अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर पुलिस अनुसंधान विकास ब्यूरो के राष्ट्रीय सम्मेलन में सामने आईं कई अहम बातें

महिला दिवस पर पुलिस अनुसंधान विकास ब्यूरो (BPR&D) ने ‘सार्वजनिक एवं कार्य स्थलों पर महिलाओं की रक्षा और सुरक्षा’ विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया। इस सम्मेलन में कई अहम बातें सामने आईं। सम्मेलन की मुख्य अतिथि केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री स्मृति जुबिन ईरानी थीं। सम्मेलन में ब्यूरो के महानिदेशक बालाजी श्रीवास्तव, निदेशक तेजेन्द्र सिंह लूथरा सहित अर्धसैनिक बलों, राज्य पुलिस आदि के अधिकारियों ने हिस्सा लिया।

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर आयोजित सम्मेलन को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि ने पुलिस बलों के क्षमता निर्माण के क्षेत्र में बीपीआरएंडडी के कार्यों और सार्वजनिक स्थानों एवं कार्यस्थलों पर महिलाओं की रक्षा और सुरक्षा की चुनौतियों का सामना करने हेतु पुलिस बलों को तैयार करने एवं उनके आधुनिकीकरण में बीपीआरएंडडी के प्रयासों की प्रशंसा की।

केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने सभी पुरुषों को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की शुभकामनाएं दीं। माननीया मंत्री ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि जब एक महिला जिम्मेदारी लेती है, तो वह तब तक आराम नहीं करती जब तक कि वह उसे पूरा न कर ले। उन्होंने आगे कहा कि इस अवसर पर बीपीआरएंडडी द्वारा आयोजित किया गया राष्ट्रीय सम्मेलन बेहद अनूठा और महत्वपूर्ण है। उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय महिला पुलिस की सबसे बड़ी विशेषता है कि वे अपने साथियों, समाज और संगठन के सामने वे अपने को कमजोर नहीं दिखाना चाहती हैं। महिला पुलिसकर्मी हमेशा अन्य महिलाओं की सुरक्षा के लिए समर्पित होती हैं, और वे उन चुनौतियों का बयान नहीं करती हैं जिनका वे सामना करती हैं।

उन्नेहोंने कहा कि वह भारतीय पुलिस महिलाओं के सामने आने वाली दो महत्वपूर्ण चुनौतियों से अवगत हैं और इसे कम करने के लिए बीपीआरएंडडी के साथ साझेदारी करने के लिए तैयार हैं।

बीपीआरएंडडी द्वारा आयोजित सम्मेलन

सम्मेलन में उन्होंने दो बातों पर जोर दिया।

1. महिला पुलिस के लिए शिशु गृह सुविधाओं का अभाव: यदि बीपीआरएंडडी चाहे तो महिला एवं बाल विकास मंत्रालय भारतीय पुलिस महिलाओं के लिए जिला स्तर पर शिशु गृह की व्यवस्था कर सकता है।

2. महिला पुलिसकर्मियों को परामर्श सेवा की व्यवस्था: यदि बीपीआरएंडडी चाहें तो NIMHANS के सहयोग से महिला एवं बाल विकास मंत्रालय पूरे देश में भारतीय महिला पुलिसकर्मियों के लिए परामर्श की व्यवस्था कर सकता है।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि बीपीआरएंडडी ने देश के लिए, विशेष रूप से राज्य सरकारों के लिए कार्यस्थल, समाज और घर में महिलाओं की सुरक्षा के लिए एक रोडमैप बनाने का बहुत अच्छा काम किया है। बीपीआरएंडडी के रोडमैप को राज्य सरकारों और अन्य हितधारकों तक पहुंचाया जाना चाहिए। इसमें मुख्य चुनौती यह है कि रोड मैप सामाजिक स्तर पर प्रचलित नहीं है। उन्होंने कहा कि इसे देश भर में पहुँचाने के लिए पहले क्षेत्रीय स्तर पर और फिर राज्य स्तर पर ले जाना होगा। कानून व्यवस्था राज्य का विषय है।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि देश में 704 वन स्टॉप सेंटर और 36 महिला हेल्प लाइन हैं, जिससे 70 लाख महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित की गई है। बीपीआरएंडडी के प्रयास और सहयोग से हम इन सहायता केंद्रों में ओर अधिक लोगों को प्रशिक्षित करना चाहते हैं। वह हर जिले में स्कूली छात्राओं और महिलाओं को आत्मरक्षा के लिए प्रशिक्षण प्रदान करना चाहती है। माननीय मंत्री जी ने आगे कहा कि हर जिले में, हर पुलिस थाने में एक महिला हेल्प डेस्क होनी चाहिए जो वन स्टॉप सेंटरों के साथ सहयोग करे और इसमें ब्यूरो एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

निर्भया फंड में विभिन्न योजनाओं के लिए 9000 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं । जिसमें से  4000 करोड़ रुपये से अधिक राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को पहले ही आवंटित किए जा चुके हैं। उन्होंने आगे सुझाव दिया कि यदि बीपीआरएंडडी निर्भया फंड के अंतर्गत कुछ नई परियोजनाओं को शुरु करता है, तो उनका मंत्रालय अगले वित्तीय वर्ष में उन्हें स्वीकार करने और लागू करने के लिए तैयार है।

इस अवसर पर, मुख्य अतिथि का स्वागत करते हुए बीपीआरएंडडी के महानिदेशक बालाजी श्रीवास्तव ने महिलाओं के विरुद्ध होने वाले अपराधों के प्रति कानूनी कार्रवाईयों को मजबूत करने हेतु सरकार द्वारा किए जा रहे कार्यों की जानकारी दी। उन्होंने निर्भया कांड के बाद कानूनी अधिनियमन और उनमें हुए संशोधनों की श्रृंखला को याद दिलाया, जैसे कि Criminal Law Amendment Act, 2018, Sexual Harassment of Women at Work Place and Redressal Act, 2013 आदि ।

सम्मेलन के सचिव तेजेंदर सिंह लूथरा ने माननीया मुख्य अतिथि और प्रतिभागियों को विषय-वस्तु से अवगत कराया। सम्मेलन का विषय “Break the Bias” है, जिसका अर्थ है महिलाओं के विकास संबंधी उद्देश्यों के व्यापक स्पेक्ट्रम की प्राप्ति की दिशा में समावेशी दृष्टिकोण को बढ़ावा देना। सभी स्थानों पर महिलाओं की रक्षा और सुरक्षा को बढ़ाना, विशेष रूप से सार्वजनिक एवं कार्यस्थलों में, एक अनिवार्य अपेक्षा है।

ब्यूरो ने महिलाओं से संबंधित अपराधों के लिए Police Investigator  और Prosecutors को प्रशिक्षित किया है, और पिछले 04 वर्षों में लगभग 20,000 ऐसे अधिकारियों को प्रशिक्षित किया गया है। ब्यूरो के दो प्रशिक्षण केंद्र भी पुलिस अधिकारियों को महिलाओं से संबंधित Investigation और Prosecution में प्रशिक्षण देने के लिए उत्कृष्टता केंद्र के रूप में विकसित हो रहे हैं। ब्यूरो के पास महिलाओं की सुरक्षा और उत्थान से संबंधित एक अलग माइक्रो-मिशन भी है।

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02-10-2026