डिजिटल अरेस्ट फ्रॉड गिरोह का भंडाफोड़: 49 लाख की ठगी में साइबर सेल की बड़ी कार्रवाई

डिजिटल अरेस्ट फ्रॉड

क्राइम ब्रांच की साइबर सेल ने संगठित साइबर वित्तीय धोखाधड़ी पर चल रही कार्रवाई में एक अहम सफलता हासिल की है। डिजिटल अरेस्ट आधारित ठगी करने वाले एक बड़े नेटवर्क को तोड़ दिया गया है। यह केस FIR संख्या 8/25 की जांच के दौरान सामने आया, जिसमें 71 वर्षीय महिला से 49 लाख रुपये की ठगी की गई थी। आरोपियों ने कानून प्रवर्तन एजेंसी के नाम पर डर पैदा किया, तकनीकी धोखे का सहारा लिया और मानसिक दबाव बनाकर पीड़िता से पैसे ट्रांसफर करवाए।

डिजिटल अरेस्ट फ्रॉड गिरोह के खिलाफ ऐसे चला ऑपरेशन

डीसीपी आदित्य गौतम के मुताबिक पूरा ऑपरेशन यह कार्रवाई इंस्पेक्टर सुभाष चंद्र की अगुवाई में की गई। टीम में SI जगसीर सिंह, HC मोहित मलिक, और HC गौरव शामिल थे। पूरी निगरानी ACP अनिल शर्मा द्वारा की गई।

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कैसे चलता था ठगी का नेटवर्क (Modus Operandi)

  • आरोपी पुलिस और सरकारी एजेंसियों के नाम पर लोगों को डराते थे।
  • पीड़िता को कानूनी कार्रवाई की धमकी देकर 49 लाख रुपये अलग-अलग खातों में जमा करवाए।
  • पैसे कई बैंकों में घुमाए गए और बाद में एटीएम से निकाले गए।
  • गरीब और बेरोजगार युवाओं को म्यूल अकाउंट संचालित करने के लिए भर्ती किया जाता था ताकि पैसों का स्रोत छुपाया जा सके।
  • तकनीकी जांच के आधार पर लखनऊ के अमीनाबाद, हसनगंज, मडेगंज और सदर कैंट में छापे मारे गए। इनमें से कई अहम सदस्य गिरफ्तार किए गए:
  • 1. मोहम्मद ओवैस (25) – अमीनाबाद
  • स्कूल छोड़ चुका, फ्लेक्स प्रिंटिंग की दुकान में काम करता है।
  • 2. विशाल तिवारी (19) – हसनगंज
  • पहले वर्ष का छात्र, किराना चेन में नौकरी करता है।
  • 3. शकील अहमद (53) – मडेगंज
  • सिलाई का काम करता है, एक अन्य आपराधिक मामले में ट्रायल का सामना कर रहा है।
  • 4. मोहम्मद अहद (25) – मडेगंज
  • आठवीं पास, बेरोजगार।
  • 5. मोहम्मद आतिफ (25) – सदर कैंट
  • बारहवीं पास, निजी होटलों में काम करता है।
  • 6. मोहम्मद उज्जैब (25) – सदर कैंट
  • बारहवीं पास, निजी होटलों में कार्यरत।

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