IGL Gas Connection Scam: गैस कनेक्शन कटने के फर्जी मैसेज से ₹2.64 लाख की ठगी, दिल्ली पुलिस ने चार साइबर ठग दबोचे

IGL गैस कनेक्शन बंद होने का डर दिखाकर APK फाइल इंस्टॉल कराई गई और पीड़िता के बैंक खाते व क्रेडिट कार्ड से ₹2.64 लाख उड़ा लिए गए। दिल्ली पुलिस ने इस अंतरराज्यीय साइबर गिरोह के चार आरोपियों को गिरफ्तार कर बड़ी बरामदगी की है।
IGL गैस कनेक्शन के नाम पर साइबर ठगी का खुलासा, दिल्ली पुलिस ने चार आरोपियों को गिरफ्तार किया

अगर आपके मोबाइल पर कभी यह संदेश आए कि आपका IGL गैस कनेक्शन बंद होने वाला है और उसे चालू रखने के लिए किसी नंबर पर संपर्क करने को कहा जाए, तो सतर्क हो जाइए। यह एक नया साइबर फ्रॉड हो सकता है। दिल्ली पुलिस की साइबर थाना दक्षिण-पश्चिम जिला टीम ने ऐसे ही एक संगठित गिरोह का पर्दाफाश किया है, जिसने एक महिला से ₹2.64 लाख की ठगी कर रकम को महंगे मोबाइल, गिफ्ट कार्ड और अन्य सामान खरीदने में इस्तेमाल किया।

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जांच में पुलिस ने इस गिरोह के चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। उनके कब्जे से 20 मोबाइल फोन, लैपटॉप, टैबलेट, सोने-चांदी के आभूषण, नकदी और एक टाटा हैरियर कार बरामद की गई है।

ऐसे दिया गया वारदात को अंजाम

पुलिस के अनुसार पीड़िता को एक मोबाइल नंबर से संदेश मिला कि उसका IGL गैस कनेक्शन बंद किया जा रहा है। संदेश में सहायता के लिए दूसरे नंबर पर संपर्क करने को कहा गया।

जब महिला ने उस नंबर पर फोन किया तो आरोपियों ने व्हाट्सएप के जरिए एक APK फाइल भेजी और उसे इंस्टॉल करने के लिए कहा। जैसे ही फाइल मोबाइल में इंस्टॉल हुई, साइबर अपराधियों ने फोन तक अनधिकृत पहुंच बना ली और बैंक खाते व क्रेडिट कार्ड से कई लेनदेन कर लगभग ₹2.64 लाख निकाल लिए।

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पुलिस के मुताबिक चोरी की रकम तुरंत ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर महंगे मोबाइल फोन, गिफ्ट कार्ड और अन्य सामान खरीदने में खर्च कर दी गई ताकि पैसों के स्रोत को छिपाया जा सके।

तकनीकी जांच से खुली पूरे नेटवर्क की परतें

मामले की गंभीरता को देखते हुए साइबर थाना दक्षिण-पश्चिम जिला की विशेष टीम ने तकनीकी जांच शुरू की। जांच के दौरान पता चला कि पीड़िता के क्रेडिट कार्ड से दो महंगे मोबाइल फोन खरीदे गए थे।

पुलिस ने इन मोबाइलों के IMEI नंबर, डिलीवरी एड्रेस और मोबाइल नंबरों का विश्लेषण किया। जांच में सामने आया कि डिलीवरी दिल्ली के शाहीन बाग स्थित एक फर्जी पते पर कराई गई थी, जबकि इस्तेमाल किए गए मोबाइल नंबरों का संबंध कोलकाता और झारखंड में सक्रिय नेटवर्क से था।

शाहीन बाग से मिला पहला सुराग

तकनीकी विश्लेषण के आधार पर पुलिस ने शाहीन बाग स्थित एक दुकान से एक व्यक्ति को पकड़ा, जो साइबर अपराधियों के लिए पार्सल रिसीव करता था। पूछताछ में उसने बताया कि वह कमीशन लेकर पार्सल कोलकाता भेजता था। उसके पास से ऑनलाइन मंगाए गए सोने के सिक्के भी बरामद किए गए।

