साइबर फ्रॉड का पैसा आखिर जाता कहां है? ठगी की रकम एक बैंक खाते से दूसरे खाते में घूमते हुए विदेश तक कैसे पहुंचती है? दिल्ली पुलिस की IFSO यूनिट की जांच में सामने आया Hero FinCorp का ₹12.84 करोड़ का साइबर फ्रॉड केस इस पूरे खेल की कई कड़ियां खोलता है। पुलिस के मुताबिक रकम 317 अनधिकृत डिजिटल ट्रांजैक्शन के जरिए 34 प्राथमिक बैंक खातों तक पहुंची। जांच में USDT क्रिप्टोकरेंसी और चीनी Telegram समूहों से कथित संपर्क की बात भी सामने आई है।
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इस मामले की अहम बात सिर्फ ₹12.84 करोड़ की रकम नहीं है। यह केस बताता है कि साइबर फ्रॉड में बैंक खाते, स्थानीय सहयोगी, डिजिटल ट्रांजैक्शन और क्रिप्टो किस तरह एक चेन का हिस्सा बन सकते हैं।
₹12.84 करोड़ के Cyber Fraud में क्या हुआ?
मामला गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी Hero FinCorp Ltd से जुड़ा है। कंपनी के कॉर्पोरेट खाते से 317 अनधिकृत डिजिटल ट्रांजैक्शन के जरिए कुल ₹12,84,09,997 निकाल लिए जाने का आरोप है।
कंपनी को संदिग्ध ट्रांजैक्शन का पता बैंकिंग अलर्ट के बाद चला। इसके बाद शिकायत की गई और 21 अगस्त 2026 को मामला दर्ज हुआ।
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दिल्ली पुलिस की Intelligence Fusion and Strategic Operations यानी IFSO यूनिट ने जांच आगे बढ़ाई। पुलिस के मुताबिक धोखाधड़ी की रकम को 34 प्राथमिक स्तर के बैंक खातों में भेजा गया था।
जांच के दौरान पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। इनमें विकास नाम का एक आरोपी निजी बैंक में रिलेशनशिप मैनेजर बताया गया है।
Cyber Fraud का पैसा एक खाते में क्यों नहीं रखा जाता?
साइबर ठगी के मामलों में अपराधी आमतौर पर चोरी की रकम को लंबे समय तक एक ही बैंक खाते में रखने से बचते हैं। रकम को अलग-अलग खातों में भेजने से पैसे का रास्ता लंबा हो जाता है।
इसे आसान भाषा में समझें।
फ्रॉड की रकम → कई बैंक खाते → दूसरे खाते → निकासी या आगे ट्रांसफर → क्रिप्टो → विदेशी हैंडलर
Hero FinCorp मामले में भी पुलिस को 34 प्राथमिक स्तर के खातों तक पैसे का रास्ता मिला है।
ऐसे बैंक खातों को साइबर अपराध की भाषा में अक्सर Mule Accounts कहा जाता है। इनमें कुछ खाताधारक जानबूझकर कमीशन के बदले अपना खाता उपलब्ध करा सकते हैं, जबकि कुछ मामलों में लोगों को असली मकसद बताए बिना भी उनके खातों का इस्तेमाल किया जाता है।
Mule Account क्या है और यह Cyber Fraud में कैसे इस्तेमाल होता है?
Mule Account ऐसा बैंक खाता है जिसका इस्तेमाल ठगी से आए पैसे को प्राप्त करने या आगे भेजने के लिए किया जाता है।
अपराधियों के लिए ऐसे खाते बहुत अहम होते हैं क्योंकि पीड़ित से पैसा सीधे मुख्य संचालक तक भेजने पर जांच एजेंसियां उसका रास्ता जल्दी पकड़ सकती हैं।
इसलिए रकम को कई खातों में घुमाया जाता है।
Hero FinCorp केस में पुलिस ने अलग-अलग खातों में पैसे पहुंचने और उसके बाद रकम आगे भेजे जाने की जांच की है। एक खाते के NCRP पर देशभर की 43 साइबर शिकायतों से जुड़े होने की बात भी पुलिस जांच में सामने आई है।
इसलिए कमीशन के बदले अपना बैंक खाता, ATM कार्ड, चेकबुक या बैंकिंग एक्सेस किसी को देना गंभीर मुसीबत पैदा कर सकता है।
USDT Cyber Fraud क्या है?
