दागी नेताओं के चुनाव लड़ने पर रोक से सुप्रीम इंकार

इंडिया विस्तार, नई दिल्ली 

अपराधों का सामना करने वाले व्यक्ति को आरोपपत्र दाखिल करने या आरोप तय होने पर विधानसभा या संसदीय चुनाव लड़ने से अयोग्य घोषित करने का आदेश देने से सुप्रीम कोर्ट ने इनकार करते हुए कुछ दिशा निर्देश कर दिया है।
मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा, जस्टिस रोहिंटन नरीमन, जस्टिस एएम खानविलकर, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस इंदु मल्होत्रा ​​की पीठ ने मंगलवार को फैसला सुनाते हुए कहा कि कोर्ट इसे लेकर नई अयोग्यता नहीं जोड़ सकता। पीठ ने कहा कि ये काम संसद का है और संसद का दायित्व है कि वो चुनाव में अपराधियों को बाहर करने के लिए कानून लेकर आए।
पीठ ने कहा कि संसद को एक कानून लाना चाहिए ताकि जिन लोगों पर गंभीर आपराधिक मामले हैं वो पब्लिक लाइफ में ना आ सकें।वक्त आ गया है कि संसद ये कानून लाए ताकि अपराधी राजनीति से दूर रहें। सार्वजनिक जीवन में आने वाले लोग अपराध की राजनीति से ऊपर हों। राष्ट्र तत्परता से संसद द्वारा कानून का इंतजार कर रहा है। दूषित राजनीति को साफ करने के लिए बडा प्रयास करने की जरूरत है।
पीठ ने कहा कि भ्रष्टाचार राष्ट्रीय आर्थिक आतंक बन गया है और भारतीय लोकतंत्र में राजनीति में अपराधीकरण का ट्रेंड बढता जा रहा है। ऐसे में संसद का दायित्व है कि इस कैंसर का उपचार वक्त रहते करे।
हालांकि पीठ ने कुछ दिशा निर्देश जारी करते हुए कहा है कि हर प्रत्याशी चुनाव आयोग को फार्म भरकर देगा जिसमें लंबित आपराधिक मामले बोल्ट लैटर में बताएगा, प्रत्याशी केसों की जानकारी अपनी पार्टी को देगा, पार्टियां अपने प्रत्याशियों के आपराधिक केसों की जानकारी वेबसाइट पर जारी करेगी और इसका व्यापक प्रचार करेंगी, प्रत्याशी और पार्टियां नामांकन दाखिल करने के बाद लोकल मीडिया (इलेक्ट्रॉनिक और प्रिंट) में लंबित आपराधिक मामलों का पूरा प्रचार करें, चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है कि वो मतदाताओं को पूरी जानकारी दे ताकि वो बेहतर जनप्रतिनिधि चुन सकें

सुप्रीम कोर्ट ने 28 अगस्त को इस मुद्दे पर फैसला सुरक्षित रख लिया था कि क्या एक गंभीर अपराधों में आपराधिक मामले का सामना करने वाले व्यक्ति को आरोपपत्र दाखिल करने या आरोप तय होने या केवल सजा के बाद विधानसभा या संसदीय चुनाव लड़ने से अयोग्य घोषित किया जा सकता है। पीठ ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रखा था।

शुरुआत में अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने अदालत से एक नई योग्यता / अयोग्यता जोड़ने के लिए किसी भी आदेश को पारित करने से बचने का आग्रह किया जिसे या तो संविधान के तहत या जन प्रतिनिधित्व अधिनियम में प्रदान नहीं किया गया है।

एडवोकेट जनरल ने कहा कि अदालत के महान इरादों के बावजूद व्यक्तियों को दोषी करार दिए जाने से पहले चुनाव लड़ने से रोकने के लिए न्यायिक आदेश नहीं दिया जा सकता या राजनीतिक दलों को निर्देशित नहीं किया जा सकता कि वे ऐसे उम्मीदवारों को टिकट न दें। उन्होंने कहा कि चुनाव पहले से ही कब और कैसे चुनाव लड़ने से किसी व्यक्ति को वंचित किया जा सकता है, अदालत इसके लिए नए मानदंड निर्धारित नहीं कर सकती।

