Digital Arrest Scam भारत में तेजी से फैलता हुआ एक खतरनाक साइबर अपराध बन चुका है। दिल्ली पुलिस की Intelligence Fusion & Strategic Operations (IFSO) यूनिट ने इसी तरह के एक हाई-प्रोफाइल मामले में ₹14.84 करोड़ की ठगी करने वाले अंतरराष्ट्रीय साइबर सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया है। इस केस में बुजुर्ग दंपति को फर्जी CBI और पुलिस अधिकारियों द्वारा WhatsApp वीडियो कॉल पर डराकर महीनों तक मानसिक कैद में रखा गया।
Digital Arrest Scam: केस की पूरी पृष्ठभूमि
IFSO के डीसीपी विनीत कुमार के मुताबिक 24 दिसंबर 2025 को 77 वर्षीय महिला को एक अज्ञात कॉल आया। कॉलर ने बताया कि उनके नाम से जारी सिम कार्ड मनी लॉन्ड्रिंग केस में इस्तेमाल हुआ है। इसके बाद उन्हें WhatsApp वीडियो कॉल पर जोड़ा गया, जहाँ फर्जी CBI और पुलिस अधिकारी दिखाई दिए।
ये हैं स्कैमर वीडियो देखें –
आरोपियों ने नकली गिरफ्तारी वारंट, फर्जी कोर्ट कार्यवाही और लगातार वीडियो निगरानी के जरिए दंपति को यह विश्वास दिलाया कि वे “डिजिटल अरेस्ट” में हैं। उन्हें किसी से संपर्क न करने और घर से बाहर न निकलने की सख्त चेतावनी दी गई।
₹14.84 करोड़ की ठगी कैसे की गई
डर और दबाव के चलते पीड़ितों को बताया गया कि उनकी पूरी जमा राशि एक “RBI mandated verification account” में डालनी होगी। Fixed Deposits और शेयर निवेश समेत कुल ₹14,84,26,954 की राशि आठ ट्रांजैक्शन में अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करवाई गई। आरोपियों ने झूठा भरोसा दिया कि जांच के बाद पैसा वापस मिल जाएगा।
डीसीपी विनीत कुमार ने इस मामले को सुलझाने के लिए एसीपी प्रेम चंद खंडूरी की निगरानी में एसआई राज किरण, अतुल यादव, रमेश चंद, हेडकांस्टेबल त्रिलोक, प्रमोद, बीरमपाल, वसंत, कांस्टेबल दीपक और कांस्टेबल ड्राइवर योगेन्द्र की टीम बनाई।
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विशेष टीम ने बैंक खातों, कॉल डेटा और डिजिटल फुटप्रिंट्स का गहन विश्लेषण किया।
एक के बाद एक Vadodara, Varanasi, Prayagraj, Lucknow और Bhubaneswar में छापेमारी कर कुल 8 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।
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आरोपी अंतरराष्ट्रीय साइबर सिंडिकेट के लिए mule bank accounts और फंड लेयरिंग का काम कर रहे थे।
ये हैं गिरफ्तार आरोपी
- Patel Divyang (30 वर्ष)
निवासी: वडोदरा, गुजरात
शिक्षा: B.Com, CA (Inter)
पेशा: Floresta Foundation नामक NGO संचालक और Tatva Business Advisors के माध्यम से वित्तीय सेवाएँ। - Shitole Krutik (26 वर्ष)
निवासी: वडोदरा, गुजरात
शिक्षा: न्यूज़ीलैंड से IT में डिप्लोमा। - Arun Kumar Tiwari (45 वर्ष)
निवासी: वाराणसी, उत्तर प्रदेश
शिक्षा: BA
पेशा: आयकर कार्यालय के बाहर निजी डेटा एंट्री ऑपरेटर, Shivas Charitable Foundation नामक NGO का संचालन। - Mahavir Sharma @ Neel
निवासी: अहमदाबाद, गुजरात
शिक्षा: B.Com। - Pradyamun Tiwari @ SP Tiwari (44 वर्ष)
निवासी: वाराणसी, उत्तर प्रदेश पेशा: घाटों पर निजी पूजा कराने वाला पुजारी। - Ankit Mishra @ Robin
निवासी: अहमदाबाद, गुजरात
शिक्षा: B.Com
अनुभव: SBI Cap Securities में Sales Executive के रूप में कार्य। - Bhupender Kumar Mishra @ Atul Mishra (37 वर्ष)
निवासी: लखनऊ, उत्तर प्रदेश
शिक्षा: MBA
पेशा: निजी नौकरी। - Aadesh Kumar Singh (36 वर्ष)
निवासी: लखनऊ, उत्तर प्रदेश
शिक्षा: BA (Hons)
पेशा: निजी ट्यूशन और कोचिंग संचालन।
Cambodia–Nepal से जुड़ा अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन
जांच में सामने आया कि गिरफ्तार आरोपी केवल mule account operators और facilitators थे। पूरे Digital Arrest Scam का संचालन Cambodia और Nepal से जुड़े एक अंतरराष्ट्रीय साइबर सिंडिकेट द्वारा किया जा रहा था, जो भारत में ऐसे खातों के जरिए रकम को लेयरिंग कर बाहर भेजता था।
Modus Operandi of Digital Arrest Scam
- खुद को CBI, पुलिस, कस्टम्स अधिकारी बताना
- FIR और गिरफ्तारी का डर दिखाना
- फिर “गलत पहचान” बताकर सहानुभूति दिखाना
- WhatsApp वीडियो कॉल पर 24×7 निगरानी
- RBI verification के नाम पर पूरी बचत ट्रांसफर करवाना
Frequently Asked Questions (FAQ)
Digital Arrest Scam क्या है?
यह एक साइबर फ्रॉड है जिसमें अपराधी खुद को CBI या पुलिस अधिकारी बताकर वीडियो कॉल पर डराते हैं और पैसे ट्रांसफर करवाते हैं।
क्या सच में डिजिटल अरेस्ट जैसी कोई कानूनी प्रक्रिया होती है?
नहीं। भारत में डिजिटल अरेस्ट जैसी कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं है।
क्या RBI कभी पैसे “verification account” में डालने को कहता है?
नहीं। RBI या कोई सरकारी एजेंसी इस तरह की मांग नहीं करती।
Digital Arrest Scam में सबसे ज्यादा निशाना कौन बनते हैं?
वरिष्ठ नागरिक, अकेले रहने वाले लोग और तकनीक से कम परिचित व्यक्ति।
ऐसे कॉल आने पर तुरंत क्या करना चाहिए?
कॉल काटें, किसी को पैसे न भेजें और 1930 साइबर हेल्पलाइन या नजदीकी पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज करें।










