सीबीआई की जांच में खुला साफ्टवेयर का खेल

आलोक वर्मा

10 नवंबर को इसी वेबसाइट के जरिए मैंने आपको तो इसलिए नहीं मिलती ईरेल कंफर्म टिकट शीर्षक से छपे अपने लेख के माध्यम से बताया था कि किस तरह देश भर में ई रेल टिकट की कालाबाजारी हो रही है। इस लेख में मैंने ये भी बताया था कि 31 अक्टूबर तक आरपीएफ के हत्थे 1231 लोगों को ई-रेल टिकटों की कालाबाजारी में गिरफ्तार किया जा चुका है। इनसे आरपीएफ ने 7150 ईरेल टिकट बरामद किए जो 1.39 करोड़ रूपये मूल्य के थे। साइबर कैफे पर गैरकानूनी तरीके से चलने वाली इस कालाबाजारी के .ये आंकडे वो हैं जो रिकार्ड पर हैं सैकड़ों मामलों में तो गुपचुप तरीके से कालाबाजारी हो ही रही है शायद ये भी एक बड़ी वजह है कि हमें आपको आनलाइन कंफर्म टिकट नहीं मिलते।

दो दिन पहले सीबीआई ने इस पर सबसे बड़ा खुलासा किया और बताया कि सीबीआई में ही प्रोग्रामर के तौर पर काम करने वाले अजय गर्ग का रैकेट कितना बड़ा था। अब मैं आपको बताने जा रहा हूं कि किस तरह साफ्टवेयर बनाकर ये लोग तत्काल टिकट का फर्जीवाड़ा करते थे। यूएस औऱ रूस के सर्वर का सहारा लेकर इस खास तरह के साफ्टवेयर का इस्तेमाल तत्काल टिकट बुक करने में किया जा रहा है। सीबीआई ने इस सिलसिले में  इंटरपोल से भी मदद मांगी है।

आरपीएफ के हत्थे चढ़े आ टिकट वाले

इस साफ्टवेय़र के माध्यम से एजेंट सिर्फ 30 सेकेंड में सारे टिकट बुक कर लेते हैं। जो साफ्टवेयर खुले बाजार में नहीं बिक सकता और जिसे खरीदने के लिए लंबी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है उसे ये एजेंट विदेशी सर्वर का सहारा लेकर मंगा लेते हैं। बताया जा रहा है कि अजय गर्ग के पास मौजूदा साफ्टवेय़र का लाभ लेने के लिए देश भर के एजेंट उसे मोटी रकम देते थे। 2007 में अजय गर्ग आईआरसीटीसी में था तभी से उसने साफ्टवेयर को विकसित कर लिया था। कहते हैं कि एकमुश्त मोटी रकम के अलावा हर महीने बुक होने वाली टिकट में भी उसका कमीशन होता था। तत्काल टिकट बुक करने वाले दलालों के बीच ये साफ्टवेयर न्यू चाइना के नाम से जाना जाता है। इस साफ्टवेयर की मदद से बिना रेलवे की साइट पर जाए ही तत्काल की टिकटें एक क्लिक पर बुक हो जाती हैं। बताया जा रहा है कि अजय गर्ग को 10 पीएनआर वाले साफ्टवेयर के लिए एकमुश्त 6 लाख औऱ हर महीने 8 हजार रूपये मिल जाते थे। तत्काल टिकट के लिए इस साफ्टवेयर में पहले से ही यात्रियोें के सारे विवरण भर दिए जाते हैं फिर जैसे ही तत्काल की बुकिंग शुरू होती है उसके ठीक पहले साफ्टवेयर पर बुकिंग का आप्शन शुरू हो जाता है और इस साफ्टवेयर को इस्तेमाल करने वाले एजेंट एक साथ तत्काल के सारे टिकट बुक कर लेते हैं।

Support India Vistar

Latest Posts

BREAKING NEWS
दिल्ली में 100 करोड़ का हेरोइन बरामद देखें वीडियो | दिल्ली में पकड़ा गया खलिस्तानी आतंकी | Aadhaar Update: आधार में क्या बदल सकते हैं घर बैठे, फोटो और मोबाइल नंबर बदलने का क्या है तरीका | सोशल मीडिया पर फर्जी विज्ञापन से ठगी का नया ट्रेंड; भूलकर भी न करें ये गलती, जानें शिकायत का तरीका | PM Kisan 24th Installment: अगली ₹2000 की किस्त कब आएगी? किस्त रुकी है तो ऐसे करें जांच | Cyber Fraud: पैसा ट्रांसफर होने से पहले कैसे रुक सकती है साइबर ठगी, ₹5,043 करोड़ बचाने वाले सिस्टम को समझिए | बाबलू डेयरी में किसने चलवाई गोलियां? डिजिटल निगरानी से खुली गांजा, वसूली और बदले की कहानी | Online Fraud: नौकरी और निवेश के नाम पर ₹641 करोड़ की ठगी, आखिर कहां गया पैसा? | सात्विक भोजन क्या है, शरीर को स्वस्थ रखने में इसकी क्या भूमिका? डॉ. अरुण कुमार जायसवाल ने बताया सेहत का मंत्र | बॉटनेट क्या है? Sality Malware ने 23 साल तक कंप्यूटरों को कैसे बनाया साइबर हथियार | Digital Arrest Scam का पैसा कहां गया? CBI ने खोला APK और बैंक खातों का खेल | बिहार का विकास कैसे होगा? रोजगार, पलायन और सामाजिक बंटवारे पर उठे बड़े सवाल |
10-09-2026