आलिया और रणबीर ने 4 फेरे लेकर क्यों की शादी, बाकी 3 फेरों का क्या है महत्व?

लंबी डेटिंग के बाद आखिरकार कल यानी 14 अप्रैल को महेश भट्ट की बेटी आलिया भट्ट और रणबीर कपूर शादी के बंधन में बंध गए। आलिया-रणबीर के फैंस को इस दिन का बड़ी बेसब्री से इंतज़ार था और 14 अप्रैल को वो लम्हा आ ही गया जब आलिया-रणबीर ने सात जन्मों के लिए एक दूसरे का हाथ थाम लिया। लेकिन क्या आप जानते हैं रणबीर और आलिया ने सात जन्मों का साथ निभाने का वादा सात फेरे लेकर नहीं बल्कि सिर्फ चार फेरे लेकर किया है।

आपको ये जानकर हैरानी होगी आलिया-रणबीर ने शादी की एक परंपरा को बदलते हुए सात फेरे नहीं, बल्कि सिर्फ चार फेरे लिए। आलिया के भाई राहुल भट्ट ने इस बारे में इंडिया टुडे को बताया है,  साथ ही कपल के ऐसा करने के पीछे की वजह भी बताई है।

विवाह में सात नहीं यहां चार फेरे ही होते हैं, ऐसी है मान्यता

विवाह को लेकर हम सभी के मन और मस्तिष्‍क में जो चित्र उभरकर आता है, वह होता है दूल्‍हा और दुल्‍हन के सात फेरे। लेकिन क्‍या आप जानते हैं यह जरूरी नहीं है कि हर जगह 7 फेरे लेकर ही विवाह संपन्‍न हो। कुछ स्‍थानों पर 7 के स्‍थान पर 4 फेरे भी लिए जाते हैं। जी हां यह सच है। दरअसल फेरों के संबंध में पारिष्कर गृहसूत्र और यजुर्वेद में उल्लेख मिलता है कि चार फेरे और 7 वचन लिए जाते हैं। बाद में लोकाचार में इनमें फेरों की संख्या बढ़ती चली गई। मूल रूप से फेरों के माध्यम के जीवन के चार लक्ष्य धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष का पाठ पढ़ाया जाता है। हिंदू धर्म को मानने वालों में भी कई क्षेत्रों में लोग आज भी 7 फेरों की जगह 4 फेरे ही लेते हैं।

आम तौर पर सिख समुदाय की शादी में में ऐसा माना जाता है कि 4 फेरे लेकर ही विवाह संपन्‍न हो जाता है। यहां शादियां दिन में होती हैं और दुल्‍हन के पिता केसरी रंग की पगड़ी का ए‍क सिरा दूल्‍हे के कंधे पर रखते हैं और दूसरा सिरा दुल्‍हन के हाथ में दे दिया जाता है, फिर शुरू होते हैं विवाह के फेरे। सिख समुदाय में दूल्‍हा और दुल्‍हन गुरु ग्रंथ साहिब को बीच में रखकर उसके चारों ओर 4 फेरे लगाते हैं। इसे लवण या फिर लावा या फेरा कहा जाता है। इन 4 फेरों में पहले 3 फेरों में कन्‍या आगे रहती है तो वहीं आखिरी फेरे में वर आगे रहता है। माना जाता है कि इन 4 फेरों में वर और वधू वैवाहिक जीवन के सभी पहलुओं से जुड़ा ज्ञान प्राप्‍त करते हैं।

पहले फेरे में धर्म के मार्ग पर चलने की सीख दी जाती है और यह बताया जाता है विवाह हो जाने के बाद भी व्‍यक्ति को अपने धर्म से समझौता नहीं करना चाहिए। वहीं दूसरे फेरे में अर्थ यानी धन संबंधी ज्ञान के बारे में बताया जाता है कि दोनों को किस प्रकार से सीमित आय में खुद को सुखी रखना चाहिए। तीसरे फेरे में काम के भाव से संबंधित ज्ञान दिया जाता है और चौथे फेरे में नवविवाहित जोड़े को मोक्ष का महत्‍व बताया जाता है।

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20-10-2026