राखी पर इस बार बांधिए खादी रक्षासूत, इतनी सारी विशेषताएं हैं इसमें

Rakhi-भाई बहनो के त्योहार रक्षा बंधन की तैयारियां शुरू हो चुकी है। भाईयों को भेजने के लिए देश भर में बहनो ने राखी की खरीदारी भी करनी शुरू कर दी है। ऐसे समय में खादी ने खादी रक्षासूत का अनावरण किया है। खादी ग्रामोद्योग आयोग के अध्यक्ष मनोज कुमार के मुताबिक ‘खादी रक्षासूत’ की विशेषता ये है कि इसे चरखे पर कते धागों से ग्रामीण भारत की कत्तिन (चरखे पर सूत कातने वाली) बहनों द्वारा तैयार किया गया है। ये पूरी तरह से प्राकृतिक है और इसे बनाने में केमिकल का प्रयोग बिल्कुल भी नहीं किया गया है।

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इसलिए खास है खादी रक्षासूत

उत्तर प्रदेश के अंबेडकरनगर के ग्रामोद्योगिक विकास संस्थान द्वारा बनाई गई राखी देशी गौ माता के पवित्र गोधन से बनी है। इसमें तुलसी, टमाटर, बैंगन के बीज डाले गये हैं। इसे इस सोच के साथ तैयार किया गया है कि जमीन में निस्तारण करने पर इसमें से तुलसी, टमाटर और बैंगन के पौधों का सृजन हो। दिल्ली के खादी भवन में इस तरह के दर्जनों खादी रक्षासूत बिक्री के लिए उपलब्ध हैं। देश के अलग-अलग राज्यों में तैयार ‘खादी रक्षासूत’ दिल्ली के कनॉट प्लेस स्थित खादी भवन में 20 रुपये से लेकर 250 रूपये तक की रेंज में उपलब्ध है।

अगली राखी में देश भर के लिए उपलब्ध होगा खादी रक्षासूत

दिल्ली के खादी भवन में आयोजित प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए केवीआईसी के अध्यक्ष श्री मनोज कुमार ने कहा कि ‘पायलट प्रोजेक्ट’ (Pilot Project) के तौर इस वर्ष खादी रक्षासूत की बिक्री दिल्ली के कनॉट प्लेस स्थित खादी भवन में की जा रही है। अगले वर्ष अखिल भारतीय स्तर पर ‘खादी रक्षासूत’ को लांच करने की तैयारी है। उन्होंने लोगों से अपील की कि भारत की राष्ट्रीय विरासत खादी से निर्मित ‘खादी रक्षासूत’ को अपना कर वो न सिर्फ भारत की समृद्ध विरासत का संरक्षण करें, बल्कि माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के ‘आत्मनिर्भर भारत‘ निर्माण में अपना योगदान भी दें।

इस अवसर पर केवीआईसी अध्यक्ष श्री मनोज कुमार ने कहा कि खादी, हमारी राष्ट्रीय विरासत का प्रतीक है, जिसने भारत के राष्ट्रीय आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में पिछले 9 वर्षों में खादी ने अपना ‘स्वर्णिम काल’ देखा है। पिछले वित्त वर्ष में खादी और ग्रामोद्योग उत्पादों का कारोबार 1.34 लाख करोड़ रुपये को पार कर गया। साथ ही इस वित्त वर्ष में खादी ने साढ़े 9 लाख से अधिक नये रोजगार का सृजन कर इतिहास रचा है। उन्होंने आगे कहा कि खादी की इसी नई ताकत को देखते हुए माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने ‘नये भारत की नई खादी’ को वस्त्र के साथ-साथ ‘अस्त्र-शस्त्र’ के रूप में परिभाषित किया है। ये अस्त्र-शस्त्र है गरीबी निर्मूलन, कारीगर सशक्तिकरण, खाद्य सुरक्षा, महिला सशक्तिकरण और बेरोजगारी उन्मूलन के विरूद्ध।

2014 के बाद अपने सबसे लोकप्रिय रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के शुरुआती चरणों के दौरान माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से खादी और ग्रामोद्योगी उत्पाद खरीदने का आग्रह किया। जिसका परिणाम ये हुआ कि जो खादी वित्त वर्ष 2013-14 से पहले मरणासन्न अवस्था में थी, उसे जैसे संजीवनी मिल गई। ग्रामीण कारीगरों के हुनर को ना सिर्फ अब सम्मान मिल रहा है बल्कि उन्हें काम का उचित दाम भी मिल रहा है। उसी क्रम में कारीगरों के हाथों में और अधिक पैसा पहुंचाने के लिए केवीआईसी ने ‘खादी रक्षासूत’ बाजार में उतारा है। इस बार रक्षाबंधन के शुभ अवसर पर आप भी खादी से बने रक्षासूत को कलाई पर बाधकर ना सिर्फ रक्षाबंधन का त्योहार मनाइये, बल्कि ग्रामीण भारत की महिला कारीगरों के चेहरों पर नई मुस्कान लाइये।

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26-10-2026