साइबर क्राइम शिकायत की संख्या घट रही है, मगर यह राहत वाली खबर नहीं है। जानते हैं क्यों, क्योंकि साइबर क्राइम शिकायत बेशक कम हो रही हो मगर नुकसान तेजी से बढ़ रहा है। भारत में साइबर अपराध को लेकर एक ऐसा आंकड़ा सामने आया है जो पहली नजर में राहत देता है। National Cyber Crime Reporting Portal पर दर्ज साइबर क्राइम और डिजिटल अरेस्ट से जुड़ी शिकायतों की संख्या में कमी का दावा किया गया है। लेकिन इसी दौरान सुप्रीम कोर्ट ने साइबर फ्रॉड से निपटने के लिए सरकार, RBI और राज्यों को कई अहम कदम उठाने पर जोर दिया है।
यह भी पढ़ेंः सुप्रीम कोर्ट ने साइबर ठगी को ‘डकैती’ क्यों कहा? डिजिटल अरेस्ट स्कैम की पूरी कहानी
मामला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि शिकायतों की संख्या घटने का अर्थ यह नहीं माना जा सकता कि साइबर अपराध का वित्तीय खतरा भी उसी अनुपात में कम हो गया है। डिजिटल अरेस्ट, म्यूल अकाउंट, पिग बुचरिंग, क्रिप्टो फ्रॉड और दूसरे सोशल इंजीनियरिंग आधारित फ्रॉड लगातार जांच एजेंसियों और बैंकों के लिए बड़ी चुनौती बने हुए हैं।
2024 में 1.23 लाख से 2026 में 16,377 शिकायतों का आंकड़ा
सरकारी आंकड़ों के अनुसार National Cyber Crime Reporting Portal पर 2024 में डिजिटल अरेस्ट स्कैम और संबंधित साइबर अपराधों की 1,23,672 शिकायतें दर्ज हुई थीं। PIB के एक आधिकारिक नोट में भी 2024 का यही आंकड़ा दिया गया है।
अब अगस्त 2026 की ताजा रिपोर्टों में 16,377 शिकायतों का आंकड़ा सामने आया है। हालांकि यहां एक जरूरी बात समझना जरूरी है। 1,23,672 का आंकड़ा पूरे 2024 का है, जबकि 16,377 को रिपोर्टों में 2026 के मौजूदा आंकड़े के तौर पर बताया गया है। इसलिए इन दोनों आंकड़ों को सीधे घटाकर 75 प्रतिशत की वार्षिक गिरावट बताना उचित नहीं होगा।
यह भी पढ़ेंः डिजिटल अरेस्ट मामलों में बढ़ती ठगी पर सुप्रीम कोर्ट की चिंता, मुआवजा तंत्र पर जल्द फैसला संभव
यही वजह है कि साइबर अपराध की वास्तविक स्थिति समझने के लिए सिर्फ शिकायतों की संख्या देखना पर्याप्त नहीं है। शिकायतों की प्रकृति, वित्तीय नुकसान, FIR में रूपांतरण, फ्रीज की गई रकम और पीड़ितों को वापस मिली राशि भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।
शिकायतें कम, लेकिन नुकसान भारी
साइबर अपराध के बदलते तरीकों ने इस समस्या को और गंभीर बनाया है। डिजिटल अरेस्ट, पिग बुचरिंग, क्रिप्टो फ्रॉड और दूसरे ऑनलाइन वित्तीय अपराधों में अपराधी लगातार नए तरीके अपना रहे हैं।
ऐसे में साइबर अपराध की स्थिति को समझने के लिए सिर्फ शिकायतों की संख्या को देखना पर्याप्त नहीं है। कितनी रकम ठगी गई, कितनी रकम समय रहते फ्रीज की गई और कितने पीड़ितों को पैसा वापस मिला, ये आंकड़े भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं।
