जानिए एसएसबी ने अब तक कितने लोगो को तस्करों के चंगुल से बचाया

0
897

सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी)ने भारत-नेपाल और भारत भूटान सीमा पर इस साल अब तक 465 लोगों को मानव तस्करों के चंगुल से बचा चुकी है। बल ने इस सिलसिले में अब तक 118 मामलों में 141 मानव तस्करों को गिरफ्तार किया है। साल 2016 में एसएसबी ने मानव तस्करों के चंगुल से 533 पीड़ितों को बचाया था और 160 मानव तस्करों को भी गिरफ्तार किया था। भारत नेपाल औ भारत भूटान सीमा पर मानव तस्करी की गंभीर समस्या को ध्यान में रखते हुए एसएसबी सीमावर्ती इलाकों में जनजागरूकता का अभियान भी चला रही है जिसके तहत युवाओं को प्रशिक्षण से लेकर अन्य कई तरह के कार्यक्रम हैं। इसी कड़ी में मानव तस्करी और बाल श्रम के विरूद्ध एक वृहद जागरूकता अभियान का आयोजन भारत नेपाल सीमा से सटे सीतामढ़ी जिले के सोनबरसा इलाके में  किया गया। इस कार्यक्रम में लोकगीत, नुक्कड़ नाट्य प्रस्तुति के अलावा पीड़ितों द्वारा अनुभव साझा करने तथा ऑडियो विजुअल के माध्यम से जागरूकता लाने का प्रयास किया गया। इस अभियान को राष्ट्रीय कौशल विकास निगम तथा सशस्त्र सीमा बल की साझा प्रयास द्वारा चलाए जा रहे कार्यक्रमों से भी संदर्भीत किया, जिसके तहत बेरोजगार युवाओं को रोजगारउन्मूक प्रशिक्षण देकर उन्हें स्वावलम्बी तथा आत्मनिर्भर बनाया जा सके। इस कार्यक्रम में हजारों की संख्या में स्थानीय लोगों ने भाग लिया तथा आयोजन का लाभ उठाया। इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्री बिजेंद्र प्रसाद यादव, विद्युत, निषेध, उत्पाद शुल्क, पंजीकरण विभाग मंत्री बिहार सरकार और श्रीमति कुमारी मंजू वर्मा, समाज कल्याण मंत्री बिहार सरकार थे। इस कार्यक्रम का आयोजन सशस्त्र सीमा बल के महानिदेशक, श्रीमति अर्चना रामासुंदरम, भा.पु.से के नेतृत्व और दिशा-निर्देश पर किया गया।

भारत नेपाल सीमा पर सीमा प्रहरी होने के कारण सशस्त्र सीमा बल का महिलाओं एवं बच्चों की तस्करी संबंधित अपराधों से अक्सर ही सामना होता है। पूर्वी चम्पारण, पश्चिमी चम्पारण, सीतामढ़ी, सुपौल, अररिया और किशनगंज जिलों में तैनात सशस्त्र सीमा बल इस गंभीर समस्या को गिरफ्तारी और बचाव अभियान के तहत रोकने में सक्रिय रूप से कार्यरत् है और इसी प्रयास को आगे ले जाते हुए इस समस्या से प्रभावित आबादी को मानव तस्करी और बाल श्रम के दुष्परिणामों से अवगत तथा जागरूक बनाने हेतू,  इस कार्यक्रम का आयोजन इस क्षेत्र में किया गया। मानव तस्करी एवं बालश्रम के विषय पर यह कार्यकम भारत-नेपाल सीमा से सटे इस क्षेत्र में किया गया जिसमें सरकारी एवं गैर सरकारी संगठनों के प्रतिनिधीगण भी सम्मिलित हुए और मानव तस्करी से जूझने तथा पीड़ितों के पुर्नवास हेतू व्यवस्थाओं पर विचार विमर्श किया। पुनर्वासित बच्चों तथा विकलांगों के बीच साइकिल और तिपहिया साइकिल भी वितरित किया गया।

इस विषय पर सीमावर्ती क्षेत्रों के स्कूली बच्चों को संवेदित करने हेतू 39 स्कूलों में चित्रकला प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। उनके चित्रों को प्रदर्शनी के तौर पर प्रदर्शित भी किया गया।

ग्रामीण युवाओं को आत्मनिर्भर तथा स्वावलम्बी बनाने के लिए एस0एस0बी0 द्वारा कौशल विकास  के कार्यक्रमों को भी शामिल करने का प्रयास किया जा रहा है। सशस्त्र सीमा बल और राष्ट्रीय कौशल विकास निगम (एनएसडीसी) के बीच सीमावर्ती क्षेत्रों में युवाओं को विभिन्न प्रकार की रोजगार उन्मुख प्रशिक्षण देने के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किया गया है। इस अवसर पर प्लमबिंग (नलसाजी) व्यापार शिल्प और सुरक्षा पर्यवेक्षक में 60 युवाओं को 45 दिनों का प्रशिक्षण का कार्यक्रम भी शुरू किया गया। इससे पहले संपन्न हुए इलेक्ट्रीशियन प्रशिक्षण में 30 युवाओं में से 18 युवाओं को नियुक्ति पत्र दिए गए।

सशस्त्र सीमा बल के महानिदेशक ने सीमावर्ती क्षेत्रों के लोगो को इस समस्या को खत्म करने के लिए सशस्त्र सीमा बल एवं अन्य एजेंसियों के साथ  हाथ से हाथ मिलाकर काम करने पर बल दिया। उन्होंने इस क्षेत्र में युवाओं के लिए कौशल विकास कार्यकमों के उचित और प्रभावी कार्यान्वयन के लिए जोर दिया ताकि रोजगार के अवसर पैदा किए जा सके। इस कार्यक्रम में प्रयास, प्रथम, सेन्टर डाईरेक्ट, बचपन बचाओ आन्दोलन, अदिथी, ओपेन शेलटर, सेभ द चिल्ड्रेन, बाल सखा, भूमिका विहार और निर्देश जैसे गैर सरकारी संस्थाओं के अलावा इंटेलिजेंस ब्यूरो पटना के संयुक्त निदेशक विवेक श्रीवास्तव, भा.पु.से. तथा संयुक्त राष्ट्र के अधिकारी भी सम्मिलित हुए।

 

WhatsApp Group Join Now
Telegram Group Join Now

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here