Digital Arrest Scam: बैंक ने समय पर पैसा नहीं रोका तो लौटाने पड़ सकते हैं लाखों रुपये, जानिए RBI का नियम

Digital Arrest Scam में OTP से पैसा ट्रांसफर होने के बावजूद बैंक की जिम्मेदारी का सवाल खत्म नहीं होता। नागपुर Consumer Commission ने ICICI Bank को ₹5.18 लाख लौटाने का आदेश दिया। जानिए RBI Zero Liability Rule और बैंक की transaction monitoring जिम्मेदारी।
Digital Arrest Scam में बैंक की जिम्मेदारी और RBI Zero Liability Rule

डिजिटल अरेस्ट के नाम पर ठगी में अगर पीड़ित से बैंक खाते से पैसा ट्रांसफर करा लिया गया है, तो मामला हमेशा यह कहकर खत्म नहीं हो जाता कि ट्रांजैक्शन OTP से हुआ था। हाल ही में नागपुर की District Consumer Commission के एक मामले ने बैंक की जिम्मेदारी को लेकर महत्वपूर्ण सवाल खड़े किए हैं।

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आयोग ने Prachi Digambar Dhoke v. ICICI Bank मामले में ICICI Bank को ₹5,18,437 वापस करने का आदेश दिया। इसके साथ 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज, मानसिक परेशानी के लिए ₹25,000 और मुकदमे के खर्च के लिए ₹10,000 देने का निर्देश भी दिया गया।

यह फैसला उन लोगों के लिए महत्वपूर्ण है जो Digital Arrest Scam, साइबर ठगी या फर्जी पुलिस अधिकारी बनकर की गई ठगी में बड़ी रकम गंवा देते हैं और बैंक से शिकायत के बाद भी पैसा वापस नहीं मिल पाता।

Digital Arrest Scam में बैंक की जिम्मेदारी क्या है?

Digital Arrest Scam में ठग आमतौर पर पुलिस, CBI, ED, RBI या किसी अन्य सरकारी एजेंसी का अधिकारी बनकर व्यक्ति को डराते हैं। वीडियो कॉल पर पूछताछ, गिरफ्तारी की धमकी और खाते की जांच के नाम पर पीड़ित से पैसे ट्रांसफर करा लिए जाते हैं।

ऐसे मामलों में बैंक की जिम्मेदारी का सवाल दो स्तर पर सामने आता है। पहला, बैंक के पास ऐसे transactions को monitor करने और suspicious activity पहचानने की व्यवस्था होनी चाहिए। दूसरा, ग्राहक द्वारा fraud की सूचना दिए जाने के बाद बैंक को उपलब्ध regulatory procedures के तहत तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए।

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RBI की 2017 की customer protection framework के अनुसार, कुछ परिस्थितियों में अगर unauthorised electronic transaction की सूचना तीन working days के भीतर दी जाती है तो ग्राहक की liability zero हो सकती है। लेकिन यह नियम हर प्रकार की online fraud transaction पर स्वतः लागू नहीं होता। ग्राहक की negligence, transaction की प्रकृति और bank या third-party breach जैसे तथ्य महत्वपूर्ण होते हैं।

यही वजह है कि Digital Arrest Scam के मामलों में “OTP से transaction हुआ था, इसलिए बैंक जिम्मेदार नहीं है” कहना हर मामले का अंतिम जवाब नहीं माना जा सकता।

नागपुर Digital Arrest Scam Case में क्या हुआ?

Prachi Digambar Dhoke के मामले में उन्हें एक व्यक्ति ने FedEx customer service representative बनकर फोन किया। उसे बताया गया कि उनके नाम से भेजे गए एक parcel में आपत्तिजनक और संदिग्ध सामान मिला है।

इसके बाद उन्हें ऐसे लोगों से जोड़ा गया जिन्होंने खुद को Mumbai Police का अधिकारी बताया। आरोप है कि डर और दबाव बनाकर उनसे कथित जांच और processing charges के नाम पर चार transactions में कुल ₹6,93,437.50 ट्रांसफर करा लिए गए।

धोखे का पता चलने के बाद शिकायतकर्ता ने बैंक को तुरंत सूचना दी। National Cyber Crime Reporting Portal पर शिकायत की गई और FIR भी दर्ज कराई गई।

बैंक ने शुरुआत में रकम का shadow credit दिया, लेकिन बाद में OTP authentication का हवाला देते हुए उस रकम को reverse कर दिया। मामला अंततः Consumer Commission तक पहुंचा।

बैंक को ₹5.18 लाख क्यों लौटाने पड़े?