जब सीजेआई ने जानना चाहा कि क्या आरोपपत्र वाले व्यक्ति पार्टी के चुनाव चिन्ह के बिना स्वतंत्र उम्मीदवारों के रूप में चुनाव लड़ सकते हैं तो एडवोकेट जनरल ने कहा कि इसे राजनीतिक दलों के विवेक पर छोड़ दिया जाना चाहिए। उन्होंने तर्क दिया था कि इसका कारण अयोग्यता है। जब पहले से ही एक कानून हैतो अदालत एक और अयोग्यता के कानून में शामिल नहीं हो सकती। सीजेआई ने कहा, “हम कानून में नहीं आ रहे हैं। लोगों को उम्मीदवार के बारे में जानने का अधिकार है जिन्हें वे मतदान कर रहे हैं। हम केवल एक पंक्ति कह रहे हैं जिसके खिलाफ बलात्कार, हत्या, भ्रष्टाचार के मामलों में गंभीर अपराध के आरोप लगाए गए हैं, उन्हें पार्टी टिकट नहीं मिलेगा। ”

उन्होंने  कहा था कि चुनाव का अधिकार भी एक अधिकार है। क्या आप उन्हें दोषी ठहराए जाने से पहले ही उन्हें बाहर करके एक निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने के एक महत्वपूर्ण अधिकार से वंचित करेंगे क्योंकि हर आरोपी व्यक्ति को दोषी साबित होने तक निर्दोष माना जाता है।

एजी ने अदालत से कहा कि वह अपनी आंखें निर्दोषता की धारणा के मुख्य सिद्धांत को बंद नहीं कर सकती। कानूनी प्रक्रिया लंबे समय से तैयार की जाती है ताकि एक आदमी पर झूठा आरोप लगाया गया हो तो वह अपनी निर्दोषता साबित कर सके। अदालत संविधान में निर्धारित प्रक्रिया से अलग आदेश पारित नहीं कर सकती।

मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता में पांच जजों की संविधान पीठ पब्लिक इंटरेस्ट फाउंडेशन, पूर्व चुनाव आयुक्त जेसी लिंगदोह और बीजेपी नेता अश्विनी कुमार उपाध्याय
द्वारा दायर याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी जिसमें कानून का एक महत्वपूर्ण सवाल उठाया गया है कि गंभीर आपराधिक मामले का सामना कर रहे व्यक्ति को विधानसभा या संसदीय चुनाव लड़ने से अयोग्य करार कब किया जाए, आरोपपत्र दाखिल करने या आरोप तय हो या फिर सजा सुनाए जाने के बाद।

Support India Vistar

Latest Posts

BREAKING NEWS
दिल्ली में 100 करोड़ का हेरोइन बरामद देखें वीडियो | दिल्ली में पकड़ा गया खलिस्तानी आतंकी | WhatsApp चलाने का तरीका बदल सकता है! SIM Binding के नए नियम से किसे होगी परेशानी? | जामा मस्जिद मेट्रो स्टेशन पर भाग रहा था यात्री, CISF जवान अभिषेक वर्मा ने रोका, DG ने किया सम्मानित | सोशल मीडिया अकाउंट ब्लॉक हो जाए तो क्या करें ? हाई कोर्ट के इस फैसले से समझिए अपने अधिकार | वर्दी में चैंपियन: एशियाई खेलों से पुलिस मैदान तक सीआईएसएफ के खिलाड़ियों की पदक गाथा, मिला डीजी का सम्मान | पैरोल जंपर का खेल: 60 करोड़ की हेरोइन, लखनऊ में फैक्ट्री और नक्सली कनेक्शन, दिल्ली पुलिस के खुलासे ने उड़ाए होश | साइबर ठगी के बाद शिकायत करने में देरी क्यों पड़ सकती है भारी? भोपाल के आंकड़ों से समझिए पूरी प्रक्रिया। | क्या आप जानते हैं स्टेशन मास्टर का काम,उसकी सैलरी ? | कर्तव्य निभाते हुए बिछड़ गए तीन पुलिसकर्मी, दिल्ली में 154 शहीदों को नम आंखों से नमन | एसबीआई के नाम पर फोन आए तो सावधान! डेटा लीक का यह दावा आपके लिए भी बन सकता है खतरा | सनी लियोनी और MTV Webbed: कैसे साइबर जागरूकता को युवाओं के लिए बनाया दिलचस्प? |
24-10-2026