बांग्लादेश के ग्रे-मार्केट में भारत से चोरी का मोबाइल फोन जा रहा था। इस सप्लाई के पीछे नकली नोटों के एक आरोपी तस्कर का हाथ था। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने भारत से चोरी के मोबाइल फोन की तस्करी के बड़े रैकेट का खुलासा किया है। इस मामले में बांग्लादेशी सहित तीन मोबाइल फोन सप्लायरों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने इनके पास से पांच दर्जन हाई-एंड एंड्रायड फोन बरामद किया है।
बांग्लादेश ग्रे मार्केट में ऐसे जा रहा था मोबाइल फोन
एडिशनल सीपी संजय भाटिया के मुताबिक क्राइम ब्रांच को चोरी और चोरी के मोबाइल फोन के अवैध व्यापार में शामिल संगठित गिरोहों की जांच और उन पर नकेल कसने का काम सौंपा गया था। जांच में पता चला कि चोरी के मोबाइल फोन भारत से तस्करी कर बांग्लादेश सहित पड़ोसी देशों में भेजे जा रहे थे, जहां इन मोबाइल फोन को ग्रे मार्केट में बेचा जाता था।
हवलदार पंकज गुप्ता को एक गुप्त सूचना मिली कि तीन संदिग्ध मोरजेन हुसैन, मिठू सेख और मोहम्मद आसिक, जो चोरी के मोबाइल फोन के रिसीवर और सप्लायर हैं, बड़ी मात्रा में 70-80 चोरी के मोबाइल फोन लेकर जा रहे हैं।
अपराधियों को पकड़ने के लिए डीसीपी राकेश पावरिया की खास निगरानी और एसीपी पवन कुमार की निगरानी और इंस्पेक्टर विवेकानंद के नेतृत्व में और एसआई सुमित कुमार, एएसआई महेश पाटिल, हवलदार कमल, रजत, महिला कांस्टेबल शिखा की एक विशेष टीम गठित की गई। तकनीकी और अथक कोशिश के बाद, टीम ने आरोपी मोरजेन हुसैन, मिठू सेख और मोहम्मद असिक को दिल्ली के न्यू सीमापुरी स्थित उनके किराए के घर से गिरफ्तार कर लिया।
पूछताछ के दौरान, आरोपी मोरजेन हुसैन और मिठू सेख ने खुलासा किया कि वे सीमापुरी, दिल्ली और शाहिदनगर, यूपी से रिहान और साकिर नामक अपने सहयोगियों से चोरी के सामान/मोबाइल फोन खरीदते हैं और आगे इन चोरी के मोबाइल फोन को मालदा, पश्चिम बंगाल में मासूम और मनन नामक अपने सहयोगियों को सप्लाई करते हैं। इन चोरी के मोबाइल फोन को आगे ग्रे मार्केट में बांग्लादेश में बेचा जाता है।
आरोपी मोहम्मद असिक मासूम और मनन के निर्देश पर बरामद मोबाइल फोन की डिलीवरी लेने आया था ताकि इन मोबाइल फोन को बांग्लादेश में आगे सप्लाई किया जा सके। वह चोरी के मोबाइल फोन प्राप्त करने के लिए अक्सर दिल्ली आता-जाता रहता है। इस प्रकार, वे अब तक डेढ़ साल के अंतराल में बांग्लादेश में लगभग 800 से 900 मोबाइल फोन की आपूर्ति कर चुके हैं।
वर्ष 2012 में आरोपी मोरजेन हुसैन को एनआईए ने पाकिस्तान से भारत-बांग्लादेश सीमा के माध्यम से 500 और 1000 रुपये के नकली भारतीय नोटों (नकली भारतीय मुद्रा नोट) की तस्करी करने और पूरे भारत में उसका प्रचलन करने के मामले में गिरफ्तार किया था। चूंकि उसका ठिकाना बांग्लादेश में था, इसलिए जेल से बाहर आने के बाद उसने चोरी के मोबाइल फोन का कारोबार शुरू कर दिया। इनके पास से पांच दर्जन फोन के अलावा मोहम्मद आसिक के नाम से जारी बांग्लादेशी पासपोर्ट भी बरामद किया गया है।
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