आर्थिक सर्वेक्षण:जानें क्या है देश की इकाऩॉमी हेल्थ रिपोर्ट

नई दिल्ली, इंडिया विस्तार। संसद में देश की इकॉनमी की हेल्थ रिपोर्ट यानी आर्थिक सर्वे पेश कर दिया गया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने राज्यसभा में इसे सदन के पटल पर रखा। आर्थिक सर्वे दरअसल बजट से ठीक पहले देश की आर्थिक दशा की तस्वीर होती है। इसमें पिछले 12 महीने के दौरान देश में विकास का ट्रेंड क्या रहा, योजनाओं को किस तरह अमल में लाया गया, इस बारे में विस्तार से बताया जाता है। इस बार के आर्थिक सर्वे में वित्त वर्ष 2019-20 में देश की विकास की रफ्तार 7 फीसदी रहने का अनुमान जाहिर किया गया है। बता दें कि 2018-19 में सकल घरेलू उत्पाद (GDP) की वृद्धि दर पांच साल के न्यूनतम स्तर 6.8 प्रतिशत रही थी। 7 फीसदी ग्रोथ का मतलब है कि भारत दुनिया में सबसे तेज गति से आगे बढ़ता रहेगा। वहीं, ग्लोबल ग्रोथ के कम रहने की भी आशंका व्यक्त की गई है।

देश के विकास दर की रफ्तार: आर्थिक सर्वे में में 2019-20 में GDP की वृद्धि दर 7 प्रतिशत रहने का अनुमान है। पिछले वित्त वर्ष में GDP की वृद्धि दर 6.8 प्रतिशत पर थी। सर्वे में आर्थिक वृद्धि के लिए अच्‍छी संभावनाओं की भविष्‍यवाणी भी की गई है। देश को 2024-25 तक 5,000 अरब अमेरिकी डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लिए सकल घरेलू उत्पाद (GDP) की वृद्धि दर को निरंतर 8 प्रतिशत पर रखने की जरूरत होगी। समीक्षा कहती है कि 2024-25 तक भारत को 5,000 अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के टारगेट को हासिल करने के लिए भारत को अपनी वास्‍तविक वृद्धि दर को 8 प्रतिशत पर बनाए रखने की जरूरत होगी। समीक्षा में सुझाव दिया गया है कि मांग, नौकरियों, निर्यात की विभिन्‍न आर्थिक चुनौतियों से निपटने के लिए इन्‍हें अलग समस्‍याओं के रूप में नहीं, बल्कि एक साथ जोड़कर देखा जाना चाहिए। आर्थिक सर्वे में कहा गया है कि भारत की औसत वृद्धि दर 2015-15, 2017-18 में न केवल चीन से बल्कि कई बड़ी अर्थव्यवस्था से भी ज्यादा रही थी।


राजकोषीय घाटा अनुमान से ज्यादा: 2018-19 में राजकोषीय घाटा 5.8 प्रतिशत रहने का अनुमान जाहिर किया गया है। 2018 में यह 6.4% था। इसका संशोधित बजट अनुमान 3.4 प्रतिशत का था। देश की आय की तुलना में ज्यादा खर्च के अंतर को राजकोषीय घाटा कहा जाता है। इसे इस तरह समझा जा सकता है कि जिस तरह से कमाई से ज्यादा खर्च किसी व्यक्ति की वित्तीय सेहत के लिए खतरनाक होता है, उसी तरह आमदनी से ज्यादा खर्च किसी देश को वित्तीय रूप से खस्ता हाल कर सकता है।

तेल कीमतों पर मिलेगी गुड न्यूज: आर्थिक सर्वे में आने वाले दिनों में तेल की कीमतों में गिरावट का अनुमान जताया गया है। सर्वे के मुताबिक चालू वित्त वर्ष के दौरान कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आएगी। 

टैक्स कलेक्शन कितना: आर्थिक सर्वे में कहा गया है कि डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन में 13.4 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जबकि कॉर्पोरेट टैक्स कलेक्शन भी बेहतर हुआ है। हालांकि इनडायरेक्ट टैक्स कलेक्शन में बजट अनुमान 16 प्रतिशत की तुलना में कमी आई है। इसका कराण GST रेवेन्यू में कमी है। 

हर साल 97 लाख बढ़ेगी वर्किंग फोर्सः 
आर्थिक सर्वे के अनुसार कामकाजी आयु वर्ग की आबादी हर साल करीब 97 लाख बढ़ने का अनुमान है जबकि 2030 से कामकाजी आयु वर्ग के लोगों की संख्या हर साल 42 लाख बढ़ने का अनुमान है। 

गंभीर जल संकट की ओर इशाराः आर्थिक सर्वे में भविष्य में गंभीर जल संकट की ओर इशारा किया गया है। 2050 तक भारत में पानी की किल्लत एक बड़ी समस्या होगी। सर्वे में कहा गया है कि सिंचाई जल पर तुरंत विचार करने की जरूरत है ताकि कृषि की उत्पादकता बढ़ सके।

न्यूनतम मजदूरी के लिए रोडमैप की बात- सर्वे में न्यूनतम मजदूरी तय करने की रूपरेखा भी तय की गई है। सर्वे में कहा गया है कि बेहतर और प्रभावी न्यूनतम मजदूरी तय करने की प्रक्रिया को मजबूत किया जाएगा। इससे निचले स्तर पर न्यूनतम मजदूरी को बेहतर किया जा सकेगा। सर्वे के मुताबिक ग्रामीण इलाकों में न्यूनतम मजदूरी में 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है जबकि रोजगार दर 6.34% रहा है। 

सर्वे में जलवायु परिवर्तन की भी चिंताः क्लाइमेट चेंज पर भी सरकार के प्रयासों की रूपरेखा की चर्चा आर्थिक सर्वे में की गई है। सर्वे में कहा गया है कि 2020 तक 20-25 प्रतिशत तक कार्बन उत्सर्जन कम करने की भारत की घोषणा को देखते हुए वर्ष 2014 में 290 करोड़ की लागत से क्लाइमेट चेंज ऐक्शन प्रोग्राम (CCAP) लॉन्च किया गया था। 

अनाज उत्पादनः आर्थिक समीक्षा में 2018-19 में खाद्यान्न उत्पादन 28.34 करोड़ टन रहने का अनुमान है। कृषि, वानिकी और मत्स्य पालन में 2.9 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान है। 


कितना आयात, कितना निर्यातः 2018-19 में आयात 15.4 प्रतिशत जबकि निर्यात में 12.5 प्रतिशत वृद्धि का अनुमान जताया गया है।


विदेशी मुद्रा भंडार: आर्थिक सर्वे में बताया गया है कि देश में विदेशी मुद्रा भंडार अभी सर्वोच्च स्तर पर है। विदेशी मुद्रा भंडार 2018-19 में 412.9 अरब डॉलर रहने का अनुमान है।

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22-09-2026