CBSE के नए ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम (OSM) में गंभीर खामियाँ सामने आई हैं — कई छात्रों का आरोप है कि री-इवैल्यूएशन में उन्हें किसी और का उत्तर पुस्तिका मिली। CBSE ने एक मामले में गलती स्वीकार भी की है।
CBSE का नया OSM सिस्टम क्या है और विवाद कैसे शुरू हुआ?
2026 से CBSE ने Class 12 की कॉपियाँ जाँचने के लिए पहली बार On-Screen Marking (OSM) System लागू किया। इस डिजिटल सिस्टम में उत्तर पुस्तिकाओं को स्कैन करके ऑनलाइन जाँचा जाता है। CBSE का दावा था कि इससे गलतियाँ कम होंगी, पारदर्शिता बढ़ेगी और रिजल्ट जल्दी आएगा।
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लेकिन Class 12 का रिजल्ट आने के बाद से ही शिकायतें शुरू हो गईं — धुंधले स्कैन, पेमेंट गेटवे की खराबी, पोर्टल क्रैश और कम नंबर। और फिर आया वह मामला जिसने पूरे देश का ध्यान खींच लिया।
Vedant का मामला — “यह मेरी कॉपी नहीं है”
23 मई 2026 को Vedant Shrivastava (@VEDANTSHRIV17) नाम के एक छात्र ने X (Twitter) पर एक लंबा पोस्ट लिखा। उन्होंने बताया कि Physics में अप्रत्याशित रूप से कम नंबर आने के बाद उन्होंने री-इवैल्यूएशन के लिए आवेदन किया और फोटोकॉपी मँगाई।
जब कॉपी आई तो Vedant और उनके परिवार, दोनों को तुरंत समझ आ गया — यह उनकी लिखावट नहीं थी।
उन्होंने अपनी Physics कॉपी और English-Computer Science की कॉपियों की तुलना करते हुए स्क्रीनशॉट शेयर किए। फर्क साफ दिख रहा था। उनके शिक्षकों ने भी यही माना।
Vedant ने CBSE से माँग की:
- उनकी असली Physics उत्तर पुस्तिका की जाँच की जाए
- OSM टैगिंग और स्कैनिंग प्रक्रिया का ऑडिट हो
- उत्तर पुस्तिकाओं की अदला-बदली की संभावना की जाँच हो
सिर्फ Vedant नहीं — और भी छात्र सामने आए
Vedant का पोस्ट वायरल होते ही सोशल मीडिया पर बाढ़ आ गई। X, Reddit और YouTube पर हजारों छात्र अपनी शिकायतें लेकर आए।
Chemistry में भी हुई गड़बड़ी
एक अन्य छात्र ने लिखा कि उनकी Chemistry की स्कैन कॉपी में उनकी लिखावट नहीं थी। एक और छात्र का दावा था कि उनकी Chemistry उत्तर पुस्तिका के दो पूरे पन्ने बदल दिए गए थे।
तकनीकी समस्याएँ पहले से चल रही थीं
दरअसल OSM पोर्टल की समस्याएँ रिजल्ट के बाद से ही शुरू हो गई थीं:
– पोर्टल बार-बार क्रैश हो रहा था
– पेमेंट तो कट रही थी लेकिन कॉपी नहीं मिल रही थी
– स्कैन इतने धुंधले थे कि कुछ पढ़ा नहीं जा सकता था
– कुछ छात्रों को पेमेंट के बाद भी उनकी स्कैन कॉपी नहीं मिली
CBSE ने क्या किया? क्या गलती मानी?
CBSE ने Vedant के मामले में गलती स्वीकार की। सोशल मीडिया पर बवाल होने के बाद CBSE ने Vedant से सीधे संपर्क किया। बोर्ड के Joint Secretary (Coordination) ने एक ईमेल में लिखा — “Please find attached your correct answer book for Physics.”
यानी CBSE ने खुद माना कि पहले जो कॉपी दी गई वह गलत थी और सही कॉपी अलग थी। इसके बाद CBSE ने नंबर भी बदले। CBSE के सूत्रों के अनुसार बोर्ड ऐसी सभी शिकायतों को गंभीरता से ले रहा है। कुछ मामले सुलझाए जा चुके हैं जबकि कुछ अभी जाँच में हैं।
OSM सिस्टम में गड़बड़ी कैसे हो सकती है? समझें तकनीकी पहलू
OSM में हर उत्तर पुस्तिका को एक Roll Number Tag के साथ स्कैन किया जाता है। अगर स्कैनिंग के समय टैगिंग में गलती हो जाए तो एक छात्र की कॉपी दूसरे के नंबर से जुड़ जाती है।
शिक्षकों को प्रशिक्षण नहीं मिला
दिल्ली सरकार के शिक्षक संघ (GSTA) ने पहले ही चेतावनी दी थी कि अधिकांश शिक्षकों को OSM पर ठीक से ट्रेनिंग नहीं दी गई। फरवरी 2026 में ही GSTA ने CBSE से अनुरोध किया था कि इस सिस्टम को अभी रोका जाए।
पहली बार और पूरे देश में एक साथ
यह पहला साल था जब Class 12 की पूरी 46 लाख छात्रों की कॉपियाँ OSM से जाँची गईं। इतने बड़े स्तर पर पहली बार में खामियाँ आना स्वाभाविक था — लेकिन यह कीमत बच्चों के भविष्य से चुकाना सही नहीं।
अगर आपके साथ भी ऐसा हुआ है तो क्या करें?
