दिल्ली पुलिस का खुलासाः लिंग बदल कर अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी प्रतिबंधित IMO APP का करते हैं इस्तेमाल

दिल्ली पुलिस

दिल्ली पुलिस की जांच में पता लगा है कि देश में रह रहे अवैध बांग्लादेशी लिंग बदल लेते हैं और सीमा पार अपने परिवार से बात करने के लिए प्रतिबंधित APP का इस्तेमाल कर रहे हैं। पुलिस ने ऐसे सात मोबाइल फोन जब्त किए हैं जिन पर IMO APP का इस्तेमाल किया जा रहा था। यह APP प्रतिबंधित है। दिल्ली के उत्तर-पश्चिमी दिल्ली के विदेशी सेल ने अवैध रूप से रह रहे पांच बांग्लादेशियों को पकड़ा भी है। देश में यह लोग ट्रांस्जेंडर की वेश भूषा में ट्रैफिक सिग्नलों पर भीख मांगने का काम भी कर रहे हैं।

दिल्ली पुलिस की जांच में ऐसे हुआ खुलासा

  • नार्थ वेस्ट डीसीपी भीष्म सिंह के मुताबिक जिले में अवैध बांग्लादेशियों के खिलाफ विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसके लिए एसीपी रंजीत ढाका की निगरानी में विदेशी प्रकोष्ठ के इंचार्ज इंस्पेक्टर विपिन कुमार के नेतृत्व में एसआई सपन, श्यामबीर, एएसआई राजेन्द्र, विजय, हेडकांस्टेबल विकास यादव, विक्रम, कपिल, प्रवीण, सोमबीर, टीका राम, हवा सिंह और कांस्टेबल दीपक की टीम बनाई गई थी।

विशेष जानकारी पर चला ऑपरेशन

पुलिस टीम को अवैध बांग्लादेशी नागरिकों की मौजूदगी के बारे में विशेष खुफिया जानकारी मिली थी, जो संदेह से बचने के लिए खुद को ट्रांसजेंडर के रूप में पेश कर रहे थे और ट्रैफिक सिग्नल पर भीख मांगने और अन्य गतिविधियों में संलग्न थे। 7 दिनों की निरंतर मैनुअल और तकनीकी निगरानी के बाद, पुलिस टीम को जहांगीर पुरी मेट्रो स्टेशन के पास 5 बांग्लादेशियों के होने की सूचना मिली।

लिंग भी ऐसे बदल लिया

पुलिस टीम ने सुबह-सुबह जाल बिछाया और सभी 5 संदिग्धों को पकड़ लिया गया। जांच में पता लगा कि उन्होंने एजेंटों की सहायता से अवैध रूप से भारत में प्रवेश किया था और ट्रेनों के माध्यम से दिल्ली पहुंच गए थे। उन्होंने आगे खुलासा किया कि उन्होंने भेष बदलकर अपना लिंग और रूप बदलने के लिए मामूली सर्जरी और हार्मोनल इंजेक्शन लगवाए ताकि उनकी पहचान ना हो सके

गिरफ्तार लोगों की पहचान मोहम्मद शकीदुल, मोहम्मद दुलाल अख्तर उर्फ हजेरा बीबी, मोहम्मद अमीरुल इस्लाम @ मोनिका, मोहम्मद माहिर उर्फ माही और सद्दाम हुसैन उर्फ रुबीना के रूप में हुई है। इनके कब्जे से 7 ऐसे मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं जिनमें प्रतिबंधित IMO APP इंस्टाल किया गया था इसकी मदद से ये लोग बांग्लादेश में अपने परिवार से बात किया करते थे।

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