पुलवामा हमले में एनआईए चार्जशीट की ये बातें भी जान लीजिए, आतंकियो के वीडियो संदेश का राज औऱ भी बहुत कुछ

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आलोक वर्मा

नई दिल्ली, आलोक वर्मा। पुलवामा हमले की चार्जशीट दायर कर दी गई है। एनआईए ने डेढ़ साल की जांच का जो खाका चार्जशीट में पेश किया है उस खाके में बहुत सारी ऐसी जानकारियां हैं जो ना केवल चौंकाती हैं बल्कि कई सारे सवाल भी खड़े करती हैं। हमले का जो वीडियो आतंकियो नें जारी किया था उसमें फिदायीन आईतंकी की आवाज नहीं थी। बल्कि वीडियो एडिर कर दूसरे की आवाज लगाई गई थी। पुलवामा हमले के बाद भी आतंकी एक बड़े हमले की फिराक में थे। ऐसी बहुत सारी बातें चार्जशीट में है।

पुलवामा हमले को समझने के लिए 20 साल पहले के फ्लैश बैक पर नजर डालिए । 1999 में एंयर इंडिया का विमान आईसी814 हाईजैक की घटना से आप सब लोग भली भांति परीचित हैं। इस हाईजैक में मसूद अजहर का भाई इब्राहीम आर्थर की मुख्य भूमिका थी। इसी इब्राहिम के साथ मिलकर मसूद अजहर ने साल 2000 में आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद की स्थापना की। मकसद था भारत के खिलाफ युद्ध। जैश ने तब जम्मू काश्मीर में छोटे मोटे हमलो के अलावा लाल किला हमला और संसद हमला जैसे आतंकी घटनाओं को अंजाम दिया। उसी समय 2001 में अमरीका के न्यूयार्क में 9/11 हमला हुआ। इस हमले का बदला लेने के लिए अमरीकी सेनाओं ने तालिबान के खिलाफ अफगानिस्तान में मोर्चा खोल लिया। दुनिया भर के आतंकी संगठनों की तरह जैश ने भी तब अपना ध्यान अफगान में केंद्रीत कर लिया। हांलाकि इस बीच भी जैश के आतंकी भारत में छोटी मोटी घटनाओं को अंजाम देते रहे। इसी बीच 13 फरवरी 2013 को संसद हमले के दोषी अफजल गुरू को फांसी दे दी गई।

बदला लेने की साजिश

पुलवामा हमला दरअसल आंतकियों के कथित प्रतिशोध की उपज थी। जिसे जैश ए मोहम्मद के लोगो ने अंजाम दिया। अफजल गुरू को फांसी होते ही इब्राहिम और मसूद अजहर ने बदला लेने का फैसला किया। जैश-ए-मोहम्मद का ध्यान एक बार फिर से भारत की तरफ केंद्रीत हो गया। इसके बाद जैश ने पंजाब के दीनानगर थाना हमला, हीरानगर हमले जैसी घटनाओं को फिर से अंजाम देना शुरू किया। प्रतिशोध की साजिश के तहत् सबसे बड़ा हमला पठानकोट में 2016 में किया गया। इस बीच मसूद के भाई इब्राहिम आर्थर के बेटे उमर फारूक औऱ इब्राहिम हैदर बड़े हो गए। इब्राहिम आथर को मसूद ने आफगानिस्तान आपरेशन का चीफ बनाया हुआ था। इसलिए भारत में किसी को भेजना था। जैश ने सबसे पहले इब्राहिम हैदर को लांच किया। इस बीच मोहम्मद उमर अफगानिस्तान में बम बनाने से लेकर हर चीज की ट्रेनिंग ले चुका था। बाद में उसे भी काश्मीर भेज दिया गया। इनके साथ अब्दुल रॉफ, इस्माइल आदि भी जुड़ गए। सीमा पार से ये अक्सर आरडीएक्स औऱ हथियार भी लाते रहे थे। ये सभी मिलकर छोटी मोटी घटनाओं को अंजाम देते रहे।

मसूद अजहर का वो संदेश

पुलवामा हमले की शुरूआत या साजिश की शुरूआत इब्राहिम हैदर के अनकाउंटर में मारे जाने से शुरू हुई। हैदर के मारे जाने के बाद मसूद अजहर ने उमर और उसके साथियों को एक बहुत कड़ा संदेश भेजा  अक्टूबर 2018 में भेजे गए इस संदेश में उन पर लानत देते हुए मसूद ने कुछ बड़ा करने और शहीद होने के लिए प्रेरित किया। इस संदेश ने सबसे ज्यादा आदिल डार को प्रभावित किया। वह फिदायीन बनने के लिए भी तैयार हो गया। यहीं से फिदायीन हमले की तैयारी शुरू हुई। सीमा पार से लाए गए विस्फोटक के अलावा स्थानीय स्तर पर कई तरह के खाद आदि खरीदे गए। बहुत सारे स्थानीय युवकों को भी जोड़ा गया। हमले के लिए सुरक्षा बलों के कई नाकाओं की रेकी हुई। लेकिन सुरक्षा बलों के नाका अक्सर जगह बदल लेते थे इसलिए हमला करना मुश्किल था। तय हुआ कि सुरक्षा बल के काफिले पर हमला किया जाए ताकि बड़ा नुकसान हो।

कार बम

कार बम

नाकाओं पर हमला करने का प्लान विफल होने के बाद फिदायीन हमले की फैसला किया गया। इसके लिए कार बम बनाना था। कार बम के लिए पुरानी नीले रंग की कार इसलिए खरीदी गई क्योंकि उसमें बीच की सीट नहीं थी जिससे विस्फोटक रखने में आसानी थी। इसके अलावा यह कार कई बार खरीदी बेची जा चुकी थी इसलिए इसका तुरंत पता लगाना सुरक्षा बलों के लिए मुश्किल था। कार बम बनाने के बाद वीडियो शूट किया गया आदिल डार की आवाज हकलाहट से भरी हुई थी इसलिए समीर डार की आवाज को लगाया गया औऱ लिप्सिंग के जरिए एडिट किया गया।

हमला

पहले पुलवामा हमला 6 फरवरी को होना था। लेकिन बर्फ पड़ने की वजह से हाईवे बंद हो गया औऱ हमला टालना पड़ा। इसके बाद 14 फरवरी को शाकिर जिसके घर सारा सामान बना था, उसने सुरक्षा बलों के काफिले की हलचल दिखी। इसके बाद शाकिर और आदिल कार बम में ही चले। शाकिर काफिला मार्ग से पहले उतर गया और आदिल ने कार सहित काफिले पर हमला कर दिया।

इसके बाद भी हुई थी रेकी

पुलवामा हमले की कामयाबी से उमर सहित सभी काफी उत्साहित थे। दूसरा इसी तरह का बड़ा हमला करने के लिए अब वे दूसरी कार की तलाश में जुट गए। मगर उसी समय बालाकोट स्ट्राइक हो गया औऱ आतंकी संगठनो पर दवाब बढ़ गया। 20 मार्च के आसपास फिर हमला होना था मगर मुठभेड़ में उमर मारा गया औऱ आतंकियो की यह साजिश धरी रह गई।

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