पटना के बापू सभागार में 22 मार्च 2026 को एक ऐसा दृश्य देखने को मिला, जिसने बिहार में एक नए सामाजिक आंदोलन की ताकत को स्पष्ट कर दिया। लेट्स इंस्पायर बिहार अभियान के 5वें स्थापना दिवस पर आयोजित “बिहार सांस्कृतिक पुनर्जागरण महासभा” में लगभग 5000 लोगों की उपस्थिति ने इसे ऐतिहासिक बना दिया।
संस्कृति, योग और छठ गीतों ने जगाया गौरव
कार्यक्रम की शुरुआत सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से हुई। इस कार्यक्रम में योग पर आधारित प्रस्तुति ने अनुशासन और आत्मविकास का संदेश दिया। इसके साथ ही छठ गीतों पर समूह नृच्य ने बिहार की परंपरा को जीवंत किया। पूरे आयोजन के दौरान “बिहारी पहचान” और “गौरव” का भाव साफ दिखाई दिया।
कार्यक्रम में आध्यात्मिक गुरु, जनप्रतिनिधि, शिक्षाविद, पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
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विकास वैभव का विज़न: “बिहार बदलेगा तो भारत बदलेगा”
आईपीएस विकास वैभव ने अपने संबोधन में कहा कि बिहार की विरासत दुनिया को दिशा देने वाली रही है। अब फिर से वही समय है कि उस पहचान को स्थापित किया जाए। शिक्षा, रोजगार और स्वास्थ्य के लिए पलायन होना तभी खत्म होगा। उन्होंने साफ कहा कि भारत का विकास, बिहार के विकास से ही संभव है।
आर्थिक चुनौती और बड़ा टारगेट
विकास वैभव ने यह भी बताया:
- बिहार अभी प्रति व्यक्ति आय में पीछे है
- आगे बढ़ने के लिए ~15% सालाना विकास जरूरी है
लेकिन उन्होंने भरोसा जताया कि
👉 सामूहिक प्रयास से यह लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।
जाति से ऊपर उठने का आह्वान
अपने भाषण में उन्होंने समाज के सबसे संवेदनशील मुद्दे पर भी बात की:
- जातिवाद को विकास की सबसे बड़ी बाधा बताया
- लोगों से एकजुट होकर आगे बढ़ने की अपील की
सम्मान समारोह बना आकर्षण का केंद्र
कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों के योगदानकर्ताओं को सम्मानित किया गया:
- शिक्षा
- सामाजिक सेवा
- उद्यमिता
- मीडिया
“बिहार प्रेरणा सम्मान” ने कई लोगों को नई पहचान दी।









