आतंक के खिलाफ लड़ाई के रोमांच का अहसास लेना चाहते हैं क्या ?

आलोक वर्मा

आतंक के खिलाफ लड़ाई (Fight against terrorism) का थ्रील(Thrill) आपने एकाध फिल्मों में जरूर देखा होगा। मगर वह रील लाइफ (Reel life) की ताम झाम से भरी होती है इसलिए रियल लाइफ (real life) में आतंक के खिलाफ लडाई कैसे लड़ी जाती है इससे उसका दूर दूर तक नाता नहीं होता।

रियल लाइफ में आतंक के खिलाफ लड़ाई का थ्रील लेना चाहते हैं तो 24 अगस्त का इंतजार कीजिए। या आप प्री बुकिंग कर सकते हैं।

जी हां आतंक के खिलाफ भारत की लड़ाई का थ्रील लिए एक उपन्यास मार्केट में आने वाला है। आपरेशन ट्रोजन हॉर्स (Opertaion Trojan Horse) यही नाम है इस उपन्यास का।

ऐसा उपन्यास जिसे लिखा है इंटेलिजेंस ब्यूरो में आतंक के खिलाफ कई सारी कामयाब रणनीति बनाकर उस पर अमल करने करवाने वाले डीपी सिन्हा औऱ इंवेस्टीगेशन में अपनी कामयाबी का पताका लहरा चुके पत्रकार अभिषेक शरण ने।

372 पृष्ठ के इस पुस्तक का मूल्य 399 रु है।  आतंक के खिलाफ लड़ाई के भारतीय पहलू को उजागर करता यह उपन्यास एक रोमांचक थ्रिल है। इसमें ऐसा बहुत बहुत कुछ है जिसका पता अभी तक नहीं चला है।

लेखक डी पी सिन्हा के मुताबिक इस उपन्यास की परिकल्पना आतंकवाद के खिलाफ किए गए कई आपरेशन के दौरान हुआ जिसमें वह खुद शामिल थे।

उपन्यास अनगिनत उन अंडरकवर एजेंटो को समर्पित है जिन्होंने आपकी हमारी सुरक्षा के लिए सर्वस्व न्योछावर कर दिया है।

सहलेखक और पत्रकार अभिषेक शरण के मुताबिक उपन्यास आतंक के खिलाफ भारत की लड़ाई की कहानी है।

लश्कर-ए-तैयबा में पांच भारतीय एजेंट

यह 1996 की बात है। एक सोलह वर्षीय लश्कर-ए-तैयबा का फिदायीन सीमा पार पाकिस्तान  से भारत आया। काउंटर टेररिज्म सेल के अफसर शेखर सिंह उसे पकड़ते हैं।

पूछताछ में आतंक के कई मंसूबों का पता लगता है। वह बताता है कि आतंकी समूहों को भारत भेजने का सिलसिला जारी है। उन्हें आम नागरिकों की तरह रहकर ठिकाना बनाने के लिए कहा गया है।

उन्हें कहा गया है कि भारत के अंदर कई जगहों पर बस कर वह देश के खिलाफ तैयारी करें। ऐसी तैयारी जिसके माध्यम से भारत को बर्बाद किया जा सके।

इस चौंकाने वाले खुलासे के बाद शेखर और उनके वरिष्ठ आतंक की इस रणनीति के खिलाफ लड़ाई का फैसला लेते हैं।

पांच खुफिया एजेंटों को लश्करे तोइबा में शामिल कराया जाता है ताकि आतंक की लड़ाई को अंजाम तक पहुंचाया जा सके। आतंक के खिलाफ लड़ाई के इसी रणनीति को ऑपरेशन ट्रॉजन हॉर्स नाम दिया जाता है। एक ऐसा मिशन जो सालों तक चलना है। ऑपरेशन ट्रॉजन हॉर्स मुंबई में हुआ 26/11 हमला सहित दर्जनों सत्य घटनाओं से प्रेरित है। इसमें उन लोगों की कहानी भी शामिल की गई है जिन्होंने देश के बाहर देश के लिए जान न्योछावर कर दिया।

लेखकों के बारे में

डीपी सिन्हा पूर्व आईपीएस अफसर हैं जिनके कैरियर का ज्यादा समय इंटेलीजेंस में बिता है। आतंक के खिलाफ कई ऑपरेशनों में उन्होंने हिस्सा लिया। आईबी निदेशक के अलावा कैबिनेट सचिवालय में उन्होंने सुरक्षा सचिव के रूप में भी काम किया है।

अभिषेक शरण वरिष्ट पत्रकार हैं। पिछले दो दशकों से ज्यादा समय से पत्रकारिता कर रहे अभिषेक शरण ने इंडियन एक्सप्रेस, मुंबई मिरर, हिंदुस्तान टाइम्स और एशियन एज आदि में काम कर चुके हैं।

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