क्या आप जानते हैं चैत्र नवरात्रि  क्यों मनाई जाती है?

चैत्र नवरात्रि सारे देश में मनाई जा रही है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि चैत्र नवरात्रि का महत्व क्या है और इसे क्यों मनाया जाता है

गृहस्थ लोगों के लिए साल में दो बार नवरात्रि (Navratri) का पर्व आता है। पहला चैत्र के महीने में, इस नवरात्रि के साथ हिंदू नव वर्ष की भी शुरुआत होती है। इसे चैत्र नवरात्रि (Chaitra Navratri) कहा जाता है। दूसरी नवरात्रि आश्विन माह में आती ​है, जिसे शारदीय नवरात्रि के नाम से जाना जाता है। पौष और आषाढ़ के महीने में भी नवरात्रि का पर्व आता है, जिसे गुप्त नवरात्रि कहा जाता है, लेकिन उस नवरात्रि में तंत्र साधना की जाती है, गृहस्थ और पारिवारिक लोगों के लिए ​सिर्फ चैत्र और शारदीय नवरात्रि को ही उत्तम माना गया है। दोनों में ही मातारानी के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है।

चैत्र नवरात्रि मनाने का कारण

रम्भासुर का पुत्र था महिषासुर, जो अत्यंत शक्तिशाली था। उसने कठिन तप किया था। ब्रह्माजी ने प्रकट होकर कहा- ‘वत्स! एक मृत्यु को छोड़कर, सबकुछ मांगों। महिषासुर ने बहुत सोचा और फिर कहा- ‘ठीक है प्रभो। देवता, असुर और मानव किसी से मेरी मृत्यु न हो। किसी स्त्री के हाथ से मेरी मृत्यु निश्चित करने की कृपा करें।’ ब्रह्माजी ‘एवमस्तु’ कहकर अपने लोक चले गए। वर प्राप्त करने के बाद उसने तीनों लोकों पर अपना अधिकार जमा कर त्रिलोकाधिपति बन गया। सभी देवता उससे परेशान हो गए।

तब सभी देवताओं ने आदिशक्त जगनंबा (अंबा) का आह्‍वान किया और तब देवताओं की प्रार्थना सुनकर मातारानी ने चैत्र नवरात्रि के दिन अपने अंश से 9 रूपों को प्रकट किया। इन 9 रूपों को देवताओं ने अपने-अपने शस्त्र देकर महिषासुर को वध करने का निवेदन किया। शस्त्र धारण करके माता शक्ति संपन्न हो गई। कहते हैं कि नौ रूपों को प्रकट करने का क्रम चैत्र माह की शुक्ल प्रतिपदा से प्रारंभ होकर नवमी तक चला। इसीलिए इन 9 दिनों को चैत्र नवरात्रि के रूप में मनाया जाता है।

अष्टमी तिथि पर होगी महागौरी की आराधना

महागौरी को मां दुर्गा का आठवां स्वरूप माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार माता पार्वती ने भगवान शिव को पाने के लिए ही, महागौरी स्वरूप में जन्म लिया था। इस दौरान उन्हें वर्षो कठोर तप करना पड़ा था और वर्षों तक किये गए अपने कड़े तप के कारण, मां पार्वती का रंग काला पड़ था। जिसके पश्चात भगवान शिव माता पार्वती की श्रद्धा से प्रसन्न हुए और उन्होंने गंगा के पवित्र जल से उन्हें स्नान कराया, जिसके बाद देवी का रंग गोरा हो गया। उसी दिन से देवी पार्वती का ये स्वरूप महागौरी के नाम से विख्यात हुआ। मां दुर्गा का ये रूप बेहद शांत एवं निर्मल होता है, जिनका वाहन वृषभ है।

नवमी तिथि पर होगी मां सिद्धिदात्री की पूजा

जैसा नाम से ही ज्ञात होता है कि,मां सिद्धिदात्री का शाब्दिक अर्थ है सिद्धि देने वाली. देवी दुर्गा का ये नौवां स्वरूप है, जो बेहद सुंदर और मनमोहक होता है। अपने इस स्वरूप में मां लाल साड़ी पहने हुए है और सिंह की सवारी कर रही हैं।

disclaimer-उपरोक्त जानकारी विभिन्न माध्यमों से मिली जानकारी पर आधारित है। indiavistar.com सत्यता की पुष्टि नहीं करता।

Support India Vistar

Latest Posts

BREAKING NEWS
दिल्ली में 100 करोड़ का हेरोइन बरामद देखें वीडियो | दिल्ली में पकड़ा गया खलिस्तानी आतंकी | सपने में छिपकली दिख जाए तो क्या है इसका मतलब समझ लीजिए | Asian Games 2026: भारत की महिला कबड्डी टीम ने जीता Gold, CISF की ऋतु श्योराण ने फिर रचा इतिहास | फोन का Wi-Fi और Bluetooth कब बंद रखें? बाहर निकलते ही बदलें ये सेटिंग, वरना बढ़ सकता है प्राइवेसी का खतरा | CISF जवानों के तनाव और मानसिक स्वास्थ्य पर बड़ा कदम, IHBAS से 3 साल का समझौता | CRPF Women Battalion: 1986 में बनी पहली महिला बटालियन, 40 साल में ऐसे बदली महिलाओं की भूमिका | ऐप पर बढ़ता रहा मुनाफा, असली पैसा पहुंचा दुबई: जानिए Fake Trading App का नया जाल | एयरपोर्ट पर मदद के नाम पर ठगी: ₹11 हजार देने के बाद खुला राज, CISF को मिले तीन अलग नाम वाले पहचान पत्र | Tech Support Scam क्या है? कंप्यूटर पर Pop-Up दिखाकर कैसे होती है ठगी, IFSO केस से समझें पूरा तरीका | Property fraud: रिटायरमेंट के ₹1.75 करोड़ फंसे, जमीन खरीदने से पहले इन कागजात की जांच क्यों जरूरी, आप भी जान लें | RBI का नया प्रस्ताव: संदिग्ध बैंक ट्रांजैक्शन पर 60 दिन तक रोक, आपके खाते पर कब पड़ सकता है असर? |
26-09-2026