AI Deepfake से निवेश ठगी: मंत्री का नकली वीडियो, करोड़ों का नुकसान—ऐसे फंस रहा है पढ़ा-लिखा भारत

AI Deepfake तकनीक के जरिए निवेश धोखाधड़ी का नया जाल फैल रहा है, जिसमें क्लोन वेबसाइट, नकली ट्रेडिंग ऐप और फर्जी वीडियो के माध्यम से लोगों को करोड़ों की ठगी का शिकार बनाया जा रहा है।
AI deepfake investment scam

AI Deepfake investment scam धोखाधड़ी का नया प्रचलन है। इसके जाल में पढ़े लिखे लोग बड़ी संख्या में फंस रहे हैं। आप कह सकते हैं कि एआई डीपफेक ठगी का नया और मजबूत हथियार है। कैसे इसकी आड़ में साइबर ठग लोगों को करोड़ो का चूना लगा रहे हैं जानकर आप भी हैरान रह जाएंगे।

AI deepfake investment scam क्या है

इस तरह की ठगी के लिए असली बैंक/ट्रेडिंग प्लेटफ़ॉर्म की हूबहू नकल कर नकली वेबसाइट बनाई जाती है। यही नहीं जाल में फांसने के लिए एआई डीपफेक वीडियो और ऑडियो का सहारा लिया जाता है। इस डीपफेक वीडियो ऑडियो में नेताओं, अधिकारियों या वित्तीय विशेषज्ञों की नकली वीडियो/ऑडियो बनाकर भरोसा दिलाया जाता है।

जाल में फांसने का तरीका

लोगों को जाल में फांसने के लिए फेसबुक, यूटयूब, इंस्टाग्राम पर भारी मुनाफ़े का लालच देकर ऐप डाउनलोड करवाया जाता है। निवेश करने पर नकली मुनाफ़ा दिखाया जाता है ताकि लोग और पैसा लगाएँ।
“अभी निवेश करें वरना मौका हाथ से निकल जाएगा” जैसी बातें कर तुरंत पैसे ट्रांसफर करवाए जाते हैं।

हाल के वास्तविक मामले

आपको शायद याद हो कि वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण का नकली एआई वीडियो बनाकर नागरिकों को एक ट्रेडिंग ऐप में निवेश करने के लिए उकसाया गया। PIB ने इसे फर्जी घोषित किया।
इसी तरह फरीदाबाद की महिला को फेसबुक विज्ञापन से प्रचारित नकली ट्रेडिंग ऐप में निवेश कर भारी नुकसान।
• नोएडा व्यापारी (₹9 करोड़ का नुकसान): क्लोन वेबसाइट और व्हाट्सऐप कॉल पर एआई आवाज़ वाले “सलाहकारों” से धोखा।
• बठिंडा डॉक्टर (₹6 करोड़ का नुकसान): नकली डैशबोर्ड पर दिखाए गए झूठे मुनाफ़े से प्रभावित होकर निवेश किया।
• अंतरराष्ट्रीय उदाहरण (फ्लोरिडा, USA): गोल्ड बुलियन एक्सचेंज स्कैम में निवेशकों से करोड़ों डॉलर लिए गए, पर असल में कोई निवेश नहीं हुआ।

जानते हुए भी कैसे फंस जाते हैं लोग

असल में साइबर ठग डीपफेक वीडियो के सहारे प्राधिकृत व्यक्तियों का भरोसा दिलाते हैं। मंत्री या अधिकारी का चेहरा देखकर लोग विश्वास कर लेते हैं। असली जैसा क्लोन वेबसाइट देखकर भी लोग फंस जाते हैं। भारी मुनाफे का दबाव सबसे बड़ा कारण है। डीपफेक तकनीक असली और नकली में पहचान मुश्किल कर देता है।

ये हैं बचने के उपाय

किसी भी तरह के ऑफर का अधिकारिक स्त्रोत जांचें। PIB फैक्ट-चेक, SEBI और RBI की चेतावनियाँ देखें। URL और ऐप केवल आधिकारिक ऐप स्टोर या सत्यापित डोमेन से डाउनलोड करें। कुछ ही दिनों में तीन गुना पैसा कमाने का दावा हमेशा धोखा है।

कॉलर की पहचान सुनिश्चित करने के लिए केवल अधिकारिक हेल्पलाइन से पुष्टि करें। किसी भी तरह का संदेह या फ्राड होने पर तुरंत राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) https://cybercrime.gov.in/Webform/Accept.aspxया 1930 पर शिकायत दर्ज करें।

Picture of inspector raman kumar

inspector raman kumar

इसंपेक्टर रमण कुमार सिंह, दिल्ली पुलिस में सिनियर इंस्पेक्टर के पद पर तैनात हैं। वह दिल्ली के कई पुलिस थानों के साथ साथ साइबर पुलिस स्टेशन के भी थानध्यक्ष रहे हैं। उन्हें साइबर क्राइम के कई अहम मामलों को सुलझाने के लिए जाना जाता है। वह साइबर जागरूकता के लिए साइबर सेफ नामक व्हाट्स ग्रुप, बी द पुलिस ग्रुप नामक फेसबुक पज ग्रुप के संचालक हैं।

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02-05-2026