राष्ट्रीय स्तर पर उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक करीब 36,000 पीड़ितों को ₹18 करोड़ की राशि वापस की गई है। यह साइबर अपराध के मामलों में त्वरित कार्रवाई और धन की रिकवरी की अहमियत को दिखाता है।
सुप्रीम कोर्ट की साइबर अपराध पर निगरानी
साइबर अपराध के बढ़ते आर्थिक प्रभाव को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट अक्टूबर 2025 से इस मामले पर स्वतः संज्ञान लेकर निगरानी कर रहा है।
अदालत की चिंता सिर्फ साइबर अपराध की जांच तक सीमित नहीं है। पीड़ित के खाते से रकम निकलने के बाद उसे जल्द रोकना, म्यूल अकाउंट की पहचान करना और पीड़ित को धन वापस दिलाने की प्रक्रिया को तेज करना भी इस प्रयास का अहम हिस्सा है।
सुप्रीम कोर्ट की ओर से साइबर फ्रॉड से निपटने के लिए कई महत्वपूर्ण उपायों पर जोर दिया गया है।
RBI के लिए म्यूल अकाउंट फ्रीज करने का SOP
साइबर ठगी की रकम अक्सर म्यूल अकाउंट के जरिए आगे भेजी जाती है। ऐसे खातों की पहचान और उन पर तत्काल कार्रवाई करना साइबर फ्रॉड की रकम को आगे जाने से रोकने में अहम भूमिका निभा सकता है।
इसी उद्देश्य से RBI को चार सप्ताह के भीतर म्यूल अकाउंट फ्रीज करने के लिए SOP तैयार करने का निर्देश दिया गया है।
राज्यों और UTs में शिकायत निवारण और धन वापसी
साइबर फ्रॉड के पीड़ितों के लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में शिकायत निवारण तथा धन वापसी मॉड्यूल विकसित करने पर भी जोर दिया गया है।
इसका सीधा संबंध उस समय से है जो पीड़ित की शिकायत और ठगी की रकम को रोकने के बीच गुजरता है। साइबर फ्रॉड में यह समय बेहद महत्वपूर्ण हो सकता है।
डिजिटल अरेस्ट पीड़ितों को तेज मुआवजा
डिजिटल अरेस्ट साइबर ठगी का ऐसा तरीका है जिसमें अपराधी पुलिस, CBI, ED या दूसरी जांच एजेंसियों के अधिकारी बनकर लोगों को डराते हैं और उनसे पैसे ट्रांसफर करवाते हैं।
ऐसे पीड़ितों के लिए तेज मुआवजा और धन वापसी की व्यवस्था पर भी जोर दिया गया है।
फोन में Kill Switch क्यों महत्वपूर्ण है?
साइबर फ्रॉड के मामले में कुछ मिनट भी बहुत मायने रखते हैं। यदि किसी व्यक्ति को पता चलता है कि उसके साथ ऑनलाइन ठगी हो रही है, तो उसके पास डिजिटल भुगतान को तुरंत रोकने का विकल्प होना उपयोगी साबित हो सकता है।
इसी संदर्भ में मोबाइल फोन में “Kill Switch” की व्यवस्था पर विचार किया जा रहा है।
Kill Switch का उद्देश्य ऐसी आपात स्थिति में डिजिटल भुगतान को तेजी से रोकने में मदद करना है, ताकि ठगी की रकम आगे ट्रांसफर होने से रोकी जा सके।
यह व्यवस्था व्यापक रूप से लागू होती है तो साइबर फ्रॉड के बाद पीड़ित की तत्काल प्रतिक्रिया और बैंकिंग सिस्टम की कार्रवाई के बीच का समय कम किया जा सकता है।
तेलंगाना से सामने आया महत्वपूर्ण संकेत
राज्य स्तर पर भी साइबर अपराध से जुड़े आंकड़ों में कुछ सकारात्मक संकेत दिखाई देते हैं।
तेलंगाना में डिजिटल अरेस्ट के मामलों में 60 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। इसके साथ ही वहां साइबर अपराध की शिकायतों को FIR में बदलने की दर 16.56 प्रतिशत रही, जबकि राष्ट्रीय औसत 1.56 प्रतिशत बताया गया है।