इस मामले में Consumer Commission ने सिर्फ यह नहीं देखा कि transaction OTP से authenticated था या नहीं। आयोग ने बैंक की ongoing due diligence और suspicious transaction monitoring की जिम्मेदारी पर भी ध्यान दिया।

आयोग के अनुसार जिस beneficiary account में पैसा गया, वह पहले काफी हद तक inactive था। इसके बावजूद उस खाते में सिर्फ दो दिनों में करीब ₹2.84 करोड़ के transactions हुए। आयोग ने माना कि ऐसी गतिविधि enhanced scrutiny का कारण बननी चाहिए थी।

आयोग ने यह भी कहा कि ICICI Bank यह साबित नहीं कर सका कि उसने RBI की KYC और transaction monitoring guidelines के अनुरूप जरूरी monitoring या preventive action किया था। शिकायतकर्ता द्वारा fraud की जानकारी दिए जाने के बाद transferred funds को तत्काल freeze करने के प्रयास के संबंध में भी आयोग ने बैंक को जिम्मेदार माना।

इसी आधार पर आयोग ने बैंक को deficiency in service, negligence और unfair trade practices के लिए जिम्मेदार माना।

आदेश के तहत ₹5,18,437 की रकम पर complaint दाखिल करने की तारीख से वास्तविक भुगतान तक 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देना होगा। इसके अलावा ₹25,000 mental agony और ₹10,000 litigation cost भी देने का आदेश दिया गया।

RBI Zero Liability Rule को समझना जरूरी है

RBI की customer protection व्यवस्था में unauthorised electronic banking transactions के लिए ग्राहक की liability परिस्थितियों के अनुसार तय होती है।

अगर मामला ऐसा है जिसमें bank की negligence, deficiency या contributory fraud है, तो customer की liability zero हो सकती है। वहीं third-party breach की स्थिति में, यदि ग्राहक transaction की जानकारी मिलने के तीन working days के भीतर बैंक को सूचना देता है, तो RBI framework के तहत zero liability का प्रावधान हो सकता है।

चार से सात working days के भीतर शिकायत करने पर liability सीमित हो सकती है। सात working days के बाद मामला bank की board-approved policy के अनुसार तय हो सकता है।

RBI framework में यह भी कहा गया है कि zero या limited liability वाले मामलों में bank को notification मिलने के बाद निर्धारित प्रक्रिया के तहत shadow reversal करना होता है। 2017 के framework में यह अवधि 10 working days तक बताई गई थी।

लेकिन एक जरूरी बात: Digital Arrest Scam में पीड़ित ने कई बार खुद OTP डालकर या payment authorise करके रकम भेजी होती है। इसलिए हर ऐसा transaction स्वतः “unauthorised transaction” नहीं बन जाता। ऐसे मामलों में bank की transaction monitoring, customer की शिकायत के बाद की कार्रवाई और परिस्थितियों के पूरे रिकॉर्ड की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।

Suspicious Bank Account पर भी नजर क्यों जरूरी है?

Cyber fraud में इस्तेमाल होने वाले mule accounts लंबे समय से regulatory agencies की चिंता का विषय रहे हैं। ऐसे bank accounts का इस्तेमाल ठगी की रकम प्राप्त करने और उसे दूसरे खातों में भेजने के लिए किया जा सकता है।

RBI ने banks को KYC और AML framework के तहत customer accounts की monitoring और transaction activity पर नजर रखने की आवश्यकता बताई है। RBI ने money mule accounts को लेकर भी banks को KYC, AML और transaction monitoring guidelines का पालन करने की सलाह दी है।

इसका मतलब यह है कि किसी खाते में अचानक उसके सामान्य व्यवहार से बिल्कुल अलग बहुत बड़ी रकम आने-जाने लगे, तो बैंक के monitoring systems को ऐसे व्यवहार की पहचान करने में सक्षम होना चाहिए।

नागपुर मामले में Consumer Commission ने इसी तरह के transaction pattern को महत्वपूर्ण माना।

Digital Arrest Scam में पैसा कटते ही क्या करें?

