वनों के प्रदेश झारखंड में देश भर के 50 कलाकारों ने अपनी कला से पर्यावरण का अनूठा संदेश दिया। झारखंड में वन विभाग द्वारा जैप (JAP) सभागार में आयोजित 3 दिवसीय All India Spring Art Camp 2026 “प्रकृति 2026” का समापन हो गया।
यह आयोजन विश्व गौरेया दिवस, विश्व वानिकी दिवस और विश्व जल दिवस के अवसर पर किया गया, जिसका उद्देश्य कला के माध्यम से लोगों को प्रकृति और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करना रहा।
ऐसे हुआ “प्रकृति 2026” का समापन
प्रकृति 2026 आर्ट कैंप में झारखंड सहित देशभर से आए लगभग 50 प्रतिष्ठित कलाकारों ने भाग लिया और अपनी कूचियों से कैनवास पर प्रकृति के विविध स्वरूपों को उकेरते हुए यह संदेश दिया कि मानव जीवन में प्रकृति का महत्व अत्यंत महत्वपूर्ण है। कलाकारों ने जल, जंगल, जीव-जंतु और पर्यावरण संतुलन को अपनी कला के जरिए प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया।

“प्रकृति ही जीवन का आधार है”–संजीव कुमार
प्रधान मुख्य वन संरक्षक (HoFF), झारखंड, रांची श्री संजीव कुमार ने कार्यक्रम के दौरान कहा कि यह आयोजन प्रत्येक वर्ष किया जाता है और इसका उद्देश्य कला के जरिए प्रकृति के महत्व को समाज तक पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि “प्रकृति स्वयं एक कला है और कला सृजनशीलता का प्रतीक है”। झारखंड प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध राज्य है और यदि आम जनता को इससे जोड़ा जाए तो संरक्षण के प्रयास और अधिक सफल हो सकते हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि कला का विकास लिपि से पहले हुआ है और हर प्रकार की कला कहीं न कहीं प्रकृति से जुड़ी होती है। इस तीन दिवसीय आयोजन के दौरान लोगों को कला के विभिन्न रूपों से रूबरू होने का अवसर मिला, जिससे प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता और समझ विकसित होती है।
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इस कार्यक्रम में वन विभाग के अधिकारी श्रीकांत वर्मा, अवनीश कुमार चौधरी और विश्वनाथ साह भी उपस्थित रहे। इसके अलावा गांवों की वन सुरक्षा समिति के सदस्य, रांची के विभिन्न स्कूल और कॉलेज के छात्र-छात्राएं तथा शिक्षक भी बड़ी संख्या में शामिल हुए, जिससे यह आयोजन जनभागीदारी का उदाहरण बन गया।
समापन समारोह में कई प्रतिष्ठित कलाकारों को उनके योगदान के लिए सम्मानित किया गया, जिनमें अजय कुमार घोषाल, जयप्रकाश चौहान, पिसुरवों, कमल कुशहारी, रामानुज शेखर, श्रीधर, जयंता खान, सुब्रता राय चौधरी, देवाज्योति सरकार, संजु दास, सी. आर. हेम्ब्रम और साजो देवी शामिल हैं।
“प्रकृति 2026” आर्ट कैंप ने यह साबित किया कि कला केवल अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं, बल्कि समाज को जागरूक करने का एक सशक्त जरिया भी है। ऐसे आयोजन लोगों को प्रकृति के करीब लाने और पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रेरित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।









