नीम की इन किस्मो से 2-3 साल में ही मिलने लगेंगे फूल औऱ फल

नीम का पेड़ (Neem tree) आमतौर पर फूल औऱ फल देने के लिए 6 साल लेता है। मगर वन अनुसंधान संस्थान (Indian Council of Forestry Research and Education (ICFRE) ने इंडिन फार्मर्स फर्टिलाइजर कोपरेटिव लिमिटेड ( indian farmers fertiliser cooperative limited IFFCO) की मदद से नीम की ऐसी किस्में तैयार करने में सफलता प्राप्त की है जो बहुत कम समय में फूल और फल दोनो दे सकता है। दोनो संस्थानो ने नीम सुधार का विशेष कार्यक्रम(Programme) चलाया था।

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नीम का पेड़ (Neem tree) आमतौर पर फूल औऱ फल देने के लिए 6 साल लेता है। मगर वन अनुसंधान संस्थान (Indian Council of Forestry Research and Education (ICFRE) ने इंडिन फार्मर्स फर्टिलाइजर कोपरेटिव लिमिटेड ( Indian farmers Fertiliser cooperative limited IFFCO) की मदद से नीम की ऐसी किस्में तैयार करने में सफलता प्राप्त की है जो बहुत कम समय में फूल और फल दोनो दे सकता है। दोनो संस्थानो ने नीम सुधार का विशेष कार्यक्रम(Programme) चलाया था। इस आनुवांशिक सुधार कार्यक्रम में जल्दी फूल – फल की क्षमता एवं उच्च फल उत्पादन के साथ- साथ अधिक तेल एवं अजाडेरेक्टिन की मात्रा वाले नीम वृक्षों की किस्में विकसित की गयी। इस प्रयास में इम्प्लिमैनटेशन टीम एवं ’रीजनल वरायटी रिलीजिंग समिति (आरवीटीसी)’ की मंजूरी के बाद, नीम की छह किस्मों को व्यावसायिक खेती के लिए स्वीकृति प्रस्ताव किस्म विमोचन समिति (वीआरसी) को प्रस्तुत किया गया था। महानिदेशक वन और विशेष सचिव पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, भारत सरकार श्री सुभाष चंद्रा, एवं अध्यक्ष, वीआरसी ने 18 नवंबर, 2021 को नीम की छह किस्मों अर्थात् एफआरआई-इफको-1, एफआरआई-इफको-2, एफआरआई-इफको-3, एफआरआई-इफको-4, एफआरआई-इफको-5 और एफआरआई-इफको-6 को मंजूरी दी।

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नीम के फूल-फल सिर्फ 2-3 साल में

जारी की गई किस्मों में 2 से 3 साल की उम्र में ही फूल और फल लगने की क्षमता है, जो आमतौर पर 6 साल या उससे भी अधिक उम्र के बाद होती है। जारी की गई किस्मों की औसत तेल एवं अजाडेरेक्टिन की उच्च मात्रा 38.44% तथा 8522.89 पीपीएम है जोकि असिंचित वृक्षारोपण में क्रमशः 27% और 3200 पीपीएम ही पायी जाती है। अधिकतम तेल की मात्रा एफआरआई-इफको-1 (43.51%) में पायी गई तथा इसके बाद क्रमशः एफआरआई-इफको-6 (39.85%), एफआरआई-इफको-5 (39.75%), एफआरआई-इफको-3 (36.57%), एफआरआई-इफको-4 (35.52%) और एफआरआई-इफको-2 (35.44%) मै दर्ज की गई। इसी तरह एजाडिराक्टिन की मात्रा एफआरआई-इफको-2 (9760.33 पीपीएम) में अधिकतम दर्ज की गई, इसके बाद एफआरआई-इफको-4 (9755.67 पीपीएम), एफआरआई-इफको-1 (9559 पीपीएम), एफआरआई-इफको-6 ( 9082.67 पीपीएम), एफआरआई-इफको-3 (6932 पीपीएम) और एफआरआई-इफको-5 (6047.67 पीपीएम) में पायी गई । नीम के तेल की मांग और आपूर्ति के बीच मौजूदा बड़े अंतर को कम करने में विकसित  की गई किस्मों द्वारा महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की उम्मीद है। यहा पर यह उल्लेख करना भी उचित है कि भारत सरकार द्वारा 2015 से शत-प्रतिशत नीम लेपित (कोटेड) यूरिया का उत्पादन करने के निर्णय के बाद नीम के तेल की मांग में काफी तेजी से वृद्धि हुई है। वर्तमान में नीम तेल का कुल उत्पादन लगभग 3000 टन है जिससे कुल यूरिया उत्पादन का मात्र 15 से 20%  ही लेपित (कोट) किया जा सकता है। इस दिशा में इफको ने उच्च नीम के तेल और एजाडिराक्टिन उत्पादक किस्मों को विकसित करने के लिए देश के अग्रणी वानिकी अनुसंधान संस्थान – वन अनुसंधान संस्थान देहारादून को इस अनुसंधान कार्य के लिए चुना। इन किस्मों को टिशू कल्चर द्वारा प्रवर्धित करने की तकनीक एवं सुविधाए भी विकसित की गयी।

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नीम की छह किस्में

इम्प्लिमैनटेशन टीम ने मध्य प्रदेश, गुजरात और राजस्थान राज्यों में विभिन्न भौगोलिक स्थानों पर विभिन्न परीक्षणों क्षेत्रों का दौरा सितंबर 2020 में किया था जिसके बाद समिति ने अपनी अनुशंसा को रीजनल वरायटी रिलीजिंग समिति (आरवीटीसी) भेजा था। रीजनल वरायटी रिलीजिंग समिति (आरवीटीसी) ने भी नीम की छह जीनोटाइप के प्रस्ताव को 20 अक्टूबर, 2020 को विधिवत पुष्टि करते हुये किस्म विमोचन समिति (वीआरसी) को भेज दिया था। किस्म विमोचन समिति (वीआरसी) के अध्यक्ष, श्री सुभाष चंद्रा, महानिदेशक वन और विशेष सचिव पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, भारत सरकार एवं  उपाध्यक्ष श्री ए.एस. रावत, महानिदेशक,  भारतीय वानिकी अनुसंधान और शिक्षा परिषद,  देहारादून के साथ-साथ विभिन्न विषय विशेषज्ञ (वृक्ष सुधार, वन प्रबंधन, वन आधारित उद्योग आदि) की बैठक मे 18 नवंबर, 2021 को नीम की छह किस्मों अर्थात् एफआरआई-इफको-1, एफआरआई-इफको-2, एफआरआई-इफको-3, एफआरआई-इफको-4, एफआरआई-इफको-5 और एफआरआई-इफको-6 को व्यावसायिक खेती करने तथा बीज एवं पौधे तैयार करने की स्वीकृति विधिवत दे दी गयी है।

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