जानें सूर्य नमस्कार करने की पूरी विधि

सूर्य नमस्कार योगासनों में सर्वश्रेष्ठ है। इसके अभ्यास से साधक का शरीर निरोग और स्वस्थ होकर तेजस्वी हो जाता है। ‘सूर्य नमस्कार’ स्त्री, पुरुष, बाल, युवा तथा वृद्धों के लिए भी उपयोगी बताया गया है।

पहली क्रिया

किसी स्वच्छ, एकांत एवं शांत स्थान में दरी अथवा कम्बल बिछाकर निकलते हुए सूर्य के सामने मुख करके खड़े हो जाएँ । दोनों पैरों, एड़ियों तथा पंजों को मिलाते हुए रीढ़ की हड्डी को बिल्कुल सीधा रखें । दोनों हाथों को नमस्कार की मुद्रा में जोड़ ह्रदय के सम्मुख रखें । मन में पहले मंत्र ॐ मित्राय नम: का जप करते हुए सूर्य देवता को प्रणाम करें । यह सूर्य नमस्कार की पहली क्रिया की पूर्ण स्थिति है ।

दूसरी क्रिया

दोनों हाथों को ऊपर करते हुए कमर, पीठ, गर्दन, सिर और बाहों को पीछे की ओर ले जाएँ । शरीर का संतुलन बनाए रखें । पैर बिल्कुल सीधे रहेंगे । मन में दुसरे मत्रं ॐ रवये नम: का जप करते हुए सूर्य देवता को प्रणाम करें । यह सूर्य नमस्कार की दूसरी क्रिया की पूर्ण स्थिति है ।

तीसरी क्रिया

दोनों हाथों को वापस नीचे लाते हुए कमर से शरीर को मोड़ते हुए सामने की ओर झुकें । दोनों हाथों की हथेली को दोनों पैरों के बगल में भूमि पर रखें । पैरों को बिल्कुल सीधा रखना है । घुटने न मुड़े ऐसा प्रयास करें । मन में तीसरे मंत्र ॐ सूर्याय नम: का जप करते हुए सूर्य देवता को प्रणाम करें । यह सूर्य नमस्कार की तीसरी क्रिया की पूर्ण स्थिती है ।

चौथी क्रिया

दोनों हथेलियों को भूमि पर लगाए रखते हुए बाएँ पैर को पीछे की ओर जितना संभव हो ले जाएँ । दायाँ घुटना दोनों हाथों के मध्य में रहेगा । छाती को सामने की ओर एवं गर्दन को पीछे की ओर ले जाते हुए आकाश की ओर देखें । मन में चौथे मंत्र ॐ भानेव नम: का जप करते हुए सूर्य देवता को प्रणाम करें । यह सूर्य नमस्कार की चौथी क्रिया की पूर्ण स्थिति है ।

पांचवीं क्रिया

दोनों हथेलियों को भूमि ओर रखते हुए तथा दोनों हाथों को सीधा करते हुए दाएं पैर को भी पीछे की ओर ले जाएँ । दोनों पैरों को परस्पर मिलाते हुए कमर के भाग को ऊपर उठाकर गर्दन व सिर को नीचे की ओर ले जाते हुए पर्वत के समान आकृति बनाएँ । सिर को दोनों भुजाओं के बीच में रखें । शरीर का पूरा भार दोनों पंजों एवं हथेलियों पर रहेगा । मन में पांचवें मंत्र ॐ खगाय नम: का जप करते हुए सूर्य देवता को प्रणाम करें । यह सूर्य नमस्कार की पांचवीं क्रिया की पूर्ण स्थिति है ।

छठी क्रिया

हथेलियों को भूमि पर लगाए रखते हुए हाथों को सीधा करने का प्रयास करें । शरीर का निचला भाग भूमि को स्पर्श करता हूआ रहे तथा गर्दन को पीछे की ओर ले जाते हुए आकाश की ओर देखें । यह भुजंगासन की स्थिति है।

सातवी क्रिया

मन में सातवें मंत्र ॐ हिरण्यगर्भय नम: का जप करते हुए सूर्य देवता को प्रणाम करें । यह सूर्य नमस्कार की सातवीं क्रिया की पूर्ण स्थिति है ।

आठवीं क्रिया

यह स्थिति पांचवीं क्रिया के समान ही है । पुन: पर्वताकार स्थिती में आते हुए मन में आठवें मंत्र ॐ मरीचये नम: का जप करते हुए सूर्य देवता को प्रणाम करें । यह सूर्य नमस्कार की आठवीं क्रिया की पूर्ण स्थिति हैं ।

नौवीं क्रिया

हथेलियों को भूमि पर लगाए रखें । बाएँ पैर को घुटने से मोड़कर सामने लाते हुए दोनों के बीच में रखें । दाएँ को यथासंभव पीछे ले जाएँ । छाती को सामने की ओर देखें । यह क्रिया चौथी क्रिया के समान ही है । उसमें बाएँ पैर को पीछे ले जाते हैं जबकि नौवीं क्रिया में दायें पैर को पीछे की ओर ले जाते हैं । मन में नवें मंत्र ॐ आदित्याय नम: का जप करते हुए सूर्य देवता को प्रणाम करें । यह सूर्य नमस्कार की नौवीं क्रिया की पूर्ण स्थिति है ।

दसवीं क्रिया

दोनों हथेलियों को भूमि पर रखते हुए दाएँ पैर को भी आगे लाकर बाएँ पैर के समकक्ष रखें । तीसरी क्रिया के अनुरूप आते हुए सिर को घुटनों से स्पर्श करने का प्रयास करें । दोनों पैर बिल्कुल सीधे रहेगें । मन में दसवें मंत्र ॐ सवित्रे नम: का जप करते हुए सूर्य देवता को प्रणाम कर्रे । यह सूर्य नमस्कार की दसवीं क्रिया की पूर्ण स्थिती है ।

ग्यारहवीं क्रिया

सीधे खड़े हो जाएँ । दूसरी क्रिया के अनुरूप दोनों हाथों को ऊपर उठाते हुए कमर, पीठ सिर, गर्दन तथा बांहों को पीछे की ओर ले जाएँ । शरीर का संतुलन बनाए रखें। पैर बिल्कुल सीधे रहेंगे । मन में ग्यारहवें मंत्र ॐ अर्काय नम: का जप करते हुए सूर्य देवता को प्रणाम करें ।यह सूर्य नमस्कार की ग्यारहवीं क्रिया की पूर्ण स्थिति है।

बारहवीं क्रिया

सीधे खड़े होकर पहली क्रिया के अनुरूप दोनों हाथों को प्रणाम की मुद्रा में जोड़ लें । मन में बारहवें मंत्र ॐ भास्कराय नम: का जप करते हुए सूर्य देवता को प्रणाम करें। यह सूर्य नमस्कार की बारहवीं क्रिया की पूर्ण स्थिति है ।सूर्य नमस्कार की बारहवीं स्थितिसूर्य नमस्कार की बारहों क्रियाओं के आभ्यास के पश्चात् कुछ क्षण शवासन में विश्राम कर पुन: इसका अभ्यास कर सकते हैं ।

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12-08-2026