कोलकाता और झारखंड तक पहुंची जांच

आगे की जांच में कोलकाता के खिदिरपुर हब से एक पार्सल ट्रैक किया गया। पार्सल लेने पहुंचे मोहम्मद साहिल को गिरफ्तार किया गया। डिजिटल साक्ष्यों से उसके अन्य साथियों की जानकारी मिली, जिसके आधार पर मोहम्मद रहीम को भी गिरफ्तार किया गया।

पुलिस के अनुसार रहीम साइबर ठगी से खरीदे गए नए मोबाइल फोन बेहद कम कीमत पर खरीदकर उन्हें अवैध चैनलों और विदेश में मौजूद हैंडलरों तक पहुंचाता था ताकि उनकी पहचान न हो सके।

इसके बाद जांच झारखंड के देवघर पहुंची, जहां से मोहम्मद मोहसिन और मोहम्मद दिलशाद को गिरफ्तार किया गया। दोनों आरोपियों की भूमिका ठगी से खरीदे गए इलेक्ट्रॉनिक सामान को खपाने और अपराध से हुई कमाई को संभालने की थी।

ऐसे काम करता था पूरा साइबर सिंडिकेट

जांच में सामने आया कि यह गिरोह अलग-अलग जिम्मेदारियों के साथ संगठित तरीके से काम कर रहा था। एक टीम लोगों को फर्जी संदेश भेजती थी। दूसरी टीम APK फाइल के जरिए मोबाइल का नियंत्रण हासिल कर बैंक खातों से पैसे निकालती थी। तीसरी टीम ऑनलाइन खरीदे गए सामान की डिलीवरी लेती थी, जबकि चौथा नेटवर्क इन सामानों को बेचकर ठगी की रकम को वैध दिखाने का काम करता था।

पुलिस ने क्या-क्या बरामद किया

पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से संचार में इस्तेमाल होने वाले 13 मोबाइल फोन, ₹61,900 नकद, सात अतिरिक्त मोबाइल फोन, एक लैपटॉप, एक टैबलेट, सोने के सिक्के, अन्य सोने-चांदी के आभूषण, एक चांदी का सिक्का और ठगी की रकम से खरीदी गई टाटा हैरियर कार बरामद की है।

लोगों के लिए दिल्ली पुलिस की सलाह

इस मामले के बाद दिल्ली पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी गैस एजेंसी, बैंक, बिजली कंपनी या सरकारी संस्था के नाम पर आए संदेश में दिए गए लिंक या APK फाइल पर भरोसा न करें। किसी भी स्थिति में मोबाइल में APK फाइल इंस्टॉल न करें, क्योंकि इससे अपराधी आपके फोन का नियंत्रण हासिल कर सकते हैं।

यदि इस तरह का कोई संदिग्ध संदेश प्राप्त हो तो संबंधित कंपनी के आधिकारिक हेल्पलाइन नंबर पर ही संपर्क करें और साइबर ठगी होने पर तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 या साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं।

सामान्य प्रश्न

प्रश्न: APK फाइल क्या होती है?
APK एंड्रॉयड ऐप इंस्टॉल करने की फाइल होती है। अनजान स्रोत से मिली APK फाइल आपके मोबाइल की सुरक्षा से समझौता कर सकती है।

प्रश्न: IGL गैस कनेक्शन के नाम पर आने वाले मैसेज पर क्या करें?
मैसेज में दिए गए नंबर या लिंक पर भरोसा न करें। केवल IGL के आधिकारिक माध्यमों से ही जानकारी की पुष्टि करें।

प्रश्न: साइबर ठगी होने पर सबसे पहले क्या करें?
तुरंत 1930 पर कॉल करें, बैंक को सूचित करें और राष्ट्रीय साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं।

प्रश्न: क्या व्हाट्सएप पर आई APK फाइल सुरक्षित होती है?
यदि वह आधिकारिक और सत्यापित स्रोत से नहीं आई है, तो उसे इंस्टॉल नहीं करना चाहिए। अधिकांश ऐसे मामलों में यही फाइल ठगी का माध्यम बनती है।

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21-09-2026