नकली बीमा लोकपाल अधिकारी की अस असली अपराध कथा को जानिए और हो जाइए सावधान

बीमा लोकपाल
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नकली बीमा लोकपाल अधिकारी बनकर कोई आपकी जेब पर डाका न डाल सके इसलिए इस सत्य अपराध कथा को ध्यान से पढ़िए। इस मामले में लाखों रुपये ठगने वाला आरोपी शिकायतकर्ता के मोहल्ले में ही रहता था। दिल्ली के स्वतंत्र नगर, नरेला निवासी महिला शिकायतकर्ता ने एनसीआर पी पोर्टल के माध्यम से आउटर नॉर्थ दिल्ली के साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराई जिसमें उसने आरोप लगाया कि उसे आईसीआईसीआई बैंक के किसी एजेंट द्वारा फर्जी नियमों और शर्तों पर पांच पॉलिसी बेची गईं। जब उसे मूल नियमों और शर्तों के बारे में पता चला और तो उसने दो पॉलिसी रद्द करवा लीं। शेष तीन पॉलिसियों को रद्द करने का प्रयास कर रही थी कि इसी बीच, उसे अपनी पॉलिसियों को रद्द करने में मदद करने के लिए फर्जी कॉल आने लगे।

नकली बीमा लोकपाल अधिकारी ने क्या किया

कॉल करने वाले ने खुद को बीमा लोकपाल अधिकारी बताया और पॉलिसियों को रद्द करने के बहाने शिकायतकर्ता से बीस पच्चीस लाख रुपये की ठगी की।डीसीपी रवि कुमार सिंह के मुताबिक अपराध की गंभीरता को भांपते हुए, एसीपीऑपरेशन श्री यशपाल सिंह की देखरेख में साइबर एसएचओ रमन कुमार सिंह के नेतृत्व में एसआई तस्वीर माथुर, हेड कांस्टेबल अजय चिक्कारा पवन चिक्कारा रमन मंदीप और शोभावती की एक टीम गठित की गई।

जांच के दौरान, कथित फोन नंबरों के कॉल डिटेल रिकॉर्ड मांगे गए, और विभिन्न स्रोतों से अन्य तकनीकी विवरण प्राप्त किए गए। प्रारंभिक जांच से पता चला कि इस मामले में पीड़िता को बहुत ही पेशेवर और व्यवस्थित तरीके से ठगा गया है। संदिग्ध जगह पर छापा मारा और आरोपी विकास को इस मामले में गिरफ्तार किया गया।आरोपी ने शिकायतकर्ता को कॉल करने के लिए तीन नकली सिम कार्ड का इस्तेमाल किया।

उसने खुद को बीमा लोकपाल कार्यालय का अधिकारी बताया और उसकी बीमा पॉलिसी को रद्द या सेटल करवाने में उसकी मदद की। आरोपी ने शिकायतकर्ता से उसके नाम पर चार नए खाते खोलने और उसके खाते में ही राशि जमा करने को कहा। उसने शिकायतकर्ता से सीधे ओटीपी प्राप्त करने के लिए अपना नकली मोबाइल नंबर बैंक से लिंक करने को कहा। इसके अलावा उसने एटीएम से नकद राशि निकालने के लिए शिकायतकर्ता के एटीएम कार्ड भी प्राप्त कर लिए जिससे उसे विश्वास हो गया कि पॉलिसी रद्द करने के लिए एटीएम कार्ड की आवश्यकता होती है। उसी इलाके का निवासी होने के कारण वह शिकायतकर्ता की हरकतों से अच्छी तरह वाकिफ था।

इसके अलावा आरोपी केवल व्हाट्सएप के जरिए शिकायतकर्ता से संपर्क करता था और कॉल के बाद डिवाइस को बंद कर देता था ताकि कोई उसे पहचान न सके। वह पिछले 6 महीनों से यही प्रक्रिया कर रहा था। उसके पास से पुलिस ने लाखो रुपये कैश के अलावा मारुति बलेनो कार, जेवरात, 5 मोबाइल फोन लैपटाप आदि बरामद किए हैं।

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