पुराने ट्रक-बस बदलने पर टैक्स, ब्याज और ईंधन में छूट, जानें परिवर्तन योजना के लाभ

अलवर में परिवर्तन योजना के तहत नया व्यावसायिक वाहन खरीदते महेंद्र सिंह

पुराना ट्रक या बस बदलने की योजना बना रहे वाहन मालिकों के लिए केंद्र सरकार की परिवर्तन योजना बड़ी आर्थिक राहत दे सकती है। दिल्ली-एनसीआर में पंजीकृत बीएस-IV या उससे पुराने ट्रक और बस को नए बीएस-VI, सीएनजी या इलेक्ट्रिक वाहन से बदलने पर वाहन मालिक को ब्याज, रोड टैक्स, पंजीकरण शुल्क, वाहन की कीमत और ईंधन खर्च में अलग-अलग लाभ मिल सकते हैं।

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इस योजना के शुरुआती चरण में ही 1,300 से अधिक लाभार्थी पंजीकरण करा चुके हैं। वाहन खरीदने के लिए कर्ज उपलब्ध कराने और ब्याज में राहत देने के उद्देश्य से 42 बैंक एवं गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां योजना से जुड़ी हैं। पात्र वाहन मालिकों को कीमत में छूट देने के लिए 15 ऑटो कंपनियों के साथ भी समझौते किए गए हैं।

परिवर्तन योजना क्या है

परिवर्तन का पूरा नाम परिवहन वायु प्रदूषण और नेटवर्क उत्सर्जन को कम करने के लिए वाहन संपत्तियों के त्वरित नवीनीकरण और प्रोत्साहन का कार्यक्रम है। अंग्रेजी में इसे PARIVARTAN कहा गया है।

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केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 3 जून 2026 को इस योजना को मंजूरी दी थी। इसे 14 जुलाई 2026 को लागू किया गया। योजना का लक्ष्य दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में चलने वाले दो लाख से अधिक पुराने ट्रक और बसों को चरणबद्ध तरीके से बदलना है।

इसके दायरे में दिल्ली के साथ हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के वे जिले आते हैं, जो राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र का हिस्सा हैं। योजना मुख्य रूप से बीएस-IV या उससे पुराने उत्सर्जन मानकों वाले ट्रकों और बसों के मालिकों के लिए है।

योजना पर कितनी रकम खर्च होगी

परिवर्तन योजना का कुल वित्तीय परिव्यय 9,585 करोड़ रुपये रखा गया है। इसमें केंद्र सरकार की ओर से 5,041 करोड़ रुपये की बजटीय सहायता शामिल है।

योजना के लिए धन आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय के अधीन काम करने वाला राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र योजना बोर्ड यानी एनसीआरपीबी उपलब्ध करा रहा है। इसे लागू करने की जिम्मेदारी सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय को दी गई है।

पुराना ट्रक या बस बदलने पर क्या लाभ मिलेगा

योजना में सहायता को कई हिस्सों में बांटा गया है। इसका मकसद वाहन मालिक की नई गाड़ी खरीदने की शुरुआती लागत और बाद में पड़ने वाले वित्तीय बोझ को कम करना है।

मिलने वाला लाभयोजना में प्रावधान
वाहन ऋण पर ब्याज सहायतापात्र ऋण पर पांच वर्षों तक 5 प्रतिशत ब्याज की बचत
रोड टैक्स में राहतदस वर्षों तक रोड टैक्स में 100 प्रतिशत छूट
पंजीकरण शुल्कपूरी तरह माफ
कंपनी की छूटएक्स-शोरूम कीमत पर कम से कम 8 प्रतिशत छूट
डीजल या सीएनजी वाहनवाहन श्रेणी के अनुसार पांच वर्षों तक 1,200 से 4,800 रुपये मासिक ईंधन वाउचर
इलेक्ट्रिक वाहन64,000 रुपये से 2.56 लाख रुपये तक एकमुश्त प्रोत्साहन

दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश की सरकारें रोड टैक्स तथा पंजीकरण शुल्क में छूट से संबंधित अधिसूचनाएं जारी कर चुकी हैं।

किन नए वाहनों की खरीद पर सहायता मिलेगी

पात्र लाभार्थी अपने पुराने वाहन के बदले बीएस-VI या उससे कड़े उत्सर्जन मानक वाला नया डीजल अथवा सीएनजी वाहन खरीद सकते हैं। इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने का विकल्प भी उपलब्ध है।

डीजल या सीएनजी वाहन खरीदने वाले लाभार्थी को वाहन की श्रेणी के अनुसार मासिक ईंधन वाउचर मिल सकता है। इलेक्ट्रिक वाहन के मामले में मासिक वाउचर की जगह एकमुश्त प्रोत्साहन देने का प्रावधान है।

इसका अर्थ यह है कि वाहन मालिक अपनी जरूरत, रूट, सामान की प्रकृति और चार्जिंग सुविधा को देखकर नया वाहन चुन सकता है।

42 बैंक और एनबीएफसी क्यों जोड़े गए

पुराने व्यावसायिक वाहन को बदलने में सबसे बड़ी परेशानी नई गाड़ी के लिए धन जुटाने की होती है। इसी कारण योजना से 42 बैंक और एनबीएफसी जोड़े गए हैं।

