दिल्ली में एक बड़ी आतंकी साजिश को समय रहते नाकाम करने का दावा करते हुए दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने चार लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार यह मॉड्यूल पाकिस्तान स्थित ISI हैंडलर शाहजाद भट्टी और उसके सहयोगियों के संपर्क में था। जांच में सामने आया कि आरोपी विदेशी मोबाइल नंबरों पर चल रहे WhatsApp अकाउंट के जरिए बातचीत कर रहे थे ताकि भारतीय एजेंसियों की निगरानी से बचा जा सके। इतना ही नहीं, ड्रोन के जरिए हथियार और अन्य सामान मंगाने की भी जानकारी सामने आई है।
दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल (NDR) के डीसीपी प्रवीण कुमार त्रिपाठी के अनुसार यह कार्रवाई कई दिनों तक चली तकनीकी निगरानी, खुफिया इनपुट और दिल्ली-पंजाब में लगातार छापेमारी के बाद की गई। पुलिस ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) और आर्म्स एक्ट की संबंधित धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की है।
खुफिया सूचना से शुरू हुई पूरी जांच
दिल्ली पुलिस को विश्वसनीय सूचना मिली थी कि पाकिस्तान में बैठे ISI हैंडलर शाहजाद भट्टी का नेटवर्क दिल्ली-एनसीआर में आतंकी वारदात की तैयारी कर रहा है। सूचना में यह भी बताया गया कि पंजाब के कुछ युवाओं को इस नेटवर्क से जोड़ा गया है।
इसके बाद एसीपी विवेक कुमार त्यागी की निगरानी में इंस्पेक्टर सतीश राणा और इंस्पेक्टर अशोक के नेतृत्व वाली टीम ने तकनीकी विश्लेषण और फील्ड ऑपरेशन शुरू किया। कई संदिग्धों की पहचान की गई और अलग-अलग स्थानों पर छापेमारी की गई।
अमृतसर से शुरू हुई गिरफ्तारी, दिल्ली तक पहुंची जांच
पुलिस के अनुसार सबसे पहले पंजाब के अमृतसर में शुभदीप सिंह उर्फ विशाल को गिरफ्तार किया गया। उसके कब्जे से एक सेमी ऑटोमैटिक पिस्टल, पांच जिंदा कारतूस और दो मोबाइल फोन बरामद किए गए।
पूछताछ में उसने कथित तौर पर बताया कि वह पाकिस्तान स्थित हैंडलरों के संपर्क में था और ड्रोन के जरिए हथियार तथा नशीले पदार्थों की खेप प्राप्त करता था।
इसके बाद गुरजंत सिंह उर्फ ऋषि और साजन सिंह उर्फ हनी को भी गिरफ्तार किया गया। पुलिस के अनुसार इनके पास से एक जिगाना पिस्टल, चार जिंदा कारतूस और दो मोबाइल फोन बरामद हुए।
जांच आगे बढ़ी तो 24 अप्रैल 2026 को चौथे आरोपी गगनप्रीत को दिल्ली से गिरफ्तार किया गया। उसके मोबाइल फोन से कई डिजिटल साक्ष्य मिलने का दावा किया गया है।
विदेशी WhatsApp नंबर क्यों थे अहम
पुलिस का कहना है कि चारों आरोपी विदेशी मोबाइल नंबरों पर WhatsApp चलाते थे। ये नंबर पाकिस्तान स्थित हैंडलरों द्वारा उपलब्ध कराए गए थे। जांच एजेंसियों का मानना है कि इस तरीके का इस्तेमाल पहचान छिपाने और डिजिटल निगरानी से बचने के लिए किया जा रहा था।
दिल्ली में किन जगहों की रेकी कराने का आरोप
स्पेशल सेल के अनुसार गगनप्रीत को दिल्ली के धार्मिक स्थलों, पुलिस थानों और पुलिस पिकेट की रेकी करने का काम सौंपा गया था। पुलिस का दावा है कि उसे इन स्थानों के वीडियो बनाकर पाकिस्तान स्थित हैंडलरों तक भेजने और बाद में फायरिंग की घटना को अंजाम देने का निर्देश मिला था।
ड्रोन के जरिए हथियार पहुंचाने का दावा
जांच में पुलिस ने दावा किया है कि पाकिस्तान सीमा के पास रहने वाले आरोपी ड्रोन के जरिए भेजे गए हथियार और मादक पदार्थों की खेप प्राप्त करते थे। यही नेटवर्क आगे इन्हें अलग-अलग लोगों तक पहुंचाता था। पुलिस इस सप्लाई चेन से जुड़े अन्य लोगों की भी तलाश कर रही है।
क्या-क्या हुआ बरामद
पुलिस के अनुसार कार्रवाई के दौरान निम्नलिखित सामान बरामद किया गया।
- एक जिगाना पिस्टल
- एक .30 बोर पिस्टल
- नौ जिंदा कारतूस
- पांच मोबाइल फोन
गिरफ्तार आरोपी कौन हैं
- शुभदीप सिंह उर्फ विशाल, जिला तरनतारन, पंजाब
- गुरजंत सिंह उर्फ ऋषि, जिला तरनतारन, पंजाब
- साजन सिंह उर्फ हनी, जिला अमृतसर, पंजाब
- गगनप्रीत, जिला फतेहगढ़ साहिब, पंजाब
पुलिस के अनुसार शुभदीप सिंह और साजन सिंह के खिलाफ पहले भी एनडीपीएस एक्ट के मामलों में कार्रवाई हो चुकी है।
जांच अभी जारी
दिल्ली पुलिस का कहना है कि मामले की जांच अभी जारी है। डिजिटल उपकरणों, विदेशी संपर्कों, ड्रोन नेटवर्क और कथित ISI मॉड्यूल से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।








