डिजिटल इंडिया के सफर में एक और बड़ी उपलब्धि! ग्लोबल फिनटेक फेस्ट 2025 में NPCI (नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया) ने BHIM App का नया बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन फीचर लॉन्च किया है। अब आप चेहरे (Face Recognition) या फिंगरप्रिंट के ज़रिए सीधे भुगतान कर सकते हैं—PIN या पासवर्ड याद रखने की कोई ज़रूरत नहीं। BHIM App इसलिए साइबर क्राइम से भी बचाता है।
नया क्या है?
अब Face या Fingerprint से Payment की सुविधा। PIN या Password की झंझट खत्म। Senior Citizens और Busy Professionals के लिए उपयोग में आसान। हर लेनदेन अब एन्क्रिप्टेड और बायोमेट्रिक रूप से सुरक्षित। डेटा सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए NPCI ने इसे कई स्तरों पर सुरक्षित बनाया है
क्यों है यह फीचर खास?
यह अपडेट सिर्फ एक तकनीकी बदलाव नहीं, बल्कि डिजिटल समावेशन (Digital Inclusion) की दिशा में भारत का एक अहम कदम है।
यह उन लोगों के लिए भी डिजिटल भुगतान को आसान बनाता है जिन्हें PIN या Password याद रखने में मुश्किल होती है।
यह कदम भारत के Cyber Crime Mukt Bharat विज़न को भी मज़बूती देता है, जिससे ऑनलाइन धोखाधड़ी और वित्तीय अपराधों में कमी लाने में मदद मिलेगी।
रोज़मर्रा के भुगतान में नया अनुभव
अब चाहे आप किराना दुकान पर सामान खरीद रहे हों, बिजली का बिल भर रहे हों या किसी स्थानीय विक्रेता को भुगतान कर रहे हों —
UPI अपनाएं, BHIM चुनें और भारत-प्रथम डिजिटल सुरक्षा का हिस्सा बनें।
India Vistar की राय:
NPCI का यह बायोमेट्रिक फीचर भारतीय फिनटेक इकोसिस्टम को नई दिशा देगा। यह कदम न केवल सुरक्षा को मजबूत करेगा, बल्कि भारत के डिजिटल ट्रांजैक्शन सिस्टम को और भरोसेमंद बनाएगा।
निष्कर्ष:
BHIM का नया बायोमेट्रिक अपडेट डिजिटल भुगतान के अनुभव को नया रूप देने जा रहा है।
यह तकनीक हर भारतीय को “स्मार्ट, तेज़ और सुरक्षित डिजिटल इंडिया” की ओर आगे बढ़ाएगी।
यह भी पढ़ेंः
- सोशल मीडिया पर फर्जी विज्ञापन से ठगी का नया ट्रेंड; भूलकर भी न करें ये गलती, जानें शिकायत का तरीका
- PM Kisan 24th Installment: अगली ₹2000 की किस्त कब आएगी? किस्त रुकी है तो ऐसे करें जांच
- Cyber Fraud: पैसा ट्रांसफर होने से पहले कैसे रुक सकती है साइबर ठगी, ₹5,043 करोड़ बचाने वाले सिस्टम को समझिए
- बाबलू डेयरी में किसने चलवाई गोलियां? डिजिटल निगरानी से खुली गांजा, वसूली और बदले की कहानी
- Online Fraud: नौकरी और निवेश के नाम पर ₹641 करोड़ की ठगी, आखिर कहां गया पैसा?












