महिलाओं के खिलाफ साइबर अपराध में बढ़ोत्तरी हो रही है। गृह मंत्रालय के ताजा आंकड़े बताते हैं कि महिलाओं के खिलाफ साइबर अपराध में वृद्धि हो रही है।
संसद में दिए गए लिखित जवाब में राज्य मंत्री श्री बंदी संजय कुमार ने बताया है कि 2025 में महिलाओं के खिलाफ साइबर अपराध के कुल 76,650 मामले दर्ज किए गए, जो 2024 की तुलना में 28,322 अधिक हैं।
2025 के आंकड़े क्यों हैं चिंता का विषय
पिछले पांच वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो स्थिति और भी गंभीर नजर आती है। वर्ष 2021 से 2025 के बीच महिलाओं और बच्चों के खिलाफ कुल 9.54 लाख साइबर अपराध दर्ज किए गए हैं।
यह भी पढ़ेंः workplace safety: क्या आपका कार्यस्थल साइबर अपराध से सुरक्षित है
सोशल मीडिया से जुड़े अपराधों में 140 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2021 में जहां 72,301 मामले थे, वहीं 2025 में यह संख्या बढ़कर 1,73,766 हो गई।
महिलाओं के खिलाफ साइबर अपराध किस किस तरह के
महिलाओं के खिलाफ साइबर अपराध के मामलो में अश्लील और आपत्तिजनक सामग्री का प्रसार, यौन क्रियाओं से जुड़े कंटेंट, रेप या सामूहिक बलात्कार से संबंधित पोस्ट, बाल यौन शोषण सामग्री (CSEM) और ऑनलाइन पीछा करना या उत्पीड़न जैसे मामले ज्यादा हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार यह केवल ऑनलाइन समस्या नहीं है, बल्कि समाज में मौजूद लैंगिक हिंसा का डिजिटल विस्तार है।
साइबर अपराध बढ़ने के प्रमुख कारण
इस तेज वृद्धि के पीछे कई कारण सामने आए हैं। इंटरनेट और स्मार्टफोन का बढ़ता उपयोग, सोशल मीडिया पर फर्जी पहचान, ऑनलाइन गुमनामी का दुरुपयोग और डार्क वेब के जरिए अवैध सामग्री का प्रसार प्रमुख कारण हैं।
इसके अलावा, NCRP https://cyberpolice.nic.in/ पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया आसान होने से भी रिपोर्टिंग में वृद्धि हुई है।
सरकार ने कदम उठाए हैं पर आप भी रहिए सचेत
सरकार इस समस्या से निपटने के लिए कई स्तरों पर काम कर रही है। Indian Cyber Crime Coordination Centre (I4C) के जरिए जांच और समन्वय को मजबूत किया जा रहा है।
पुलिस और जांच एजेंसियों को साइबर फॉरेंसिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जबकि आम नागरिकों के लिए डिजिटल सुरक्षा जागरूकता अभियान भी चलाए जा रहे हैं। NCRP पोर्टल को और बेहतर बनाया गया है ताकि शिकायत दर्ज करना आसान हो सके।
साइबर अपराध से बचाव के लिए सबसे जरूरी है आपका सचेत रहना। डिजिटल गतिविधि में सतर्कता ही आपका सबसे बड़ा बचाव है। फिर भी अगर कोई धोखा होता है तो उसे तुरंत 1930 पर या साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत करना चाहिए।
ये बड़ी चुनौतियां
हालांकि, इस दिशा में प्रयासों के बावजूद कई समस्याएं बनी हुई हैं। सामाजिक कलंक और प्रतिशोध के डर से कई महिलाएं शिकायत दर्ज नहीं करातीं।
छोटे राज्यों में साइबर क्राइम यूनिट की कमी और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर होने वाले अपराधों की जटिलता भी बड़ी चुनौती बनी हुई है।
महिलाओं के लिए जरूरी सुरक्षा उपाय
इस खतरे से बचने के लिए कई जरूरी कदम उठाए जा सकते हैं। गोपनीय और आसान रिपोर्टिंग व्यवस्था, महिला पुलिस कर्मियों की भागीदारी और विशेष साइबर हेल्प डेस्क की स्थापना अहम हैं।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की जवाबदेही तय करना, फर्जी अकाउंट्स पर निगरानी और आपत्तिजनक कंटेंट को तुरंत हटाना भी जरूरी है।
इसके साथ ही एआई आधारित निगरानी और डिजिटल साक्षरता कार्यक्रम इस समस्या को कम करने में मदद कर सकते हैं।
पीड़ितों को क्या करना चाहिए
अगर कोई महिला साइबर अपराध का शिकार होती है तो उसे तुरंत सबूत सुरक्षित करने चाहिए और NCRP https://cyberpolice.nic.in/ पोर्टल या साइबर पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज करनी चाहिए।
किसी भी तरह के दबाव या ब्लैकमेल में आने से बचना चाहिए और जरूरत पड़ने पर सहायता समूहों या संगठनों से संपर्क करना चाहिए।
महिलाओं के खिलाफ साइबर अपराधों में बढ़ोतरी केवल आंकड़ों की बात नहीं है, बल्कि यह डिजिटल समाज के लिए एक गंभीर चेतावनी है।
इस समस्या से निपटने के लिए जागरूकता, सख्त कानून, तेज जांच और डिजिटल प्लेटफॉर्म की जवाबदेही बेहद जरूरी है।