इस केस में एक और महत्वपूर्ण नाम सामने आया है, USDT।
USDT एक क्रिप्टोकरेंसी है जिसकी कीमत सामान्य तौर पर अमेरिकी डॉलर से जुड़ी रहती है। पुलिस का आरोप है कि नेटवर्क से जुड़े कुछ लोग धोखाधड़ी की रकम को USDT में बदलकर विदेश में बैठे लोगों तक पहुंचाने का काम कर रहे थे।
पुलिस की जांच में एक आरोपी के चीनी Telegram समूहों के संपर्क में होने की बात भी सामने आई है।
यहां एक बात साफ रहनी चाहिए। चीनी Telegram समूहों और विदेश में बैठे लोगों की भूमिका पुलिस जांच का हिस्सा है। जांच पूरी होने और अदालत में आरोप साबित होने से पहले इसे अंतिम निष्कर्ष नहीं माना जा सकता।
Bank Employee की कथित भूमिका क्यों महत्वपूर्ण है?
इस मामले में गिरफ्तार विकास जयपुर में एक निजी बैंक का रिलेशनशिप मैनेजर बताया गया है।
पुलिस का आरोप है कि उसने दूसरे आरोपियों को बैंक खाते खुलवाने में मदद की और संपर्क स्थापित कराए।
यदि साइबर अपराधियों को बैंकिंग प्रक्रिया की जानकारी रखने वाले किसी व्यक्ति का सहयोग मिल जाए तो फर्जी या संदिग्ध खातों का इस्तेमाल आसान हो सकता है। इसीलिए बैंकों के लिए कर्मचारी स्तर पर असामान्य गतिविधियों की निगरानी भी महत्वपूर्ण है।
इस मामले में संबंधित व्यक्तियों पर लगे आरोप अभी न्यायिक प्रक्रिया के अधीन हैं।
APK का Cyber Fraud में कैसे इस्तेमाल हो सकता है?
जांच में APK फाइल का पहलू भी सामने आया है।
पुलिस के मुताबिक एक आरोपी के मोबाइल फोन में APK इंस्टॉल किए जाने के बाद उसके बैंक खाते का इस्तेमाल ठगी की रकम प्राप्त करने और आगे भेजने के लिए किया गया।
APK Android ऐप की इंस्टॉलेशन फाइल होती है। हर APK खतरनाक नहीं होती, लेकिन WhatsApp, Telegram, SMS या अनजान वेबसाइट से मिली APK फाइल इंस्टॉल करना जोखिम पैदा कर सकता है।
अनजान APK फाइल के जरिए मोबाइल में हानिकारक ऐप पहुंच सकता है। इसलिए ऐप डाउनलोड करने के लिए आधिकारिक और भरोसेमंद स्रोत का इस्तेमाल करना बेहतर है।
₹12.84 करोड़ में कितना पैसा रोका गया?
दिल्ली पुलिस के मुताबिक जांच के दौरान विभिन्न बैंक खातों में करीब ₹1.70 करोड़ पर होल्ड या लियन लगाया गया है।
यह साइबर फ्रॉड के मामलों में समय की अहमियत भी बताता है।
अगर किसी व्यक्ति के बैंक खाते से साइबर ठगी के जरिए पैसा निकल जाए तो जितनी जल्दी बैंक और साइबर अपराध हेल्पलाइन को जानकारी मिलेगी, रकम के अगले खाते में जाने से पहले कार्रवाई की संभावना उतनी बेहतर हो सकती है।
साइबर वित्तीय धोखाधड़ी की शिकायत के लिए 1930 हेल्पलाइन उपलब्ध है। शिकायत National Cybercrime Reporting Portal पर भी दर्ज की जा सकती है।
Cyber Fraud से बचने के लिए इस केस से क्या सीखें?
Hero FinCorp का मामला आम लोगों और कंपनियों दोनों के लिए महत्वपूर्ण है।
किसी व्यक्ति को कमीशन के बदले अपना बैंक खाता इस्तेमाल करने देना भारी पड़ सकता है। बैंक खाते में अनजान रकम आने पर उसे तुरंत दूसरे खाते में भेजने या नकद निकालने के बजाय बैंक से संपर्क करना चाहिए।
अनजान व्यक्ति के कहने पर APK इंस्टॉल नहीं करें। बैंक खाते, ATM कार्ड, OTP और बैंकिंग एक्सेस किसी दूसरे व्यक्ति के साथ साझा न करें।
कंपनियों के लिए बड़ी रकम वाले असामान्य ट्रांजैक्शन पर रियल टाइम अलर्ट और अतिरिक्त जांच महत्वपूर्ण है।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि विदेश से चलने वाला साइबर फ्रॉड स्थानीय बैंक खातों और स्थानीय सहयोगियों के बिना आसानी से पैसा नहीं घुमा सकता। Hero FinCorp केस में चल रही जांच इसी स्थानीय से अंतरराष्ट्रीय चेन की कई कड़ियों को सामने ला रही है।