अगर आपने भी CBSE री-इवैल्यूएशन में ऐसी कोई गड़बड़ी देखी है तो घबराएँ नहीं। यह कदम उठाएँ:
Step 1 — सबूत इकट्ठा करें
अपनी मिली हुई कॉपी और किसी दूसरे विषय की कॉपी की तुलना करें। अगर लिखावट अलग है तो स्क्रीनशॉट सुरक्षित रखें।
Step 2 — CBSE को लिखें
CBSE की आधिकारिक वेबसाइट https://www.cbse.gov.in/ पर जाकर शिकायत दर्ज करें। ईमेल: https://www.cbse.nic.in/ पर शिकायत भेजें।
Step 3 — सोशल मीडिया पर सार्वजनिक करें
Vedant के मामले में सोशल मीडिया ने काम किया। X पर #CBSEAnswerSheetMismatch हैशटैग के साथ अपना मामला शेयर करें।
Step 4 — RTI दाखिल करें
अगर CBSE जवाब न दे तो Right to Information (RTI) के तहत अपनी उत्तर पुस्तिका और उसकी जाँच से जुड़ी जानकारी माँगी जा सकती है।
Step 5 — स्कूल का सहयोग लें
अपने स्कूल प्रिंसिपल को मामले की जानकारी दें। स्कूल CBSE के क्षेत्रीय कार्यालय से सीधे बात कर सकता है।
क्या यह पहली बार हुआ है?
नहीं। पेपर लीक, मार्किंग में गड़बड़ी और कॉपी से जुड़ी शिकायतें पहले भी आती रही हैं। लेकिन OSM सिस्टम में डिजिटल टैगिंग मिसमैच एक नई और अलग तरह की समस्या है — जो सीधे तकनीकी लापरवाही की ओर इशारा करती है।
यह भी सच है कि CBSE ने इस बार एक मामले में गलती स्वीकार कर नंबर बदले — जो एक सकारात्मक संकेत है।
CBSE में 80 में से 27 नंबर — पास हैं या फेल?
यह सवाल इसलिए और अहम हो जाता है क्योंकि answer sheet mismatch के बाद कई छात्रों के नंबर अप्रत्याशित रूप से कम आए। CBSE के नियम के अनुसार Class 12 में पास होने के लिए कम से कम 33% अंक जरूरी हैं। Physics में Theory 70 marks की होती है और Practical 30 marks का।
Theory (70 marks) में पास के लिए: कम से कम 23 नंबर चाहिए
– Practical (30 marks) में पास के लिए: कम से कम 10 नंबर चाहिए
– कुल 100 में से: कम से कम 33 नंबर जरूरी
यानी अगर किसी को Theory में 27 out of 70 मिले हैं तो वह पास है। लेकिन अगर 27 out of 80 की बात है (पुराने pattern में) तो भी 27/80 = 33.75% होता है जो technically पास की श्रेणी में आता है। लेकिन असली सवाल यह है — अगर यह 27 नंबर किसी और की कॉपी जाँचने के बाद आए हों तो? तब यह पास-फेल का मामला नहीं, बल्कि सिस्टम की विफलता का मामला है।
CBSE का 80/20 नियम क्या है?
CBSE का 80/20 नियम Theory और Practical के बँटवारे से जुड़ा है।
Physics जैसे विषयों में:
– 80 अंक — Written Theory Exam (Board द्वारा)
– 20 अंक — Internal Assessment / Practical (स्कूल द्वारा)
महत्वपूर्ण बात: दोनों में अलग-अलग पास करना जरूरी है। सिर्फ Practical में अच्छे नंबर लाकर Theory की कमी पूरी नहीं होती।
OSM विवाद में यही 80 marks वाली Theory कॉपी की scanning में गड़बड़ी हुई — जो सीधे छात्र के final result को प्रभावित करती है।
CBSE Physics का सबसे कठिन पेपर कौन सा रहा है?
CBSE Class 12 Physics का पेपर हर साल लाखों छात्रों के लिए सबसे चुनौतीपूर्ण विषयों में से एक रहा है।
2026 का Physics पेपर कैसा था?
विशेषज्ञों के अनुसार 2026 का Physics पेपर Moderate स्तर का था — पिछले साल की तुलना में थोड़ा आसान। लगभग 25-30 नंबर के सीधे सवाल थे और बाकी Numerical और Application-based।
फिर कम नंबर क्यों आए?
यही वह सवाल है जो इस पूरे विवाद की जड़ में है। अगर पेपर moderate था, तो इतने छात्रों के unexpectedly कम नंबर क्यों आए? तीन संभावनाएँ हैं:
1. OSM में Scanning Error — कॉपी सही से scan नहीं हुई, कुछ pages धुंधले रहे।
2. Tagging Mismatch — Vedant के मामले जैसी स्थिति जहाँ किसी और की कॉपी गलत roll number से जुड़ गई।
3. Evaluator की गलती — नए digital system पर काम करने वाले teachers पर्याप्त trained नहीं थे।
बड़ा सवाल जो बाकी है
CBSE का OSM सिस्टम एक अच्छी सोच से शुरू हुआ — पारदर्शिता, गति और कम गलतियाँ। लेकिन बिना पर्याप्त तैयारी, शिक्षक प्रशिक्षण और पायलट टेस्टिंग के इसे 46 लाख छात्रों पर एक साथ लागू करना जल्दबाजी साबित हुई।
Vedant जैसे छात्रों का भविष्य दाँव पर लगा था। CBSE ने एक मामले में जवाब दिया — लेकिन बाकी छात्रों का क्या?

