chanakya niti-आचार्य चाणक्य ने अपनी रचना नीति शास्त्र के 6ठे अध्याय के 17वें श्लोक में पुस्तकों के अलावा जीव जंतुओं से भी सीखने की सलाह दी है। यहां तक कि उन्होंने मुर्गे से भी चार बातें सीखने के लिए कहा है। चाणक्य नीति की बातें जिंदगी के हर मोड़ पर काम आने वाली सीख है। यहां हम चाणक्य नीति की 4 बातों का विशेष रूप से उल्लेख करेंगे। जानिए ये बातें आपकी बड़ी काम की हो सकती हैं।
chanakya niti Hindi-
मौर्यकालीन के समकालीन आचार्य चाणक्य के विचार हमेशा से प्रासंगिक हैं। चाणक्य नीति का अनुसरण कर कोई भी व्यक्ति अपने जीवन में सफलता के स्वाद चख सकता है। उनके मार्गदर्शन से ही प्राचीन काल में अखंड भारत का निर्माण हुआ था। आचार्य चाणक्य अपनी पुस्तक नीति शास्त्र के छठे अध्याय के 17वें श्लोक में कहते हैं कि व्यक्ति को पुस्तकों का अध्ययन करने के अलावा जीव जंतुओं से भी सीखना चाहिए।
वो कहते हैं कि कार्य और व्यवहार में एकाग्रता ना होने पर जीवन में असफलता का स्वाद बार बार चखना पड़ता है। वो कहते हैं कि मुर्गे से चार बातें जरूर सीखें। पहला कि मुर्गा रोजाना ब्रह्म मुर्हुत में उठ जाता है। अगर आप भी जीवन में सफल होना चाहते हैं तो रोजाना ब्रह्म मुर्हुत में जगें। इससे आपके पास कार्य करने के लिए पर्याप्त समय होगा। अतिरिक्त समय मिलेगा तो अतिरिक्त कार्य या पढ़ाई हो सकती है।
मुर्गा युद्ध के लिए सदैव तैयार रहता है। कार्य करने के लिए आपको हमेशा तैयार रहने की जरूरत है। अगर आलस करते हैं तो आप पीछे रह सकते हैं। आचार्य चाणक्य ने मुर्गे की तीसरी आदत के बारे में जिक्र करते हुए कहा है कि उसकी आदत होती है बंधुओं को समान हिस्सा देने की। शास्त्रों में निहित है कि देव और भाई के हिस्से का गबन नहीं होना चाहिए।
मुर्गे की चौथी आदत डटकर खाना है। व्यक्ति को डटकर खाना चाहिए। इससे व्यक्ति बलिष्ठ होता है। स्वस्थ मन और तन के रहने से आदमी अपना कार्य उत्साह से करता है। मुर्गे से अगर व्यक्ति यह चार बातें ही सलीके से सीख ले और उस पर अमल कर ले तो फिर सफलता उसके कदम चूमेगी।
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