शुक्रवार, 23 जनवरी को रिलीज़ हुई Baby Girl पहली नज़र में एक साधारण शीर्षक वाली फिल्म लग सकती है, लेकिन परदे पर खुलती कहानी वैसी नहीं है।
Nivin Pauly इस फिल्म में उस ज़ोन में दिखाई देते हैं जहाँ संवाद कम और भावनात्मक दबाव ज़्यादा है। Baby Girl दर्शक से तुरंत तालमेल नहीं बैठाती, बल्कि धीरे-धीरे अपने भीतर खींचती है।
कहानी क्या कहती है
Baby Girl की कहानी किसी बड़े ट्विस्ट या शोरगुल पर नहीं टिकी है। यह रिश्तों, जिम्मेदारी और भीतर दबे अपराधबोध के इर्द-गिर्द घूमती है।
फिल्म सवाल पूछती है—क्या हर रिश्ते का नाम होना ज़रूरी है, और क्या हर सच को ज़ोर से कहा जाना चाहिए?
कहानी आगे बढ़ते हुए दर्शक को असहज करती है, लेकिन यही इसकी ताकत भी है।
Nivin Pauly की परफॉर्मेंस
Nivin Pauly यहाँ अपने पुराने चार्म से अलग दिखाई देते हैं।
यह अभिनय एक्सप्रेशन से ज़्यादा साइलेंस पर आधारित है। कई सीन ऐसे हैं जहाँ कैमरा स्थिर है, संवाद कम हैं, और पूरा भार उनकी आँखों पर है।
यह रोल उनके करियर के उन किरदारों में गिना जा सकता है जो समय के साथ और गहरे लगते हैं।
निर्देशन और टोन
निर्देशन जानबूझकर स्लो रखा गया है।
Baby Girl जल्दबाज़ी नहीं करती—न कहानी में, न किरदारों के फैसलों में। यही कारण है कि कुछ दर्शकों को फिल्म चुनौतीपूर्ण लग सकती है, लेकिन गंभीर सिनेमा पसंद करने वालों के लिए यह एक मजबूत अनुभव है।
संगीत और सिनेमैटोग्राफी
बैकग्राउंड स्कोर भावनाओं को उभारने की बजाय उन्हें दबा कर रखता है।
सिनेमैटोग्राफी में क्लोज-अप्स का इस्तेमाल कहानी से ज़्यादा मनोस्थिति पर फोकस करता है, जो फिल्म की थीम के साथ मेल खाता है।
दर्शकों की शुरुआती प्रतिक्रिया
रिलीज़ के बाद सोशल मीडिया पर Baby Girl को लेकर राय बंटी हुई दिखी है।
कुछ दर्शक इसे Nivin Pauly की सबसे ईमानदार फिल्मों में मान रहे हैं, तो कुछ इसे “slow but meaningful” कह रहे हैं।
एक बात साफ है—यह फिल्म अनदेखी नहीं की जा रही।












