पर पहचान स्थापित कर सकें। “

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