कंबोडिया साइबर गुलामी जाल से सबक: फर्जी विदेशी नौकरी के लालच को समझें और सुरक्षित रहें

फर्जी विदेशी नौकरी के नाम पर युवाओं को साइबर गुलामी में फंसाने के मामले बढ़ रहे हैं। जानें इसके संकेत और बचाव के तरीके।
फर्जी विदेशी नौकरी के जाल में फंसे युवक का प्रतीकात्मक चित्र

विदेश में बेहतर नौकरी और ऊंची सैलरी का सपना आज भी लाखों युवाओं को आकर्षित करता है। इसी का फायदा उठाकर कुछ संगठित गिरोह फर्जी नौकरी के नाम पर लोगों को जाल में फंसा रहे हैं। हाल के एक मामले ने यह साफ कर दिया है कि फर्जी विदेशी नौकरी साइबर स्कैम अब सिर्फ पैसे ठगने तक सीमित नहीं रही, बल्कि लोगों को साइबर अपराध में जबरन धकेलने तक पहुंच चुकी है।

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फर्जी विदेशी नौकरी साइबर स्कैम का नया मामला क्या है

तमिलनाडु के मदुरै निवासी मधन वडिवेल की गिरफ्तारी ने ऐसे ही एक नेटवर्क की हकीकत सामने रखी। आरोप है कि वह कंबोडिया स्थित साइबर स्कैम कम्पाउंड्स के लिए भारतीय युवाओं की भर्ती करता था। पीड़ितों को पहले आकर्षक नौकरी का भरोसा दिया जाता, फिर उनसे पैसे लेकर यात्रा कराई जाती और विदेश पहुंचते ही उन्हें ऐसी जगहों पर रखा जाता जहां उनसे ऑनलाइन ठगी कराई जाती थी।

यह घटना एक चेतावनी है कि बिना जांच के किसी भी विदेशी नौकरी के प्रस्ताव को स्वीकार करना कितना जोखिम भरा हो सकता है। सही जानकारी और सतर्कता ही ऐसे जाल से बचने का सबसे प्रभावी तरीका है।

एक घटना से समझें पूरा खतरा

तमिलनाडु पुलिस के साइबर क्राइम विंग ने मधन वडिवेल को गिरफ्तार किया, जो कथित रूप से ऐसे रैकेट का हिस्सा था जो युवाओं को कंबोडिया भेजता था।

तिरुपत्तूर जिले के एक पीड़ित की शिकायत के बाद जांच शुरू हुई। पीड़ित को नौकरी का झांसा देकर विदेश भेजा गया, जहां पहुंचने के बाद उसे साइबर धोखाधड़ी करने के लिए मजबूर किया गया। बाद में वह किसी तरह वहां से निकलकर भारतीय दूतावास की मदद से वापस लौट सका।

साइबर गुलामी का जाल कैसे फैलता है

उच्च वेतन और आसान काम का वादा करके युवाओं को प्रभावित किया जाता है। वीजा, टिकट और दस्तावेज तैयार कर यह दिखाया जाता है कि प्रक्रिया पूरी तरह वैध है। पहुंचने के बाद पीड़ितों को सीमित कर दिया जाता है और उन्हें साइबर अपराध में शामिल होने के लिए मजबूर किया जाता है।

नेटवर्क की सच्चाई

जांच में यह भी सामने आया कि ऐसे मामलों में कई स्तरों पर लोग जुड़े होते हैं।

  • भर्तीकर्ता जो भारत से युवाओं को जोड़ते हैं
  • ट्रैवल और इमिग्रेशन सहयोगी
  • विदेशी ऑपरेटर जो स्कैम सेंटर चलाते हैं

बताया गया कि आरोपी पिछले कुछ वर्षों में कई युवाओं को इस जाल में फंसा चुका था और हर भर्ती पर उसे कमीशन मिलता था।

साइबर सुरक्षा के जरूरी संकेत याद रखें

कोई भी भरोसेमंद नौकरी देने से पहले शुल्क नहीं मांगती। व्हाट्सएप, टेलीग्राम और अनजान प्लेटफॉर्म से आए जॉब ऑफर पर भरोसा न करें। भर्ती एजेंट की वैधता जांचने के लिए आप https://emigrate.gov.in/#/emigrate की मदद ले सकते हैं।

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inspector raman kumar
इंस्पेक्टर रमण कुमार सिंह,दिल्ली पुलिस में बतौर इंस्पेक्टर तैनात है । वे दिल्ली के कई पुलिस थानों के साथ साथ साइबर पुलिस स्टेशन के थानाध्यक्ष रहे है । वे साइबर जागरूकता के लिए साइबर सेफ व्हाट्सएप्प ग्रुप और बी द पुलिस नाम से फेसबुक पेज और फेसबुक ग्रुप के संचालक है ।

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12-08-2026