ये संस्थान पात्र वाहन ऋण पर मिलने वाली पांच प्रतिशत ब्याज सहायता को लागू करने में मदद करेंगे। वाहन मालिक को कर्ज की पात्रता, डाउन पेमेंट, मासिक किस्त और अन्य शर्तों की जानकारी संबंधित बैंक या एनबीएफसी से लेनी होगी।

ब्याज सहायता मिलने का यह मतलब नहीं है कि प्रत्येक आवेदक को अपने आप ऋण मिल जाएगा। बैंक आवेदक की आय, पुराने ऋण, भुगतान क्षमता और जरूरी दस्तावेज की जांच अपने नियमों के अनुसार कर सकता है।

ऑटो कंपनियां भी देंगी कीमत में छूट

परिवर्तन योजना में 15 ऑटो ओरिजिनल इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरर्स यानी वाहन निर्माता कंपनियों को शामिल किया गया है। इनके साथ पात्र खरीदारों को नए वाहन की एक्स-शोरूम कीमत पर कम से कम आठ प्रतिशत छूट देने का समझौता हुआ है।

वाहन मालिक को खरीद से पहले यह जांचना चाहिए कि चुनी गई कंपनी और वाहन का मॉडल परिवर्तन योजना में शामिल है या नहीं। डीलर से मिलने वाली कीमत, सरकारी प्रोत्साहन और बैंक ऋण का स्पष्ट विवरण लिखित रूप में लेना उपयोगी रहेगा

योजना में पंजीकरण कैसे कराया जा सकता है

पात्र वाहन मालिक परिवर्तन पोर्टल पर अपना पंजीकरण करा सकते हैं। पंजीकरण करते समय पुराने वाहन का रिकॉर्ड और आवेदक की पहचान से जुड़ी जानकारी मांगी जा सकती है। वाहन तथा आवेदक की पात्रता की जांच के बाद आगे की प्रक्रिया पूरी होगी।

आधिकारिक जानकारी के अनुसार 27 अगस्त 2026 तक 1,300 से अधिक लाभार्थी पोर्टल पर पंजीकरण करा चुके थे। यह संख्या योजना के शुरुआती चरण की प्रगति बताती है। आगे जागरूकता बढ़ने के साथ आवेदकों की संख्या बढ़ सकती है।

अलवर के महेंद्र सिंह बने पहले वाहन मालिक

राजस्थान के अलवर निवासी महेंद्र सिंह ने 19 अगस्त 2026 को परिवर्तन योजना के अंतर्गत नया वाहन खरीदा। वह इस योजना के तहत नई गाड़ी खरीदने वाले पहले वाहन मालिक बने।

उनका उदाहरण बताता है कि योजना सरकारी मंजूरी और घोषणाओं से आगे बढ़कर वाहन खरीद के स्तर तक पहुंच चुकी है।

दिल्ली-एनसीआर में क्यों चलाई जा रही है यह योजना

पुराने डीजल ट्रक और बसें दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण के स्रोतों में शामिल मानी जाती हैं। पुराने उत्सर्जन मानकों वाले वाहन नई तकनीक के वाहनों की तुलना में अधिक प्रदूषक तत्व छोड़ सकते हैं।

वाहन मालिकों के लिए पुराने व्यावसायिक वाहन को तुरंत बदलना आसान नहीं होता। नई गाड़ी की कीमत, ऋण का ब्याज, रोड टैक्स, पंजीकरण और ईंधन खर्च एक साथ बड़ा बोझ बन सकते हैं। परिवर्तन योजना इन्हीं खर्चों को अलग-अलग प्रोत्साहनों के माध्यम से कम करने का प्रयास करती है।

वाहन मालिक आवेदन से पहले क्या जांचें

वाहन मालिक को सबसे पहले यह देखना होगा कि उसका वाहन दिल्ली या अधिसूचित एनसीआर जिले में पंजीकृत है या नहीं। वाहन बीएस-IV अथवा उससे पुराने उत्सर्जन मानक वाला होना चाहिए और योजना में तय वाहन श्रेणी के अंतर्गत आना चाहिए।

नया वाहन तय करने से पहले उसकी कीमत, निर्माता द्वारा मिलने वाली छूट, बैंक की ब्याज दर, सरकारी सहायता और वास्तविक मासिक किस्त का हिसाब समझना जरूरी है। किसी बिचौलिए को भुगतान करने के बजाय आधिकारिक पोर्टल, अधिकृत डीलर और योजना से जुड़े बैंक से संपर्क करना बेहतर होगा।

जागरूकता अभियान कहां चलाया जा रहा है

पात्र वाहन मालिकों तक योजना की जानकारी पहुंचाने के लिए दिल्ली-एनसीआर में अभियान चलाया जा रहा है। इसमें प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया का उपयोग किया जा रहा है।

फ्यूल स्टेशन, ट्रांसपोर्ट नगर, टोल प्लाजा और क्षेत्रीय परिवहन कार्यालयों पर भी योजना का प्रचार किया जा रहा है। ये वे स्थान हैं जहां ट्रक और बस मालिकों, चालकों तथा ट्रांसपोर्ट ऑपरेटरों की नियमित आवाजाही रहती है।

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Alok Verma
a senior journalist with a 30 years experience of print, electronics and digital. worked with dainik jagran, news18india, R,bharat, zee news

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30-08-2026