भारत की समुद्री सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। केन्द्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) और भारतीय समुद्री विश्वविद्यालय (IMU) ने चेन्नई स्थित विश्वविद्यालय मुख्यालय में एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस सहयोग का उद्देश्य बंदरगाह सुरक्षा, समुद्री सुरक्षा प्रशिक्षण, अनुसंधान और क्षमता निर्माण को नई गति देना है।
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देश में समुद्री व्यापार लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में बंदरगाहों और समुद्री बुनियादी ढांचे की सुरक्षा पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। इसी जरूरत को ध्यान में रखते हुए दोनों संस्थानों ने दीर्घकालिक साझेदारी की शुरुआत की है।
क्या है CISF और IMU के बीच हुआ समझौता?
23 जून 2026 को हुए इस समझौते के तहत दोनों संस्थान समुद्री सुरक्षा से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में मिलकर काम करेंगे। यह समझौता पांच वर्षों तक प्रभावी रहेगा।
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इस साझेदारी के माध्यम से प्रशिक्षण, शोध, परामर्श, पाठ्यक्रम विकास और सुरक्षा प्रबंधन से जुड़े कार्यक्रम संचालित किए जाएंगे। इसका लक्ष्य ऐसे प्रशिक्षित सुरक्षा विशेषज्ञ तैयार करना है जो आधुनिक समुद्री चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना कर सकें।
बंदरगाह सुरक्षा प्रशिक्षण पर रहेगा विशेष जोर
समझौते के तहत भारतीय समुद्री विश्वविद्यालय और CISF संयुक्त रूप से विशेष मान्यता प्राप्त सुरक्षा संगठन (RSO) पाठ्यक्रम विकसित करेंगे। इसके अलावा अन्य क्षमता निर्माण कार्यक्रम भी संचालित किए जाएंगे। इन पाठ्यक्रमों का उद्देश्य CISF कर्मियों को समुद्री सुरक्षा के तकनीकी और व्यावहारिक पहलुओं में विशेषज्ञ बनाना है ताकि वे देश के महत्वपूर्ण बंदरगाहों की सुरक्षा जरूरतों को बेहतर ढंग से संभाल सकें।
शुरू हुआ पहला RSO प्रशिक्षण बैच
समझौते के साथ ही RSO पाठ्यक्रम का पहला बैच भारतीय समुद्री विश्वविद्यालय में शुरू हो गया है। यह पहल CISF के भीतर समुद्री सुरक्षा विशेषज्ञों का एक समर्पित समूह तैयार करने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है। इससे आने वाले वर्षों में बंदरगाह सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक पेशेवर तथा आधुनिक बनाने में मदद मिलेगी।
ज्ञान साझाकरण और अनुसंधान को मिलेगा बढ़ावा
दोनों संस्थानों के बीच यह सहयोग केवल प्रशिक्षण तक सीमित नहीं रहेगा। इसके तहत समुद्री सुरक्षा के उभरते विषयों पर संयुक्त अनुसंधान, शैक्षणिक सहयोग, विशेषज्ञों के अनुभव साझा करने और नए पाठ्यक्रम विकसित करने पर भी काम किया जाएगा। इससे सुरक्षा क्षेत्र में नवीनतम वैश्विक मानकों और तकनीकों को अपनाने में सहायता मिलेगी।
पहले से चल रहे प्रयासों को मिलेगी मजबूती
हाल के वर्षों में CISF ने समुद्री सुरक्षा क्षेत्र में अपनी भूमिका का लगातार विस्तार किया है। देश के विभिन्न बंदरगाहों की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के साथ-साथ विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम भी शुरू किए गए हैं। इस वर्ष की शुरुआत में राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय में महासागर सिमुलेटर लैब की स्थापना और पोर्ट सिक्योरिटी असिस्टेंट (PSA) प्रशिक्षण मॉड्यूल पर बढ़ता फोकस भी इसी दिशा में उठाए गए महत्वपूर्ण कदमों में शामिल है।
अधिकारियों ने क्या कहा?
इस अवसर पर वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा कि यह साझेदारी परिचालन अनुभव और शैक्षणिक उत्कृष्टता का प्रभावी संगम है। जहां CISF महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की सुरक्षा और सुरक्षा प्रोटोकॉल के क्रियान्वयन का दशकों का अनुभव रखता है, वहीं भारतीय समुद्री विश्वविद्यालय समुद्री अध्ययन, शोध और शैक्षणिक संसाधनों के क्षेत्र में विशेषज्ञता प्रदान करता है।
अधिकारियों के अनुसार दोनों संस्थान मिलकर ऐसी समुद्री सुरक्षा कार्यबल तैयार करना चाहते हैं जो भविष्य की चुनौतियों का सामना करने में सक्षम हो।
भारत की समुद्री सुरक्षा को कैसे होगा फायदा?
विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता देश के बंदरगाह सुरक्षा मानकों को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। साथ ही सुरक्षित समुद्री व्यापार, रणनीतिक बुनियादी ढांचे की सुरक्षा और प्रशिक्षित सुरक्षा कर्मियों की उपलब्धता सुनिश्चित करने में भी मदद करेगा।
भारत वैश्विक समुद्री व्यापार में अपनी भूमिका लगातार बढ़ा रहा है। ऐसे में समुद्री सुरक्षा से जुड़े प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार करना राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक विकास दोनों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सामान्य प्रश्न
समुद्री सुरक्षा क्या होती है?
समुद्री सुरक्षा में बंदरगाहों, जहाजों, समुद्री मार्गों और समुद्री बुनियादी ढांचे की सुरक्षा से जुड़े सभी उपाय शामिल होते हैं।
CISF की समुद्री सुरक्षा में क्या भूमिका है?
CISF देश के कई प्रमुख बंदरगाहों और महत्वपूर्ण औद्योगिक प्रतिष्ठानों की सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालता है।
RSO कोर्स क्या है?
RSO यानी Recognized Security Organization पाठ्यक्रम समुद्री और बंदरगाह सुरक्षा से जुड़े विशेषज्ञ प्रशिक्षण कार्यक्रमों में शामिल है।
IMU क्या है?
भारतीय समुद्री विश्वविद्यालय भारत सरकार के अधीन समुद्री शिक्षा और प्रशिक्षण के लिए स्थापित एक प्रमुख विश्वविद्यालय है।
इस समझौते का सबसे बड़ा लाभ क्या होगा?
इससे प्रशिक्षित समुद्री सुरक्षा विशेषज्ञों की संख्या बढ़ेगी और देश के बंदरगाहों की सुरक्षा व्यवस्था को आधुनिक एवं प्रभावी बनाने में मदद मिलेगी।
