चंडीगढ़ में केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) के महानिदेशक श्री प्रवीर रंजन ने शुक्रवार को एक उच्च स्तरीय परिचालन समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। बैठक का उद्देश्य उत्तर क्षेत्र और हवाई अड्डा क्षेत्र की सुरक्षा तैयारियों, परिचालन क्षमता तथा उभरती चुनौतियों का आकलन करना था। इस दौरान ड्रोन खतरों से निपटने की रणनीति, आधुनिक सुरक्षा तकनीकों के उपयोग और विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय को और प्रभावी बनाने पर विस्तार से चर्चा हुई।
CISF की समीक्षा बैठक में किन मुद्दों पर हुआ मंथन?
बैठक में वरिष्ठ अधिकारियों और विभिन्न इकाइयों के कमांडरों ने भाग लिया। देश के महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों और नागरिक उड्डयन क्षेत्र की सुरक्षा को और मजबूत बनाने के लिए कई बिंदुओं पर समीक्षा की गई।
यह भी पढ़ेंः सीआईएसएफ में मिली इन हजारोंं कांस्टेबलों को एक साथ पदोन्नति
विशेष रूप से सीमावर्ती राज्यों में बढ़ती सुरक्षा चुनौतियों, ड्रोन गतिविधियों, आपदा प्रबंधन तथा एंटी-सैबोटेज उपायों को लेकर व्यापक चर्चा हुई। अधिकारियों ने भविष्य की सुरक्षा आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए परिचालन रणनीतियों का मूल्यांकन किया।
ड्रोन खतरों से निपटने के लिए CISF की नई तैयारी
भारतीय सेना के सहयोग से चल रहा प्रशिक्षण कार्यक्रम
जम्मू-कश्मीर, पंजाब, राजस्थान, हरियाणा और गुजरात जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में ड्रोन गतिविधियों को देखते हुए CISF ने भारतीय सेना के सहयोग से चरणबद्ध काउंटर-ड्रोन प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया है।
इस कार्यक्रम के तहत जवानों को संदिग्ध यूएवी (UAV) की पहचान, ट्रैकिंग और उन्हें निष्क्रिय करने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसका उद्देश्य कम ऊंचाई पर उड़ने वाले संभावित हवाई खतरों का प्रभावी तरीके से सामना करना है।
संयुक्त अभ्यास पर भी जोर
आतंकवाद विरोधी अभियानों और आपातकालीन परिस्थितियों में बेहतर तालमेल के लिए CISF लगातार भारतीय सेना और अन्य सुरक्षा एजेंसियों के साथ संयुक्त अभ्यास कर रही है।
राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) और सेना के प्रशिक्षण संस्थानों के साथ आयोजित विशेष अभ्यासों के माध्यम से जवानों की परिचालन क्षमता को मजबूत किया जा रहा है। इसके साथ ही तनाव प्रबंधन और मानसिक सुदृढ़ता के लिए विशेष कार्यक्रम भी संचालित किए जा रहे हैं।
एयरपोर्ट सुरक्षा में कौन-कौन सी आधुनिक तकनीकें शामिल हैं?
बैठक के दौरान देश के विभिन्न हवाई अड्डों पर लागू की जा रही आधुनिक सुरक्षा प्रणालियों की भी समीक्षा की गई।
डिजी यात्रा और आधार सत्यापन
डिजी यात्रा प्रणाली यात्रियों को तेज, सुरक्षित और कागजरहित यात्रा अनुभव उपलब्ध कराने में मदद कर रही है। बायोमेट्रिक आधारित पहचान सत्यापन सुरक्षा को और मजबूत बनाता है।
फुल बॉडी स्कैनर और वीडियो एनालिटिक्स
नई पीढ़ी के फुल बॉडी स्कैनर और सीसीटीवी वीडियो एनालिटिक्स संभावित खतरों की पहचान और निगरानी को अधिक प्रभावी बना रहे हैं। इससे सुरक्षा एजेंसियों को रियल टाइम जानकारी मिलती है।
पेरीमीटर इंट्रूज़न डिटेक्शन सिस्टम
केंद्रीकृत एक्सेस कंट्रोल और पेरीमीटर इंट्रूज़न डिटेक्शन सिस्टम (PIDS) हवाई अड्डों की बाहरी सुरक्षा को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। इससे संवेदनशील क्षेत्रों में अनधिकृत प्रवेश पर निगरानी रखी जा सकती है।
ATRS और BDDS प्रणाली
ऑटोमेटेड ट्रे रिटर्न सिस्टम (ATRS) यात्रियों की सुरक्षा जांच प्रक्रिया को तेज बनाता है, जबकि बम डिटेक्शन एंड डिस्पोजल सिस्टम (BDDS) संभावित विस्फोटक खतरों की पहचान और निस्तारण में मदद करता है।
महिला कमांडो और QRT को किया जा रहा सशक्त
CISF ने हवाई अड्डों पर तैनात क्विक रिएक्शन टीम (QRT) की क्षमता बढ़ाने के लिए विशेष अभियान शुरू किया है। अब तक 49 विमानन सुरक्षा समूहों के 659 कमांडो बैटल इनोकुलेशन प्रशिक्षण पूरा कर चुके हैं।
बल का लक्ष्य वर्ष 2026 के अंत तक देश के सभी 72 हवाई अड्डों पर तैनात QRT कर्मियों को इस विशेष सैन्य प्रशिक्षण से लैस करना है।
महिला कमांडो प्रशिक्षण केंद्र की योजना
बेंगलुरु स्थित 10वीं रिजर्व बटालियन को महिला QRT और कमांडो प्रशिक्षण केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य महिला सुरक्षा कर्मियों को महत्वपूर्ण परिचालन भूमिकाओं के लिए तैयार करना है।
CISF Aviation Security Academy का प्रस्ताव
विमानन सुरक्षा के क्षेत्र में अनुसंधान और प्रशिक्षण को बढ़ावा देने के लिए गृह मंत्रालय के समक्ष CISF Aviation Security Academy (CASA) की स्थापना का प्रस्ताव विचाराधीन है।
यह अकादमी भविष्य में विमानन सुरक्षा से जुड़े प्रशिक्षण, अनुसंधान और क्षमता निर्माण का प्रमुख केंद्र बन सकती है।
महानिदेशक प्रवीर रंजन ने क्या कहा?
बैठक को संबोधित करते हुए CISF महानिदेशक श्री प्रवीर रंजन ने जवानों की कर्तव्यनिष्ठा और पेशेवर कार्यशैली की सराहना की। उन्होंने कहा कि सुरक्षा के साथ-साथ यात्रियों के लिए बेहतर अनुभव उपलब्ध कराना भी महत्वपूर्ण है।
उन्होंने बताया कि एयरलाइंस और एयरपोर्ट ऑपरेटरों के सहयोग से CISF कर्मियों को सॉफ्ट स्किल्स का प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है ताकि सुरक्षा और यात्री सुविधा के बीच संतुलन बनाए रखा जा सके।
उन्होंने दोहराया कि CISF आधुनिक तकनीकों और त्वरित सुरक्षा उपायों के माध्यम से देश के महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे तथा नागरिकों की सुरक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।