अगर आपको लगता है कि Digital Arrest Scam या किसी दूसरे cyber fraud में आपके खाते से पैसा चला गया है, तो समय बर्बाद न करें।

सबसे पहले बैंक को तुरंत सूचना दें। शिकायत करते समय transaction details, समय, रकम और beneficiary account की जानकारी दें। शिकायत का acknowledgement या complaint number जरूर सुरक्षित रखें।

इसके साथ ही National Cyber Crime Reporting Portal पर cyber fraud की शिकायत करें और पुलिस में शिकायत या FIR की प्रक्रिया पूरी करें।

बैंक को दी गई शिकायत में यह स्पष्ट लिखें कि transaction fraud के दबाव या धोखे के कारण हुआ और आपने घटना का पता चलते ही बैंक को सूचना दी है। यदि मामला RBI customer protection framework के दायरे में आता है, तो संबंधित provisions का उल्लेख भी किया जा सकता है।

अगर बैंक शिकायत का समाधान नहीं करता या रकम वापस करने से इनकार करता है, तो उपलब्ध banking grievance mechanism और उपयुक्त Consumer Commission जैसे कानूनी विकल्पों पर विचार किया जा सकता है।

क्या OTP से हुआ Transaction होने पर बैंक की जिम्मेदारी खत्म हो जाती है?

नहीं, हर मामले में ऐसा निष्कर्ष निकालना सही नहीं होगा।

OTP authentication यह दिखा सकता है कि payment authentication process पूरा हुआ था, लेकिन Consumer Commission के नागपुर मामले ने यह सवाल अलग रखा कि बैंक ने suspicious transaction monitoring और fraud report मिलने के बाद जरूरी कार्रवाई की या नहीं।

इस मामले में आयोग ने बैंक की जिम्मेदारी को सिर्फ OTP authentication के आधार पर खत्म नहीं माना और beneficiary account की असामान्य transaction activity तथा fraud report के बाद funds freeze करने में कथित विफलता को भी देखा।

यही इस फैसले का सबसे महत्वपूर्ण संदेश है।

Digital Arrest Scam से जुड़े मामलों में बैंक की जिम्मेदारी कैसे तय होगी?

स्थितिक्या महत्वपूर्ण हो सकता है
Fraud की तुरंत शिकायतशिकायत का समय और bank acknowledgement
Unauthorised electronic transactionRBI customer protection framework
खाते में असामान्य बड़ी रकमBank की transaction monitoring
Suspicious beneficiary accountKYC और AML compliance
Fraud की सूचना के बाद पैसा मौजूदFunds को रोकने या recover करने की bank action
OTP से payment हुआTransaction की पूरी परिस्थिति, सिर्फ OTP नहीं
Bank ने शिकायत ठुकराईGrievance redressal और उपलब्ध consumer/legal remedies

इस फैसले से आम बैंक ग्राहक को क्या सीख मिलती है?

Digital Arrest Scam में सबसे बड़ी गलती यह होती है कि पीड़ित ठगी का पता चलने के बाद बैंक को सूचना देने में देर कर देता है। Cyber fraud में समय बहुत महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि रकम कई bank accounts से होकर आगे भेजी जा सकती है।

इसलिए transaction के तुरंत बाद bank को report करना, cybercrime complaint दर्ज करना और सभी records सुरक्षित रखना बेहद जरूरी है।

RBI का Zero Liability framework महत्वपूर्ण सुरक्षा देता है, लेकिन उसकी applicability transaction की परिस्थितियों पर निर्भर करती है। वहीं नागपुर Consumer Commission का फैसला यह दिखाता है कि bank की regulatory और transaction-monitoring duties को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

Digital Arrest Scam में अगर बैंक को समय पर सूचना दी गई और उसके बाद भी suspicious transaction पर जरूरी कार्रवाई नहीं हुई, तो ग्राहक के पास अपने नुकसान की भरपाई मांगने के लिए regulatory और consumer law के तहत रास्ते हो सकते हैं।

ध्यान रखें: यह लेख सामान्य कानूनी और cyber safety जानकारी के लिए है। किसी व्यक्तिगत मामले में RBI rules, transaction की प्रकृति और उपलब्ध evidence के आधार पर परिणाम अलग हो सकता है।

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inspector raman kumar
इंस्पेक्टर रमण कुमार सिंह,दिल्ली पुलिस में बतौर इंस्पेक्टर तैनात है । वे दिल्ली के कई पुलिस थानों के साथ साथ साइबर पुलिस स्टेशन के थानाध्यक्ष रहे है । वे साइबर जागरूकता के लिए साइबर सेफ व्हाट्सएप्प ग्रुप और बी द पुलिस नाम से फेसबुक पेज और फेसबुक ग्रुप के संचालक है ।

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02-08-2026