यह अंतर बताता है कि शिकायत दर्ज होने के बाद पुलिस कार्रवाई और FIR में रूपांतरण की प्रक्रिया साइबर अपराध से निपटने में अहम भूमिका निभाती है।
तेलंगाना में 2026 में ₹616 करोड़ का नुकसान हुआ। इनमें से करीब 28 प्रतिशत धन फ्रीज कर बचाया गया।
यह आंकड़ा एक महत्वपूर्ण सबक देता है। साइबर अपराध में सिर्फ अपराधी तक पहुंचना ही जरूरी नहीं है, बल्कि ठगी की रकम को समय रहते रोकना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
उत्तर प्रदेश में सबसे अधिक शिकायतें
राज्यवार रुझान में उत्तर प्रदेश करीब 14 प्रतिशत शिकायतों के साथ सबसे अधिक शिकायतों वाला राज्य बताया गया है।
भारत जैसे बड़े देश में साइबर अपराध की शिकायतों का राज्यवार वितरण इस बात को समझने में मदद करता है कि साइबर अपराध किसी एक शहर या राज्य की समस्या नहीं है। डिजिटल भुगतान और इंटरनेट के बढ़ते इस्तेमाल के साथ इसका असर देश के अलग-अलग हिस्सों में दिखाई दे रहा है।
साइबर अपराध के नए तरीके चिंता बढ़ा रहे हैं
साइबर अपराधी अब एक ही तरीके पर निर्भर नहीं हैं। पिग बुचरिंग, डिजिटल अरेस्ट और क्रिप्टो फ्रॉड जैसे तरीके लोगों को अलग-अलग तरीके से निशाना बना रहे हैं।
पिग बुचरिंग में लंबे समय तक भरोसा कायम करके पीड़ित को निवेश के नाम पर बड़ी रकम लगाने के लिए तैयार किया जा सकता है। डिजिटल अरेस्ट में डर और सरकारी एजेंसियों के नाम का इस्तेमाल किया जाता है। क्रिप्टो फ्रॉड में डिजिटल एसेट और निवेश के नाम पर लोगों को ठगा जा सकता है।
इसलिए शिकायतों में गिरावट को साइबर खतरे के खत्म होने के रूप में देखना सही नहीं होगा।
शिकायतें कम होना अच्छी खबर है, लेकिन तस्वीर पूरी नहीं
साइबर अपराध की शिकायतों में कमी बेहतर निवारण, पुलिस कार्रवाई और पीड़ित सहायता में सुधार का संकेत हो सकती है। FIR conversion rate और फ्रीज की गई रकम जैसे आंकड़े भी सकारात्मक पहलुओं को सामने लाते हैं।
लेकिन दूसरी तरफ ₹9,594 करोड़ का 2026 का वित्तीय नुकसान यह बताता है कि खतरा अभी गंभीर है।
यही कारण है कि साइबर अपराध से निपटने की रणनीति में तीन स्तरों पर काम जरूरी है। शिकायत दर्ज करने की प्रक्रिया आसान हो, ठगी की रकम तुरंत फ्रीज हो और पीड़ित को धन वापसी की प्रक्रिया में अनावश्यक देरी न हो।
सितंबर 2026 तक RBI SOP पर नजर
आगे की कार्रवाई में सितंबर 2026 तक RBI SOP एक महत्वपूर्ण कदम हो सकता है। इसके साथ फोन में Kill Switch के व्यापक इस्तेमाल और जनजागरूकता अभियानों पर भी ध्यान दिया जा रहा है।
साइबर अपराध के खिलाफ तकनीकी व्यवस्था जितनी महत्वपूर्ण है, उतनी ही महत्वपूर्ण आम लोगों की जागरूकता भी है। किसी अनजान व्यक्ति के दबाव में पैसा ट्रांसफर करना, OTP या बैंकिंग जानकारी साझा करना या डिजिटल अरेस्ट के नाम पर डर जाना भारी आर्थिक नुकसान का कारण बन सकता है।










